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‘नहीं बन पाया स्व. त्रिपाठी के सपनों का उत्तराखंड’
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न नेता स्व. बिपिन त्रिपाठी की जयंती पर मौजूद उक्रांद कार्यकर्ता। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : RANIKHET
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। प्रखर समाजवादी, उक्रांद शिल्पी, पूर्व विधायक स्व. बिपिन त्रिपाठी की 77वीं जयंती पर हुए समारोह में उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। इस दौरान हुई विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने स्व. बिपिन त्रिपाठी के कार्यों को याद करते हुए कहा कि राज्य गठन के 20 सालों बाद भी उनके सपनों का उत्तराखंड नहीं बन पाया।
पार्टी कार्यालय में आयोजित समारोह में पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि राज्य बनने के बाद बारी बारी से सत्ता में आई भाजपा और कांग्रेस की सरकारों ने राज्य को निरंतर गर्त में धकेलने का काम किया।
पलायन, रोजगार को लेकर आज तक ठोस नीति नहीं बनी। विचार गोष्ठी में राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने, बदहाल चिकित्सा व्यवस्था, पलायन रोकने के लिए ठोस नीति बनाने सहित तमाम समस्याओं को लेकर संघर्ष करने का संकल्प जताया गया।
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यहां लक्ष्मी चंद्र त्रिपाठी, हरीश कांडपाल, ब्लॉक अध्यक्ष लाल सिंह बिष्ट, आनंद सिंह बिष्ट, कैलाश फुलारा, प्रधान संगठन अध्यक्ष नरेंद्र अधिकारी, शिब सिंह, खीम सिंह, नीरु आर्या, मनोहर सांगेला, बलवंत नेगी आदि थे। लक्ष्मण सिंह किरौला ने संचालन किया।
कई पूर्व सैनिकों और पेंशनरों ने थामा उक्रांद का दामन
द्वाराहाट। जयंती कार्यक्रम में शिक्षा विभाग, उद्यान, राजस्व आदि विभागों से सेवानिवृत्त और कई पूर्व सैनिकों ने उक्रांद की सदस्यता ली। जिसमें पूर्व प्रधानाचार्य गिरधर सिंह मेहरा, अतुल साह, शेखर कांडपाल, देवकी नंदन कांडपाल, प्रकाश चंद्र जोशी, राजेंद्र उपाध्याय, बिशन सिंह कार्की, युगल किशोर तिवारी, प्रताप सिंह मेहरा आदि प्रमुख हैं।
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पार्टी कार्यालय में आयोजित समारोह में पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने कहा कि राज्य बनने के बाद बारी बारी से सत्ता में आई भाजपा और कांग्रेस की सरकारों ने राज्य को निरंतर गर्त में धकेलने का काम किया।
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पलायन, रोजगार को लेकर आज तक ठोस नीति नहीं बनी। विचार गोष्ठी में राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने, बदहाल चिकित्सा व्यवस्था, पलायन रोकने के लिए ठोस नीति बनाने सहित तमाम समस्याओं को लेकर संघर्ष करने का संकल्प जताया गया।
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यहां लक्ष्मी चंद्र त्रिपाठी, हरीश कांडपाल, ब्लॉक अध्यक्ष लाल सिंह बिष्ट, आनंद सिंह बिष्ट, कैलाश फुलारा, प्रधान संगठन अध्यक्ष नरेंद्र अधिकारी, शिब सिंह, खीम सिंह, नीरु आर्या, मनोहर सांगेला, बलवंत नेगी आदि थे। लक्ष्मण सिंह किरौला ने संचालन किया।
कई पूर्व सैनिकों और पेंशनरों ने थामा उक्रांद का दामन
द्वाराहाट। जयंती कार्यक्रम में शिक्षा विभाग, उद्यान, राजस्व आदि विभागों से सेवानिवृत्त और कई पूर्व सैनिकों ने उक्रांद की सदस्यता ली। जिसमें पूर्व प्रधानाचार्य गिरधर सिंह मेहरा, अतुल साह, शेखर कांडपाल, देवकी नंदन कांडपाल, प्रकाश चंद्र जोशी, राजेंद्र उपाध्याय, बिशन सिंह कार्की, युगल किशोर तिवारी, प्रताप सिंह मेहरा आदि प्रमुख हैं।