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अब नंधौर में हड़ताल से खनन प्रभावति
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हल्द्वानी डीएम कैंप कार्यालय में एडीएम कैलाश सिंह टोलियों को ज्ञापन सोंपते डंपर स्वामी। अम?
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हल्द्वानी। गौला के बाद अब नंधौर में भी हड़ताल से खनन कार्य पर असर पड़ने लगा है। रॉयल्टी कम करने की मांग को लेकर डंपर मालिकों ने आठ दिन से गौला के चार गेट बंद रखे हैं। वहीं स्टोन क्रशरों द्वारा रेट नहीं खोले जाने से शनिवार को नंधौर के डंपर मालिकों ने हड़ताल कर नदी के पांचों गेट बंद रहे।
डंपर स्वामियों ने गौला के हल्दूचौड़, बेरीपड़ाव, मोटाहल्दू और देवरामपुर गेट बंद रखे। आंवला चौकी, इंद्रानगर, गोरापड़ाव और इंद्रानगर गेट से सिर्फ रेते की निकासी हुई। नंधौर खनन समिति ने भी शुक्रवार को हड़ताल का ऐलान करने के बाद शनिवार को पांचों गेट में से एक भी गेट पर डंपरों की निकासी नहीं होने दी। डंपर मालिकों का कहना है कि एक तरफ सरकार ने रॉयल्टी के रेटों में बढ़ोत्तरी की है वहीं स्टोन क्रशर संचालक भी माल के रेट नहीं खोल रहे हैं। नंधौर खनन समिति के अध्यक्ष पान सिंह मेवाड़ी का कहना है कि अगर सरकार ने रॉयल्टी कम नहीं की साथ ही क्रशर संचालकों ने रेट तय नहीं किये तो डंपर मालिक क्रशरों में माल नहीं डालेंगे।
गौला संघर्ष समिति ने सौंपा एडीएम को ज्ञापन
रॉयल्टी कम करने की मांग को लेकर गौला संघर्ष समिति ने एडीएम कैलाश टोलिया को मुख्यमंत्री के नाम संबंधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा कि आठ दिन की हड़ताल के बाद भी सरकार रॉयल्टी घटाने पर विचार नहीं कर रही है जिससे खनन कार्य प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन देेने वालों में पम्मी सैफी, मनोज मठपाल, भुवन पोखरिया, अर्शद अयूब, संजय बोरा, हरीश पांडे, बबलू, प्रतीक आदि थे।
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ग्रामीणों और वन विभाग की सहमति के बाद खुला गेट
हल्द्वानी। ईमलीघाट गेट पर वन विभाग द्वारा खनन वाहनों के लिए तैयार किया गया मोटर मार्ग शनिवार को ग्रामीणों, वाहन स्वामियों और वन विभाग की आपसी सहमति के बाद खोल दिया गया है। विवाद सुलझाने के लिए वन विभाग और ग्रामीणों के बीच लिखित समझौता हुआ जिसके आधार पर दोनों मार्गों पर वाहनों की आवाजाही रहेगी।
ईमलीघाट गेट पर पानी के कारण पांच दिन पूर्व वन विभाग द्वारा शिवपुरी नंबर छह की सीमा से लगी अपनी ही भूमि पर खनन वाहनों के लिए मोटर मार्ग तैयार किया था। मंगलवार को ग्रामीणों ने नए मोटर मार्ग से आवाजाही में परेशानी की बात कहकर मार्ग का विरोध किया और वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए मार्ग में गड्डे खोद दिए। वन विभाग द्वारा विरोध करने वाले दस ग्रामीणों के खिलाफ लालकुआं थाने में नामजद तहरीर सौंपी गई। इसके बाद भी विवाद न सुलझने पर शनिवार को वन विभाग, वाहन स्वामियों और ग्रामीणों के बीच लिखित समझौता हुआ। समझौते के तहत खनन निकासी वाले खाली वाहन नदी के बीच से निकलेंगे और भरे वाहन नए रास्ते पर चलेंगे। नए रास्ते में ग्रामीणों और पालतू जानवरों की सुरक्षा के लिए वन विभाग का एक कर्मचारी तैनात रहेगा। वाहन स्वामियों और चालकों द्वारा ग्रामीणों के साथ किसी भी तरह की अभद्रता करने पर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। समझौते में ग्रामीण पक्ष से पप्पू, पूनम देवी, लक्ष्मी शंकर, कमल, राजकुमारी, छोटे लाल और वाहन चालकों के पक्ष से रामसिंह पपोला, नवीन सिंह पपोला, कवींद्र कोरंगा, भूपाल सिंह, नवीन मेहता, हरीश सिंह, कमल सिंह आदि थे। समझौता एसडीओ गौला गणेश त्रिपाठी की मध्यस्थता में हुआ।
ईमलीघाट गेट पर मोटर मार्ग के विवाद को ग्रामीणों, वाहन स्वामियों और वन विभाग के बीच समझौते के बाद सुलझा लिया गया है। समझौते के लिए लिखित राजीनामा बनाकर निकासी शुरू कर दी गई है।
- गणेश त्रिपाठी, एसडीओ गौला
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डंपर स्वामियों ने गौला के हल्दूचौड़, बेरीपड़ाव, मोटाहल्दू और देवरामपुर गेट बंद रखे। आंवला चौकी, इंद्रानगर, गोरापड़ाव और इंद्रानगर गेट से सिर्फ रेते की निकासी हुई। नंधौर खनन समिति ने भी शुक्रवार को हड़ताल का ऐलान करने के बाद शनिवार को पांचों गेट में से एक भी गेट पर डंपरों की निकासी नहीं होने दी। डंपर मालिकों का कहना है कि एक तरफ सरकार ने रॉयल्टी के रेटों में बढ़ोत्तरी की है वहीं स्टोन क्रशर संचालक भी माल के रेट नहीं खोल रहे हैं। नंधौर खनन समिति के अध्यक्ष पान सिंह मेवाड़ी का कहना है कि अगर सरकार ने रॉयल्टी कम नहीं की साथ ही क्रशर संचालकों ने रेट तय नहीं किये तो डंपर मालिक क्रशरों में माल नहीं डालेंगे।
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गौला संघर्ष समिति ने सौंपा एडीएम को ज्ञापन
रॉयल्टी कम करने की मांग को लेकर गौला संघर्ष समिति ने एडीएम कैलाश टोलिया को मुख्यमंत्री के नाम संबंधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा कि आठ दिन की हड़ताल के बाद भी सरकार रॉयल्टी घटाने पर विचार नहीं कर रही है जिससे खनन कार्य प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन देेने वालों में पम्मी सैफी, मनोज मठपाल, भुवन पोखरिया, अर्शद अयूब, संजय बोरा, हरीश पांडे, बबलू, प्रतीक आदि थे।
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ग्रामीणों और वन विभाग की सहमति के बाद खुला गेट
हल्द्वानी। ईमलीघाट गेट पर वन विभाग द्वारा खनन वाहनों के लिए तैयार किया गया मोटर मार्ग शनिवार को ग्रामीणों, वाहन स्वामियों और वन विभाग की आपसी सहमति के बाद खोल दिया गया है। विवाद सुलझाने के लिए वन विभाग और ग्रामीणों के बीच लिखित समझौता हुआ जिसके आधार पर दोनों मार्गों पर वाहनों की आवाजाही रहेगी।
ईमलीघाट गेट पर पानी के कारण पांच दिन पूर्व वन विभाग द्वारा शिवपुरी नंबर छह की सीमा से लगी अपनी ही भूमि पर खनन वाहनों के लिए मोटर मार्ग तैयार किया था। मंगलवार को ग्रामीणों ने नए मोटर मार्ग से आवाजाही में परेशानी की बात कहकर मार्ग का विरोध किया और वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए मार्ग में गड्डे खोद दिए। वन विभाग द्वारा विरोध करने वाले दस ग्रामीणों के खिलाफ लालकुआं थाने में नामजद तहरीर सौंपी गई। इसके बाद भी विवाद न सुलझने पर शनिवार को वन विभाग, वाहन स्वामियों और ग्रामीणों के बीच लिखित समझौता हुआ। समझौते के तहत खनन निकासी वाले खाली वाहन नदी के बीच से निकलेंगे और भरे वाहन नए रास्ते पर चलेंगे। नए रास्ते में ग्रामीणों और पालतू जानवरों की सुरक्षा के लिए वन विभाग का एक कर्मचारी तैनात रहेगा। वाहन स्वामियों और चालकों द्वारा ग्रामीणों के साथ किसी भी तरह की अभद्रता करने पर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। समझौते में ग्रामीण पक्ष से पप्पू, पूनम देवी, लक्ष्मी शंकर, कमल, राजकुमारी, छोटे लाल और वाहन चालकों के पक्ष से रामसिंह पपोला, नवीन सिंह पपोला, कवींद्र कोरंगा, भूपाल सिंह, नवीन मेहता, हरीश सिंह, कमल सिंह आदि थे। समझौता एसडीओ गौला गणेश त्रिपाठी की मध्यस्थता में हुआ।
ईमलीघाट गेट पर मोटर मार्ग के विवाद को ग्रामीणों, वाहन स्वामियों और वन विभाग के बीच समझौते के बाद सुलझा लिया गया है। समझौते के लिए लिखित राजीनामा बनाकर निकासी शुरू कर दी गई है।
- गणेश त्रिपाठी, एसडीओ गौला