{"_id":"62c87edfc1c6ac5e593c5aa8","slug":"less-normal-didivary-in-pithauragarh-haldwani-news-hld4684468171","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला अस्पताल पिथौरागढ़ में हर चौथा बच्चा पैदा हो रहा है सिजेरियन प्रसव से","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला अस्पताल पिथौरागढ़ में हर चौथा बच्चा पैदा हो रहा है सिजेरियन प्रसव से
विज्ञापन
हरगोविंद पंत जिला महिला अस्पताल पिथौरागढ़। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : PITHORAGARH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़। राज्य के अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव की दर लगातार बढ़ती जा रही है। लगातार बढ़ रहे सिजेरियन प्रसव नवजात और मां को खतरे में डाल सकता है। इस मामले में महिला अस्पताल पिथौरागढ़ राज्य में सबसे आगे है। यहां हर चौथा बच्चा ऑपरेशन से पैदा हो रहा है। सिजेरियन प्रसव की दर वर्ष 2016-17 से लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में महिला अस्पताल में सिजेरियन प्रसव की दर 25.03 प्रतिशत है। वर्ष 2016-17 से वर्ष 2020-21 तक राज्य के सभी जिला और महिला अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव का औसत 13 प्रतिशत के आसपास रहा है। इस बात का खुलासा उत्तराखंड रिसर्च ग्रुप की रिपोर्ट में हुआ है।
पिथौरागढ़ के बाद सर्वाधिक सिजेरियन प्रसव की दर राजकीय कोरोनेशन चिकित्सालय देहरादून 24 प्रतिशत, अल्मोड़ा में 18.16 प्रतिशत, जिला महिला चिकित्सालय हरिद्वार में 16.28 प्रतिशत, महिला चिकित्सालय नैनीताल में 17.88 प्रतिशत रही है। सिजेरियन प्रसव का औसत 15 प्रतिशत से अधिक मानक स्थिति से ऊपर रहा है। चंपावत, चमोली अस्पताल में यह दर दो प्रतिशत रही है। इसका खुलासा उत्तराखंड रिसर्च ग्रुप की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट और मानकों के अनुसार किसी भी चिकित्सालय में बहुत अधिक सिजेरियन होना चिंताजनक है।
पांच सालों में सिजेरियन प्रसव की दर 25.03 प्रतिशत
महिला अस्पताल पिथौरागढ़ में वर्ष 2016-17 में 2952 प्रसव हुए जिनमें 549 सिजेरियन हुए। सिजेरियन प्रसव की दर 18.60 प्रतिशत रही। वर्ष 2017-18 में 3008 प्रसव हुए। इनमें 822 प्रसव ऑपरेशन से हुए, सिजेरियन की दर 27.33 प्रतिशत रही। वर्ष 2018-19 में 3161 प्रसव हुए जिनमें 920 सिजेरियन हुए। सिजेरियन की दर 29.10 रही। वर्ष 2019-20 में 2604 प्रसव हुए जिनमें 611 प्रसव सिजेरियन से हुए। सिजेरियन प्रसव दर 23.46 प्रतिशत रही। वर्ष 2020-21 में हुए 2604 प्रसवों में से 611 सिजेरियन से हुए। सिजेरियन की दर 23.46 प्रतिशत रही। पांच सालों में हुए कुल 14720 प्रसव में से 3684 सिजेरियन प्रसव हुए। पांच सालों में सिजेरियन प्रसव की दर 25.03 प्रतिशत रही।
विज्ञापन
ज्यादा सिजेरियन प्रसव का कारण महिला की उचित जांच न होना
पिथौरागढ़। शोध पत्रों के अनुसार सिजेरियन प्रसव की दर अधिक होने का मुख्य कारण गर्भावस्था के दौरान महिला और गर्भ में शिशु की ठीक से जांच न होना है। इस कारण सामान्य प्रसव के मामलों में जोखिम बढ़ना होता है। जोखिम को कम करने के लिए सिजेरियन प्रसव कराए जा रहे हैं। संवाद
सिजेरियन प्रसव दर कम होना चिकित्सक और उपकरणों की कमी दर्शाता है
