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खेतों को नुकसान पहुंचा रही लैंटाना को बनाया रोजगार का जरिया
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हल्द्वानी। लैंटाना जिसे कुमाऊं में कुरी घास के नाम से जाना जाता है, यह घास उपजाऊ जमीन को नुकसान पहुंचाती है। यह घास अपने आसपास किसी भी चीज को पनपने नहीं देती है। इस घास को कोटाबाग की महिला समूहों ने रोजगार से जोड़ दिया है। लैंटाना घास की जड़ों को उखाड़ने के साथ ही महिलाओं ने इसकी आकर्षक टोकरियां बनानी शुरू कर दीं। अब इसके डंठलों और जड़ों में नक्काशी कर इनसे आकर्षक रंगबिरंगी टोकरियां बनाकर बाजार में बेची जा रही हैं। ये टोकरियां बाजार में 300 से 700 रुपये प्रति टोकरी के हिसाब से बिक रही हैं।
नाबार्ड के सहयोग से काश्तकार विकास समिति कोटाबाग के पांडे गांव के समूह की महिलाएं लैंटाना की झाड़ियों से सुंदर कलात्मक टोकरियां, फाइल ट्रे, डस्टबिन, छोटे-छोटे स्टैंड बना रही हैं। इन्हें आकर्षक रंगों में रंगकर बाजार में बेचा जा रहा है। काश्तकार विकास समिति की अध्यक्ष माया नेगी ने बताया कि समिति को नाबार्ड की ओर से सहयोग किया जा रहा है। महिलाएं लैंटाना समेत तमाम बेकार पड़ी चीजों से अच्छी चीजों का निर्माण कर रही हैं। लैंटाना की झाड़ियों से विभिन्न तरह की टोकरियां बनाकर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
महिलाओं को एक टोकरी तैयार करने में करीब तीन घंटे लग जाते हैं। लोगों के आर्डर आ रहे हैं और इनकी मांग बढ़ रही है। काश्तकार विकास समिति महिलाओं को प्रोत्साहित और संगठित कर इस व्यवसाय को बड़े स्तर तक ले जाना चाहती हैं।
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- बबीता पंत, महिला समूह अध्यक्ष पांडेगांव, कोटाबाग।
उपजाऊ जमीन के लिए जहर है लैंटाना
25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में यह पौधा बहुत तेजी के साथ फलता-फूलता है। इसकी पत्तियों को मवेशी भी नहीं खाते हैं। बताते हैं कि अंग्रेज अपने बंगलों और कोठियों को सजाने के लिए इसे विदेश से लेकर आए थे। इसके पत्ते कांटेदार होते हैं। रिसर्च में पता चला है कि लैंटाना की पत्तियों से जहर निकलता है जो जमीन को बंजर कर रहा है।
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नाबार्ड के सहयोग से काश्तकार विकास समिति कोटाबाग के पांडे गांव के समूह की महिलाएं लैंटाना की झाड़ियों से सुंदर कलात्मक टोकरियां, फाइल ट्रे, डस्टबिन, छोटे-छोटे स्टैंड बना रही हैं। इन्हें आकर्षक रंगों में रंगकर बाजार में बेचा जा रहा है। काश्तकार विकास समिति की अध्यक्ष माया नेगी ने बताया कि समिति को नाबार्ड की ओर से सहयोग किया जा रहा है। महिलाएं लैंटाना समेत तमाम बेकार पड़ी चीजों से अच्छी चीजों का निर्माण कर रही हैं। लैंटाना की झाड़ियों से विभिन्न तरह की टोकरियां बनाकर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
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महिलाओं को एक टोकरी तैयार करने में करीब तीन घंटे लग जाते हैं। लोगों के आर्डर आ रहे हैं और इनकी मांग बढ़ रही है। काश्तकार विकास समिति महिलाओं को प्रोत्साहित और संगठित कर इस व्यवसाय को बड़े स्तर तक ले जाना चाहती हैं।
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- बबीता पंत, महिला समूह अध्यक्ष पांडेगांव, कोटाबाग।
उपजाऊ जमीन के लिए जहर है लैंटाना
25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में यह पौधा बहुत तेजी के साथ फलता-फूलता है। इसकी पत्तियों को मवेशी भी नहीं खाते हैं। बताते हैं कि अंग्रेज अपने बंगलों और कोठियों को सजाने के लिए इसे विदेश से लेकर आए थे। इसके पत्ते कांटेदार होते हैं। रिसर्च में पता चला है कि लैंटाना की पत्तियों से जहर निकलता है जो जमीन को बंजर कर रहा है।