{"_id":"62c089e10ba54a3ade7d667e","slug":"no-place-in-schools-how-to-become-bal-vatika-haldwani-news-hld4678112164","type":"story","status":"publish","title_hn":"विद्यालयों में जगह नहीं, कैसे बनें बाल वाटिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विद्यालयों में जगह नहीं, कैसे बनें बाल वाटिका
विज्ञापन
हल्द्वानी। ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में बालवाटिका कक्षाओं का संचालन किया जाना है। स्कूल परिसर में बने आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों में ये कक्षाएं चलाई जानी हैं, लेकिन जिले के प्राथमिक स्तर के 940 स्कूलों में से करीब 502 में ही आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन बने हैं। 438 स्कूलों पर्याप्त जगह नहीं हैं। ऐसे में इन स्कूलों में कैसे बालवाटिका कक्षाओं का संचालन होगा यह बड़ा सवाल है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक वंदना गर्ब्याल ने विद्यालय परिसरों में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण को लेकर भूमि उपलब्धता को लेकर जानकारी मांगी है। जरूरत के अनुसार स्कूलों में नए आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन बन सकते हैं।
सीईओ केएस रावत ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत बालवाटिका कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। इसमें बच्चों की प्री प्राइमरी कक्षाएं चलाई जाएंगी। जिले के सभी स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन नहीं बने हैं। ऐसे में जिन विद्यालयों में भवन बने हैं। पहले उनमें बालवाटिका कक्षाएं चलाई जाएंगी। छह जुलाई से स्कूल खुलने जा रहे हैं। इसके बाद ही इन कक्षाओं का भी शुभारंभ होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक वंदना गर्ब्याल ने विद्यालय परिसरों में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण को लेकर भूमि उपलब्धता को लेकर जानकारी मांगी है। जरूरत के अनुसार स्कूलों में नए आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन बन सकते हैं।
विज्ञापन
सीईओ केएस रावत ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत बालवाटिका कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। इसमें बच्चों की प्री प्राइमरी कक्षाएं चलाई जाएंगी। जिले के सभी स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन नहीं बने हैं। ऐसे में जिन विद्यालयों में भवन बने हैं। पहले उनमें बालवाटिका कक्षाएं चलाई जाएंगी। छह जुलाई से स्कूल खुलने जा रहे हैं। इसके बाद ही इन कक्षाओं का भी शुभारंभ होगा।
विज्ञापन