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बाघिन को मारने के लिए अन्य विकल्पों पर करें विचार
रामनगर। आदमखोर बाघिन को मारे न जाने व आबादी में घुस रहे हिंसक वन्य जीवों को मारने का अधिकार जनता को दिए जाने आदि मांगो को लेकर ईको सेंसिटिव जोन विरोधी संघर्ष समिति की बैठक कानियां चौराहे पर संपन्न हुई। बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि कार्बेट व वन प्रशासन बाघिन को मारने मेें नाकाम साबित हुआ है और जनता पर मौत का खतरा मंडरा रहा है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बाघिन को मारने के लिए हेलीकाप्टर व अन्य आधुनिक तकनीकी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाए। आबादी में आने वाले हिंसक वन्य जीवों को मारने का अधिकार जनता को दिए जाने के साथ ही बाघिन द्वारा मारे जाने पर किसान को होने वाले नुकसान का मुआवजा हाथोंहाथ बाजार दरों पर दिया जाए। कहा कि वन्य जीवों द्वारा मारे गये व्यक्ति का मुआवजा 3 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया जाए।
वन्य जीवों के हमले में घायल व्यक्ति को 5 लाख रुपये क्षतिपूर्ति दी जाए व घायल के इलाज का संपूर्ण खर्च सरकार, वन विभाग वहन करे। बैठक में निर्णय लिया गया 3 अक्तूबर सोमवार को मांगो को लेकर निदेशक कार्बेट टाइगर रिजर्व को समिति ज्ञापन सौंपेगी। 6 अक्तूबर को दिन में 12 बजे से कार्बेट पार्क के झिरना जोन में पर्यटकों की आवाजाही बंद कर धरना दिया जायेगा। ललित उप्रेती के संचालन में हुई बैठक में विपिन पांडे, लीलाधर भट्ट, ललिता रावत, महेश जोशी, गोपाल मेहरा, गणेश नेगी, श्याम सैनी, धनेश्वरी घिल्डियाल, प्रभात ध्यानी, गिरीश जोशी, कैसर राना, खुशाल मनराल, पनीराम, ख्याली दत्त मौजूद थे।