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Nainital News: तादाद घटी फिर भी कम नहीं हुए तेंदुए के हमले
Sun, 10 Mar 2024 03:31 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sun, 10 Mar 2024 03:31 AM IST
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हल्द्वानी।
प्रदेश में तेंदुओं की संख्या घट रही है, लेकिन मानव वन्यजीव संघर्ष में कोई कमी नहीं आई है। बीते तीन साल में प्रदेश में तेंदुओं के हमले में 63 लोगों की मौत हो गई, जबकि 295 लोग जख्मी हो गए। पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की भारत में तेंदुओं की स्थिति-2022 रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तराखंड में वन्यजीवों के हमलों में इंसानी जान जाने या घायल होने के जो मामले होते हैं, उनमें तीस प्रतिशत घटनाएं तेंदुओं से जुड़ी होती हैं।
मंत्रालय ने तेंदुओं की संख्या के आकलन को लेकर जो रिपोर्ट जारी की थी उसमें राज्य में 187 तेंदुए कम होने का उल्लेख था। राज्य के वन विभाग के अनुसार, घटती संख्या के बाद भी राज्य में 2829 तेंदुए हैं। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष में सांप काटने से सर्वाधिक मौत होती हैं। वर्ष 2021 से 2023 तक तीन वर्षों में 369 लोगों की मौत हुई। इसके बाद तेंदुए हैं, जो इंसानों की जिंदगी के लिए खतरा बने हुए हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन्हीं तीन वर्षाें में तेंदुओं के हमलों में 63 लोगों की मौत हुई है, जबकि 295 लोग घायल हुए।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए हाट स्पॉट चिह्नित कर वहां रेस्क्यू के संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो रहा है। अभी जो वनकर्मी हैं, वे सामान्य वानिकी से जुड़े कार्य करते हैं और जरूरत पड़ने पर रेस्क्यू ऑपरेशन में भी शामिल हो जाते हैं। कई बार रेस्क्यू ऑपरेशन लंबी अवधि तक चलते हैं, इससे अन्य कार्य प्रभावित होते हैं। ऐसे में प्रयास है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षित और संबंधित कार्य के लिए दल को रखा जाए। अन्य प्रयास भी किए जा रहे हैं।
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-प्रसन्न पात्रो, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं
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प्रदेश में तेंदुओं की संख्या घट रही है, लेकिन मानव वन्यजीव संघर्ष में कोई कमी नहीं आई है। बीते तीन साल में प्रदेश में तेंदुओं के हमले में 63 लोगों की मौत हो गई, जबकि 295 लोग जख्मी हो गए। पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की भारत में तेंदुओं की स्थिति-2022 रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तराखंड में वन्यजीवों के हमलों में इंसानी जान जाने या घायल होने के जो मामले होते हैं, उनमें तीस प्रतिशत घटनाएं तेंदुओं से जुड़ी होती हैं।
मंत्रालय ने तेंदुओं की संख्या के आकलन को लेकर जो रिपोर्ट जारी की थी उसमें राज्य में 187 तेंदुए कम होने का उल्लेख था। राज्य के वन विभाग के अनुसार, घटती संख्या के बाद भी राज्य में 2829 तेंदुए हैं। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष में सांप काटने से सर्वाधिक मौत होती हैं। वर्ष 2021 से 2023 तक तीन वर्षों में 369 लोगों की मौत हुई। इसके बाद तेंदुए हैं, जो इंसानों की जिंदगी के लिए खतरा बने हुए हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन्हीं तीन वर्षाें में तेंदुओं के हमलों में 63 लोगों की मौत हुई है, जबकि 295 लोग घायल हुए।
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मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए हाट स्पॉट चिह्नित कर वहां रेस्क्यू के संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो रहा है। अभी जो वनकर्मी हैं, वे सामान्य वानिकी से जुड़े कार्य करते हैं और जरूरत पड़ने पर रेस्क्यू ऑपरेशन में भी शामिल हो जाते हैं। कई बार रेस्क्यू ऑपरेशन लंबी अवधि तक चलते हैं, इससे अन्य कार्य प्रभावित होते हैं। ऐसे में प्रयास है कि रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षित और संबंधित कार्य के लिए दल को रखा जाए। अन्य प्रयास भी किए जा रहे हैं।
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-प्रसन्न पात्रो, मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं