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Haldwani: सुशीला तिवारी अस्पताल में भरपूर हैं सरकारी दवाएं; फिर भी डॉक्टर लिख रहे विकल्प वाली मंहगी मेडिसिन

Mon, 14 Apr 2025 11:45 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी Published by: हीरा मेहरा Updated Mon, 14 Apr 2025 11:45 AM IST
सार

सुशीला तिवारी अस्पताल में केवल जेनेरिक दवाएं लिखने के आदेश को डॉक्टर ही नहीं मान रहे हैं। कमीशनखोरी का मर्ज इस कदर हावी है कि महंगी दवा मंगाने के खेल पर 300 किमी दूर बैठे सचिव स्वास्थ्य और निदेशक को चेतावनी जारी करनी पड़ी है। 

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Officers warned the doctors of Sushila Tiwari Hospital Haldwani
सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हल्द्वानी राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधीन सुशीला तिवारी अस्पताल में केवल जेनेरिक दवाएं लिखने के आदेश को धरती के भगवान ही नहीं मान रहे हैं। कमीशनखोरी का दीमक इस कदर हावी है कि महंगी दवा मंगाने के खेल पर 300 किमी दूर बैठे सचिव स्वास्थ्य और निदेशक को चेतावनी जारी करनी पड़ी है। कुल मिलाकर सस्ते इलाज की आस में दूरदराज से आने वाले मरीजों की जेब कट रही है।

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सुशीला तिवारी अस्पताल की ओपीडी में विभिन्न प्रकार की बीमारियों से संबंधित 102 और भर्ती मरीजों के लिए लगभग 472 प्रकार की दवा चिह्नित हैं। यह दवा मरीजों को अस्पताल से ही निशुल्क मिलती हैं। पर लगातार शिकायत मिल रही है कि विभिन्न विभागों में तैनात कुछ डॉक्टर मनमानी करते हुए न तो निर्देशों का पालन कर रहे हैं और न ही अस्पताल की दवाएं लिख रहे हैं। डॉक्टर अपने पर्चे पर बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। इनमें मल्टी विटामिन, लीवर से संबंधित, एंटी बायोटिक, बीपी, शुगर, थायरायड की दवाएं शामिल हैं। बाहर से 1100 रुपये के 10 पत्ते अगर बीमार खरीद ले तो डॉक्टरों का मोटा मुनाफा तय है।

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जन औषधि की दवा भी नहीं लिख रहे
एसटीएच परिसर में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी खुला हुआ है। अगर अस्पताल में दवा उपलब्ध न हो तो जन औषधि केंद्र से सस्ती दवाएं भी रोगियों को उपलब्ध हैं। यहां कमीशन न मिलने के कारण कुछ डॉक्टर जन औषधि केंद्र की दवाओं को बेअसर बताते हुए बाहर से दवा मंगवा रहे हैं।

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क्या है गाइडलाइन
एनएमसी और एमसीआई के प्रावधानों के अनुसार अस्पतालों में सभी रोगियों के इलाज के लिए जेनरिक दवाओं का ही परामर्श दिया जाता है। बहुत आवश्यक और संक्रमण संबंधी भर्ती रोगी के इलाज की परिस्थितियों को देखते हुए विभागाध्यक्ष की ओर से ऐसी दवाओं के परामर्श या अनुमोदन के बाद ही बाहर की दवा दी जा सकती है।

सभी संकाय सदस्यों, विभागाध्यक्षों को आईपीडी और ओपीडी रोगियों को अस्पताल की दवाएं लिखने के लिए पत्र जारी कर दिया है। उच्चाधिकारियों की ओर से कार्रवाई के निर्देश मिले हैं। अब मनमानी होगी तो विभागाध्यक्ष और डॉक्टर स्वयं जिम्मेदार रहेंगे। -डॉ. अरुण जोशी, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी

डॉक्टर सिर्फ जेनरिक दवाएं ही लिखेंगे। जान माल बचाव की संभावना होने पर ही बाहर की दवा मंगवाई जा सकती है। अब शिकायत आएगी तो नोटिस जारी करने के बाद जांच बैठाई जाएगी और फिर नियमानुसार कार्रवाई होगी। -डॉ. आर राजेश, सचिव मेडिकल शिक्षा, उत्तराखंड

 

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