{"_id":"604a7b818ebc3edc0649c4e9","slug":"mustache-like-thakur-ram-singh-haldwani-news-hld417853934","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुछें हों तो ठाकुर राम सिंह जैसी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुछें हों तो ठाकुर राम सिंह जैसी
विज्ञापन
अपनी मूछों को दिखाते राम सिंह।
हल्द्वानी। हर व्यक्ति के अपने अलग-अलग शौक होते हैं। किसी को बाल लंबे करने, किसी को नाखून बढ़ाने तो किसी को लंबी मूछें रखने का शौक होता है। बरेली जिले के नवाबगंज के मटकापुर गांव के ठाकुर राम सिंह को लंबी मूछें रखने को शौक है। उन्हाेंने दावा किया कि उनकी मूछों की लंबाई 22 फुट है। 62 साल के राम सिंह 42 साल से वह बड़े चाव से अपनी मूछों को सहेज रहे हैं। इनकी मूछें किसी रिकार्ड बुक में भले ही शामिल न हों लेकिन ये कई पुरस्कार जीते चुके हैं।
राम सिंह एक जागरण पार्टी में मूछों का प्रदर्शन करने के लिए बृहस्पतिवार को शहर में थे। इस दौरान बातचीत में उन्होंने बताया कि वह किसान हैं। खेती बाड़ी ही उनका पेशा है लेकिन उनकी पहचान मूछों से है। हारमोनियम, ढोलक, बांसुरी बजाने में माहिर राम सिंह घुड़सवारी का भी शौक भी रखते हैं। उनका दावा है कि घोड़े उनके एक इशारे पर रफ्तार पकड़ते हैं। बकौल राम सिंह जब वह 20 साल के थे तभी मूछें बढ़ाने का ख्याल आया। सोचा कि कुछ अलग किया जाए। यही कारण था कि अब तक मूछों पर कैंची नहीं लगाई। नतीजा यह हुआ कि न केवल क्षेत्र बल्कि प्रदेश भर में उनकी मूछों की चर्चा होने लगी। मुलायम सिंह, अखिलेश सिंह, राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ के हाथों पुरस्कार पा चुके राम सिंह का कहना है कि अच्छा लगता है जब आपके शौक की कद्र होती है। नाम मिलता है।
प्रयास किए मगर पहचान नहीं मिली
हल्द्वानी। इतनी लंबी मूछों को रिकॉर्ड बुक में अब तक जगह न मिलने के सवाल पर राम सिंह का कहना है कि प्रयास तो किए मगर सफलता नहीं मिली। लेकिन इसी से संतुष्ट हैं कि लोग उन्हें जानते हैं, बुलाते हैं। इस उम्र में भी मूछों को सहेजने में राम सिंह पूरा समय देते हैं। रीठा और मुलतानी मिट्टी से इनकी चमक बरकरार रखते हैं। उनका कहना है जैसे मेरे खेत की फसल लहलहाती है वैसे ही मेरी मूछें बढ़ती हैं। मूछों को काले रंग से रंगता हूं ताकि बुढ़ापा न दिखे।
विज्ञापन
विज्ञापन
राम सिंह एक जागरण पार्टी में मूछों का प्रदर्शन करने के लिए बृहस्पतिवार को शहर में थे। इस दौरान बातचीत में उन्होंने बताया कि वह किसान हैं। खेती बाड़ी ही उनका पेशा है लेकिन उनकी पहचान मूछों से है। हारमोनियम, ढोलक, बांसुरी बजाने में माहिर राम सिंह घुड़सवारी का भी शौक भी रखते हैं। उनका दावा है कि घोड़े उनके एक इशारे पर रफ्तार पकड़ते हैं। बकौल राम सिंह जब वह 20 साल के थे तभी मूछें बढ़ाने का ख्याल आया। सोचा कि कुछ अलग किया जाए। यही कारण था कि अब तक मूछों पर कैंची नहीं लगाई। नतीजा यह हुआ कि न केवल क्षेत्र बल्कि प्रदेश भर में उनकी मूछों की चर्चा होने लगी। मुलायम सिंह, अखिलेश सिंह, राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ के हाथों पुरस्कार पा चुके राम सिंह का कहना है कि अच्छा लगता है जब आपके शौक की कद्र होती है। नाम मिलता है।
विज्ञापन
प्रयास किए मगर पहचान नहीं मिली
हल्द्वानी। इतनी लंबी मूछों को रिकॉर्ड बुक में अब तक जगह न मिलने के सवाल पर राम सिंह का कहना है कि प्रयास तो किए मगर सफलता नहीं मिली। लेकिन इसी से संतुष्ट हैं कि लोग उन्हें जानते हैं, बुलाते हैं। इस उम्र में भी मूछों को सहेजने में राम सिंह पूरा समय देते हैं। रीठा और मुलतानी मिट्टी से इनकी चमक बरकरार रखते हैं। उनका कहना है जैसे मेरे खेत की फसल लहलहाती है वैसे ही मेरी मूछें बढ़ती हैं। मूछों को काले रंग से रंगता हूं ताकि बुढ़ापा न दिखे।
विज्ञापन