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Nainital News: राज्य का कोई वनकर्मी नहीं हुआ सम्मानित

Sun, 30 Jul 2023 01:03 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Sun, 30 Jul 2023 01:03 AM IST
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No forest worker of the state was honored
रामनगर (नैनीताल)। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में असाधारण और सराहनीय कार्य करने पर देश भर के वन विभाग के 11 फ्रंटलाइन वर्कर को सम्मानित किया गया। इनमें सिमलीपाल टाइगर रिजर्व के तीन कार्मिकों को मरणोपरांत सम्मान मिला। लेकिन इनमें प्रदेश या कॉर्बेट नेशनल पार्क का कोई कर्मचारी न होना चिंता का विषय है।
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बाघ संरक्षण को लेकर उत्तराखंड के प्रयासों की चहुंओर सराहना की गई। काॅर्बेट नेशनल पार्क भी बेहतर योगदान रहा है। सभी के प्रयास से प्रदेश में बाघों की संख्या में पिछले डेढ़ दशक में काफी इजाफा हुआ है। इसके बावजूद विश्व बाघ दिवस के मौके पर यहां के किसी कर्मचारी, अधिकारी को सम्मानित न किया जाना किसी के गले नहीं उतर रहा है। प्रदेश में लगभग 2100 वन आरक्षी, 1500 वन दरोगा, 450 डिप्टी रेंजर, 308 रेंजर इसके अलावा एसडीओ, डीएफओ से लेकर वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक, अपर प्रमुख वन संरक्षक और प्रमुख वन संरक्षक जैसे पदों पर भी अधिकारियों की फौज है। इसके अलावा दैनिक श्रमिक भी बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। इसके बावजूद उन्हें प्रोत्साहन न मिलना चर्चा का विषय बना हुआ है। इतना ही नहीं देश में छह टाइगर रिजर्व को ग्लोबल कैट्स ऐक्ररेडिशन सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया गया, इनमें कॉर्बेट नेशनल पार्क शामिल नहीं हैं।
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इस संबंध में वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार की पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा में रही। कहा कि विश्व बाघ दिवस पूरे देश व कॉर्बेट पार्क में धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस उपलब्धि के जो असली हकदार हैं, वे हैं दैनिक श्रमिक। वे अपनी जान जोखिम में डालकर साल भर पार्क की सुरक्षा करते हैं। आज वे हाशिये पर हैं और इनकी सुध-बुध लेने वाला कोई नहीं है। 9000-9500 मासिक पगार पर ये काम करते हैं। विडंबना यह है कि इतना कम वेतन भी इन्हें समय से नहीं मिलता। कभी-कभी तो आधा साल बीत जाता है वेतन मिलने में। इतने कम वेतन में कैसे ये अपने परिवार का गुजरा करते होंगे। साल भर अपने परिवार से अलग जंगल में रहकर नौकरी करना आसान नहीं, ऊपर से जान का खतरा अलग। कितना अच्छा होता कि विश्व बाघ दिवस के मौके पर ये दैनिक श्रमिक पुरस्कृत होते और इनका मानदेय बढ़ाने की घोषणा होती।
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इन्हें मिला सम्मान
ओडिशा टाइगर रिजर्व सिमलीपाल के वनरक्षक स्व. मैथी हंसदाह, वन आरक्षी स्वर्गीय बिमल कुमार जेना श्री, स्व.शेखर सेठी को मरणोपरांत सम्मानित किया।

फ्रंटलाइन कर्मचारी-

- केआर शेखर (केरल) दैनिक श्रमिक

- अमृत डोले (असोम) वन दरोगा

- दीप कलिता (असोम) वन दरोगा

- वीरांजिनेया वी (कर्नाटक) उप वन संरक्षक

- आनंद आर (कर्नाटक) वन आरक्षी

- सतीश इवने (मध्य प्रदेश) बीट गार्ड

- ए कविता (तेलंगाना) वन आरक्षी

- प्रह्लाद मंडल (पश्चिम बंगाल) दैनिक श्रमिक


===:
छह टाइगर रिजर्व को दिया सर्टिफिकेट

रामनगर (नैनीताल)। रामनगर में राज्यवार बाघों के आंकड़े जारी किए और बाघों के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए तीन रिपोर्ट जारी की गईं। टाइगर रिजर्व काली, मेलघाट, पीलीभीत, तडोबा अंधेरी, नाईगांव नाजीरा और पेरियार को ग्लोबल कैट्स ऐक्ररेडिशन सर्टिफिकेट से सम्मानित किया गया। पूरे भारत में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में असाधारण व सराहनीय कार्य करने वाले वन विभाग के कुल 11 फ्रंटलाइन वर्कर को सम्मानित किया गया। इनमें सिमलीपाल टाइगर रिजर्व के तीन कार्मिकों को मरणोपरांत सम्मानित मिला।
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