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द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय जाबांजों ने जापान को खदेड़ा था
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हल्द्वानी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना के साथ 8 कुमाऊं रेजिमेंट ने कांगव स्थान पर जापान को पराजित किया था। जापानी सैनिक अपने साथियों के शवों को छोड़कर भाग गए थे। आठ कुमाऊं रेजिमेंट के गौरव सेनानी उसी विजय को हर साल मनाते हैं।
आरटीओ रोड स्थित एक बैंक्वेट हाल में आयोजित कार्यक्रम में आठ कुमाऊं के गौरव सेनानियों ने कांगव दिवस को युद्ध सम्मान दिवस के रूप में मनाया। वक्ताओं ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना युद्ध लड़ रही थी। उस समय ब्रिटिश भारतीय सेना की कमान पूरी तरह अंग्रेज अधिकारियों के हाथों में थी। अरकान की पुरानी राजधानी के पास मेबोन से करीब 70 किमी दूर एक छोटा सा कांगव गांव था। यहां जापानी सेना की एक पोस्ट थी। अंग्रेजों ने 25 इंफेट्री डिवीजन के अंदर एक ब्रिगेड खड़ी की, जिसमें सभी भारतीय सैनिक थे।
कमान में बलूच रेजिमेंट की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल एलपी सेन, पंजाब रेजिमेंट की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल एस पी थोराट और 8/19 हैदराबाद रेजिमेंट की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल के एस थिमैय्या को सौंपी गई। कांगव पर 8/19 हैदराबाद रेजिमेंट ने 23 जनवरी 1945 को फतह हासिल की। 6/7 फरवरी 1945 को जापानी सेना ने कांगव पर जवाबी अटैक किया लेकिन हैदराबाद रेजिमेेंट ने जापानी सेना के छक्के छुड़ा दिए। जापानी सेना अपने 25 मारे गए सैनिकों को भी छोड़ कर भाग गई। युद्ध में हैदराबाद रेजिमेंट के तीन जवान वीरगति को प्राप्त हुए। इस युद्ध में हैदराबाद रेजिमेंट को वीरता के पदक मिले।
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युद्ध के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल केएस थिमैय्या, डीएसओ को ब्रिगेडयर के पद पर पदोन्नत किया गया। वे पहले भारतीय ऑफिसर थे, जिन्होंने ब्रिगेड को कमान किया। 7 फरवरी, 8/19 हैदराबाद (अब 8 कुमाऊं) को युद्ध सम्मान दिवस से अलंकृत किया गया।
इस मौके पर मेजर बीएस रौतेला, कैप्टन ललिता प्रसाद पंत, केशर सिंह, बहादुर सिंह, जेडी पंत, कविंदर सिंह, सूबेदार मेजर धन सिंह, सूबेदार मेजर नरेश दुर्गापाल, सूबेदार मेजर राधे नाथ, सूबेदार मेजर जगदीश चंद्र जोशी सहित 8 कुमाऊं रेजिमेंट के पूर्व सैनिक मौजूद रहे।
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आरटीओ रोड स्थित एक बैंक्वेट हाल में आयोजित कार्यक्रम में आठ कुमाऊं के गौरव सेनानियों ने कांगव दिवस को युद्ध सम्मान दिवस के रूप में मनाया। वक्ताओं ने कहा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश भारतीय सेना युद्ध लड़ रही थी। उस समय ब्रिटिश भारतीय सेना की कमान पूरी तरह अंग्रेज अधिकारियों के हाथों में थी। अरकान की पुरानी राजधानी के पास मेबोन से करीब 70 किमी दूर एक छोटा सा कांगव गांव था। यहां जापानी सेना की एक पोस्ट थी। अंग्रेजों ने 25 इंफेट्री डिवीजन के अंदर एक ब्रिगेड खड़ी की, जिसमें सभी भारतीय सैनिक थे।
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कमान में बलूच रेजिमेंट की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल एलपी सेन, पंजाब रेजिमेंट की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल एस पी थोराट और 8/19 हैदराबाद रेजिमेंट की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल के एस थिमैय्या को सौंपी गई। कांगव पर 8/19 हैदराबाद रेजिमेंट ने 23 जनवरी 1945 को फतह हासिल की। 6/7 फरवरी 1945 को जापानी सेना ने कांगव पर जवाबी अटैक किया लेकिन हैदराबाद रेजिमेेंट ने जापानी सेना के छक्के छुड़ा दिए। जापानी सेना अपने 25 मारे गए सैनिकों को भी छोड़ कर भाग गई। युद्ध में हैदराबाद रेजिमेंट के तीन जवान वीरगति को प्राप्त हुए। इस युद्ध में हैदराबाद रेजिमेंट को वीरता के पदक मिले।
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युद्ध के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल केएस थिमैय्या, डीएसओ को ब्रिगेडयर के पद पर पदोन्नत किया गया। वे पहले भारतीय ऑफिसर थे, जिन्होंने ब्रिगेड को कमान किया। 7 फरवरी, 8/19 हैदराबाद (अब 8 कुमाऊं) को युद्ध सम्मान दिवस से अलंकृत किया गया।
इस मौके पर मेजर बीएस रौतेला, कैप्टन ललिता प्रसाद पंत, केशर सिंह, बहादुर सिंह, जेडी पंत, कविंदर सिंह, सूबेदार मेजर धन सिंह, सूबेदार मेजर नरेश दुर्गापाल, सूबेदार मेजर राधे नाथ, सूबेदार मेजर जगदीश चंद्र जोशी सहित 8 कुमाऊं रेजिमेंट के पूर्व सैनिक मौजूद रहे।