पिथौरागढ़। जिन अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव कम हो रहे हैं, वहां विशेषज्ञ चिकित्सक, चिकित्सकीय स्टाफ या उपकरणों की कमी है। जिला चिकित्सालय चंपावत और चमोली में गायनोकोलॉजिस्ट के दो पद स्वीकृत हैं। दो के दो पद खाली हैं। यहां सिजेरियन प्रसव दर कम होने का एक कारण गायनोकोलॉजिस्ट की कमी होना है। संवाद
सिर्फ आपात स्थित में ही प्रसव पीड़िताओं के सिजेरियन प्रसव कराए जाते हैं। अधिकतर प्रसव सामान्य कराने के पूरे प्रयास किए जाते हैं। गर्भवती की समय से जांच न होने के कारण सिजेरियन प्रसव की दर बढ़ रही है।
- डॉ. जेएस नबियाल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़
विज्ञापन
पिथौरागढ़ के बाद सर्वाधिक सिजेरियन प्रसव की दर राजकीय कोरोनेशन चिकित्सालय देहरादून 24 प्रतिशत, अल्मोड़ा में 18.16 प्रतिशत, जिला महिला चिकित्सालय हरिद्वार में 16.28 प्रतिशत, महिला चिकित्सालय नैनीताल में 17.88 प्रतिशत रही है। सिजेरियन प्रसव का औसत 15 प्रतिशत से अधिक मानक स्थिति से ऊपर रहा है। चंपावत, चमोली अस्पताल में यह दर दो प्रतिशत रही है। इसका खुलासा उत्तराखंड रिसर्च ग्रुप की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट और मानकों के अनुसार किसी भी चिकित्सालय में बहुत अधिक सिजेरियन होना चिंताजनक है।
विज्ञापन
पांच सालों में सिजेरियन प्रसव की दर 25.03 प्रतिशत
महिला अस्पताल पिथौरागढ़ में वर्ष 2016-17 में 2952 प्रसव हुए जिनमें 549 सिजेरियन हुए। सिजेरियन प्रसव की दर 18.60 प्रतिशत रही। वर्ष 2017-18 में 3008 प्रसव हुए। इनमें 822 प्रसव ऑपरेशन से हुए, सिजेरियन की दर 27.33 प्रतिशत रही। वर्ष 2018-19 में 3161 प्रसव हुए जिनमें 920 सिजेरियन हुए। सिजेरियन की दर 29.10 रही। वर्ष 2019-20 में 2604 प्रसव हुए जिनमें 611 प्रसव सिजेरियन से हुए। सिजेरियन प्रसव दर 23.46 प्रतिशत रही। वर्ष 2020-21 में हुए 2604 प्रसवों में से 611 सिजेरियन से हुए। सिजेरियन की दर 23.46 प्रतिशत रही। पांच सालों में हुए कुल 14720 प्रसव में से 3684 सिजेरियन प्रसव हुए। पांच सालों में सिजेरियन प्रसव की दर 25.03 प्रतिशत रही।
विज्ञापन
ज्यादा सिजेरियन प्रसव का कारण महिला की उचित जांच न होना
पिथौरागढ़। शोध पत्रों के अनुसार सिजेरियन प्रसव की दर अधिक होने का मुख्य कारण गर्भावस्था के दौरान महिला और गर्भ में शिशु की ठीक से जांच न होना है। इस कारण सामान्य प्रसव के मामलों में जोखिम बढ़ना होता है। जोखिम को कम करने के लिए सिजेरियन प्रसव कराए जा रहे हैं। संवाद
सिजेरियन प्रसव दर कम होना चिकित्सक और उपकरणों की कमी दर्शाता है
पिथौरागढ़। जिन अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव कम हो रहे हैं, वहां विशेषज्ञ चिकित्सक, चिकित्सकीय स्टाफ या उपकरणों की कमी है। जिला चिकित्सालय चंपावत और चमोली में गायनोकोलॉजिस्ट के दो पद स्वीकृत हैं। दो के दो पद खाली हैं। यहां सिजेरियन प्रसव दर कम होने का एक कारण गायनोकोलॉजिस्ट की कमी होना है। संवाद
सिर्फ आपात स्थित में ही प्रसव पीड़िताओं के सिजेरियन प्रसव कराए जाते हैं। अधिकतर प्रसव सामान्य कराने के पूरे प्रयास किए जाते हैं। गर्भवती की समय से जांच न होने के कारण सिजेरियन प्रसव की दर बढ़ रही है।
- डॉ. जेएस नबियाल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़