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Kainchi Mela: दो दिन बाद लगेगा कैंची धाम में मेला, जानें क्यों है देश दुनिया में इसकी चर्चा; देखें तस्वीर

Thu, 13 Jun 2024 10:31 AM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 13 Jun 2024 10:31 AM IST
सार

Kainchi Dham Mela: बाबा नीब करौरी का कैंची धाम भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। 15 जून को कैंची धाम का 60वां प्रतिष्ठा दिवस मनाया जाएगा।

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Nainital News: Fair will be held in Kainchi Dham on 15th June
दो दिन बाद लगेगा कैंची धाम में मेला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कैंची में बाबा नीब करौरी आश्रम की स्थापना के बाद से ही वहां हर साल 15 जून को स्थापना दिवस कार्यक्रम होता है। समय बीतने के साथ साथ स्थापना दिवस के इस कार्यक्रम ने कैंची मेले का रूप ले लिया और साल दर साल यह भव्य होता गया। मान्यता है कि बाबा नीब करौरी को हनुमान की उपासना से अनेक चामत्कारिक सिद्धियां प्राप्त थीं। लोग उन्हें हनुमान का अवतार भी मानते हैं। एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले बाबा अपने पैर किसी को नहीं छूने देते थे। यदि कोई छूने की कोशिश करता तो वह उसे हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे। 

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कैंची धाम - फोटो : अमर उजाला

इन दिनों हर रोज दस से पंद्रह हजार श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इस साल मंदिर ट्रस्ट ने दो लाख से अधिक लोगों को मालपुआ उपलब्ध कराने के लिए 42 क्विंटल कागज की थैली दिल्ली से मंगाई है। प्रसाद के साथ मिलने वाली सब्जी कागज से बनाए गए गिलास में उपलब्ध कराई जाएगी। विशेष रूप से बनाए गए चार लाख गिलास मंदिर में पहुंच गए है। पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कागज से निर्मित सामग्री उपयोग में लाई जाएगी। प्रसाद यानी मालपुआ बनाने का काम 12 जून से पूजा पाठ के साथ शुरू हो गया है, जो मेला समाप्त होने तक चलेगा। कैंची के ग्राम प्रधान और मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पंकज निगल्टिया ने बताया कि इस बार दो लाख से अधिक लोगों के आने की उम्मीद है।

देश और दुनिया के लिए बाबा नीब करौरी का कैंची धाम भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। देशभर में बनाए गए अपने 11 धामों में कैंची को बाबा ने अपने विशेष लगाव के चलते मनसा सिद्धि यानी जो मांगा वो मिला का दर्जा दिया था। कैंची के अलावा नैनीताल जिले में भूमियाधार, काकड़ीघाट, हनुमानगढ़ और देश में वृंदावन, ऋषिकेश, लखनऊ, शिमला, फर्रुखाबाद में खिमासेपुर, दिल्ली समेत अन्य स्थानों में धाम हैं। कैंची धाम से बाबा का विशेष लगाव रहा।

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कैंची धाम में भक्त - फोटो : अमर उजाला

बाबा को बहुत प्रिय था कैंची धाम
बाबा नीब करौरी को कैंची धाम बहुत प्रिय था। अक्सर गर्मियों में वे यहीं आकर रहते थे। बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मंदिर बनवाया। उस मंदिर में हनुमान की मूर्ति के साथ-साथ अन्य देवताओं की मूर्तियाँ भी हैं। यहां बाबा नीब करौरी की भी एक भव्य मूर्ति स्थापित की गयी है। बाबा नीब करौरी महाराज के देश-दुनिया में 108 आश्रम हैं। इन आश्रमों में सबसे बड़ा कैंची धाम तथा अमेरिका के न्यू मैक्सिको सिटी स्थित टाउस आश्रम है। 

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कैंची धाम - फोटो : अमर उजाला

हनुमान चालीसा पाठ करते हुए बनने शुरू हुए मालपुए का प्रसाद
जितना महत्व हर वर्ष 15 जून को कैंची धाम स्थापना दिवस का है, उतना ही महत्व यहां मिलने वाला मालपुए के प्रसाद का भी है। मालपुआ का प्रसाद बनाने के कड़े नियम हैं। मालपुएं बनाने का काम आज (12 जून) से बनने शुरू हुए। शुद्ध देशी घी से बने मालपुए बनाने में वही श्रद्धालु भाग ले सकता है जो व्रत पर हो और धोती, कुर्ता धारण कर उस अवधि में लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा हो। प्रसाद के रूप में मालपुए बांटने की इच्छा नीब करौरी महाराज की ही थी।

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नीब करौरी बाबा - फोटो : अमर उजाला

ट्रस्ट के प्रबंधक प्रदीप साह ने बताया कि प्रसाद बांटने के लिए लाखों की संख्या में कागज की थैलियां मंगाई गई है। मालपुए के प्रसाद के साथ आलू की सब्जी भी दी जाती है। मालपुआ प्रसाद बनाने का जिम्मा देख रहे एमपी सिंह ने बताया कि प्रसाद शुद्धता के साथ बनाया जाता है। जिस जगह पर मालपुआ बनाया जाएगा वहां विधि-विधान से भट्टी का पूजन कर दिया गया है। 15 जून को बाबा को भोग लगाने के बाद ही इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। कैची मंदिर के प्रसाद की महत्ता इतनी है कि इसे पाने के लिए लोग दूर-दूर से यहां मंदिर में पहुंचते हैं। जो लोग यहां नहीं पहुंच पाते वह अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के माध्यम से प्रसाद मंगाते हैं।

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कैंची धाम मेला - फोटो : अमर उजाला

कैंची धाम मंदिर के स्थापना के पीछे रोचक कथा
शिप्रा नदी पर स्थित मंदिर के स्थापना के पीछे रोचक कथा है। महाराज के मन में उठी मौज ही उनका संकल्प बन जाती थी। ऐसी ही मौज में बाबा ने कैंची धाम की स्थापना की थी। बुजुर्ग बताते हैं कि वर्ष 1942 में कैची निवासी पूर्णानंद तिवारी सवारी के अभाव में नैनीताल से गेठिया होते हुए पैदल ही कैंची की ओर लौट रहे थे। तभी एक स्थूलकाय व्यक्ति कंबल लपेटे हुए नजर आया तो तिवारी जी डर गए। उस व्यक्ति ने तिवारी जी को उनका नाम लेकर पुकारा और इस समय उनके वहां पहुंचने का कारण भी बता दिया। यह कोई और नहीं बल्कि स्वयं बाबा नीब करौरी महाराज थे। बाबा ने तिवारी से निडर होकर आगे जाने को कहा। तब तिवारी ने बाबा से पूछा कि अब कब उनके दर्शन होंगे तब बाबा ने कहा था 20 साल बाद। यह कहकर बाबा ओझल हो गए।

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कैंची में भक्तों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

20 साल बाद पुरानी यादें की ताजा
ठीक 20 साल बाद बाबा नीब करौरी महाराज तुलाराम साह और श्री सिद्धि मां के साथ रानीखेत से नैनीताल जा रहे थे। तभी बाबा कैंची में उतर गए और कुछ देर तक पैराफिट में बैठे रहे। उन्होंने पुरानी यादें ताजा की और यह स्थान देखने की इच्छा जताई। जहां साधु प्रेमी बाबा और सोमवारी महाराज ने 24 मई 1962 को बाबा के पावन चरण इस भूमि में रखे। यहां वर्तमान में कैंची मंदिर स्थित है। तब बाबा ने कैंची धाम में उस समय घास और जंगल के बीच घिरे चबूतरे और हवन कुंड को ढकने को कहा। ये वही स्थान है जहां सोमवारी महाराज ने वास किया था। वर्तमान में इसमें भगवान हनुमान का मंदिर है। इसी में सोमवारी महाराज की धूणी के अवशेष आज भी सुरक्षित है। कैंची धाम से जुड़े एमपी सिंह ने बताया कि 15 जून 1964 को मंदिर में हनुमान की मूर्ति की प्रतिष्ठा की गई तभी से 15 जून को प्रतिष्ठा दिवस के रूप मे मनाया जाता है।

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कैंची धाम - फोटो : अमर उजाला

ये बड़ी हस्तियां हैं बाबा के भक्त
बाबा के भक्तों में एक आम आदमी से लेकर अरबपति-खरबपति तक शामिल हैं। बाबा के इस पावन धाम में होने वाले नित-नये चमत्कारों को सुनकर दुनिया के कोने-कोने से लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं। बाबा के भक्त और जाने-माने लेखक रिचर्ड अल्बर्ट ने मिरेकल आफ लव नाम से बाबा पर पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक में बाबा नीब करौरी के चमत्कारों का विस्तार से वर्णन है। इनके अलावा हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स, एप्पल के फाउंडर स्टीव जाब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग, विराट और अनुष्का जैसी बड़ी हस्तियां बाबा के भक्त हैं। 

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दो दिन बाद लगेगा कैंची धाम में मेला - फोटो : अमर उजाला

कैंची धाम कैसे पहुंचे?
कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल शहर के पास स्थित है। नैनीताल से 17 किमी दूर कैंची धाम नाम की जगह है, जहां आप सड़क मार्ग के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। दिल्ली से नैनीताल की दूरी लगभग 324 किलोमीटर है। सफर तय करने में करीब साढ़े 6 घंटे का वक्त लगेगा। आगे का सफर भी सड़क मार्ग से कर सकते हैं। अगर आप हवाई सेवा चाहते हैं तो कैंची धाम से सबसे करीब 70 किमी दूर पंतनगर हवाई अड्डा है। कैंची धाम तक पहुंचने के लिए टैक्सी या बस मिल जाएगी। ट्रेन से कैंची धाम का सफर तय करना है तो निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। काठगोदाम से 38 किलोमीटर दूर नीम करोली आश्रम है।

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