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प्लास्टिक कचरे से निपटने के लिए प्रदेश में कुछ काम नहीं हो रहा : हाईकोर्ट

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 19 Oct 2022 10:54 PM IST
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Nothing is being done in the state to deal with plastic waste: High Court
नैनीताल। हाईकोर्ट ने प्रदेश के शहरों के स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने पर गहरी चिंता जताई है। इसी के साथ अदालत ने प्लास्टिक कचरे के निस्तारण और सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक को लेकर जिलाधिकारियों की ओर से पेश शपथपत्रों पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि प्लास्टिक और दूसरे कचरे के निस्तारण के लिए जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो रहा है। केवल कागजी काम हो रहे हैं। मामले में अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी।
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मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ में राज्य में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगाने, जहां-तहां बिखरे प्लास्टिक कचरे का निस्तारण करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई।
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अदालत ने कहा कि अब हाईकोर्ट खुद एक ई-मेल आईडी बनाएगा, जिसमें प्रदेश के नागरिक सॉलिड वेस्ट व कचरे की शिकायत दर्ज कर सकेंगे। यह शिकायतें कुमाऊं-गढ़वाल आयुक्त को भेजी जाएंगी। दोनों मंडलों के आयुक्त अपने क्षेत्र की शिकायतों का निस्तारण 48 घंटे के भीतर कर उसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में देंगे।
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अदालत ने कहा कि कुमाऊं-गढ़वाल आयुक्त संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों के साथ गांव-गांव का दौरा कर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की जानकारी लेंगे तथा निस्तारण की भी पहल करेंगे। शहरों में पड़े लीगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए कोर्ट ने संबंधित निकायों को अंतिम अवसर दिया है। कहा कि इसके बाद कोर्ट संबंधित निकायों के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।

ये है याचिका
अल्मोड़ा के हवालबाग निवासी जितेंद्र यादव ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा है कि राज्य सरकार ने 2013 में प्लास्टिक यूज व उसके निस्तारण करने के लिए नियमावली बनाई थी। इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने भी प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स बनाए थे। इनमें उत्पादनकर्ता, परिवहनकर्ता व बिक्रेताओं को जिम्मेदारी दी थी कि वे जितना प्लास्टिक निर्मित माल बेचेंगे उतना ही खाली प्लास्टिक वापस ले जाएंगे। अगर नहीं ले जाते हैं तो संबंधित नगर निगम, नगर पालिका व अन्य को फंड देंगे, जिससे कि वह इसका निस्तारण कर सकें। उत्तराखंड में इसका उल्लंघन किया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में प्लास्टिक के ढेर लगे हुए हैं और इसका निस्तारण नहीं किया जा रहा है।
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