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कालाजार का मरीज मिलने से खलबली
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Mon, 11 Apr 2016 12:14 AM IST
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कई दिनों से बुखार से ग्रस्त भीमताल निवासी एक युवक को कालाजार से ग्रस्त होने पर एसटीएच रेफर कर दिया गया। कालाजार बीमारी बिहार में ज्यादा पाई जाती है। नैनीताल जिले में कालाजार का रोगी मिलने से खलबली मच गई है।
भीमताल ब्लॉक के ग्राम बगड़ निवासी हेम चंद्र (20 वर्षीय) को पिछले 30-35 दिन से तेज बुखार, कमजोरी, भूख न लगने की शिकायत थी। चंद्र ने पहले बीडी पांडे अस्पताल नैनीताल में इलाज कराया। सात अप्रैल को मुखानी स्थित तिवारी नर्सिंग होम में भर्ती हुआ। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. मोहन तिवारी ने बताया कि हेम का बुखार कम नहीं हो रहा था।
आठ अप्रैल को ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजा गया और नौ अप्रैल को रिपोर्ट में हेम को कालाजार की पुष्टि हुई। हेम को रविवार दोपहर एसटीएच रेफर किया गया है। एसटीएच के एमएस डॉ. एके पांडे ने बताया कि वार्ड सी मेडिसिन में रखा गया है। डॉ. पांडे ने बताया कि हेम को अलग रखा गया है। उन्होंने बताया कि पहले भी तीन केेस रिपोर्ट हो चुके हैं। मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. अरुण जोशी मरीज को देख रहे हैं और कालाजार की दवा देनी शुरू कर दी गई है।
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क्या है कालाजार
मनुष्य के शरीर में पाई जाने वाली स्पलीन के आकार में अत्यधिक बढ़ोतरी बुखार के साथ होना कालाजार का लक्षण है। ये सेंट फ्लाई मक्खी के काटने से फैलता है।
बगड़ में बर्ड वॉचर बाहर से आते हैं और स्थानीय लोग रिजॉर्ट में काम भी करते हैं। यह बीमारी बिहार में ज्यादा होती है। सोमवार को क्षेत्र में चिकित्सीय टीम जांच करेगी कि किसी ओर को कालाजार तो नहीं है।
-दीपक रावत, डीएम, नैनीताल
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भीमताल ब्लॉक के ग्राम बगड़ निवासी हेम चंद्र (20 वर्षीय) को पिछले 30-35 दिन से तेज बुखार, कमजोरी, भूख न लगने की शिकायत थी। चंद्र ने पहले बीडी पांडे अस्पताल नैनीताल में इलाज कराया। सात अप्रैल को मुखानी स्थित तिवारी नर्सिंग होम में भर्ती हुआ। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. मोहन तिवारी ने बताया कि हेम का बुखार कम नहीं हो रहा था।
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आठ अप्रैल को ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजा गया और नौ अप्रैल को रिपोर्ट में हेम को कालाजार की पुष्टि हुई। हेम को रविवार दोपहर एसटीएच रेफर किया गया है। एसटीएच के एमएस डॉ. एके पांडे ने बताया कि वार्ड सी मेडिसिन में रखा गया है। डॉ. पांडे ने बताया कि हेम को अलग रखा गया है। उन्होंने बताया कि पहले भी तीन केेस रिपोर्ट हो चुके हैं। मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. अरुण जोशी मरीज को देख रहे हैं और कालाजार की दवा देनी शुरू कर दी गई है।
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क्या है कालाजार
मनुष्य के शरीर में पाई जाने वाली स्पलीन के आकार में अत्यधिक बढ़ोतरी बुखार के साथ होना कालाजार का लक्षण है। ये सेंट फ्लाई मक्खी के काटने से फैलता है।
बगड़ में बर्ड वॉचर बाहर से आते हैं और स्थानीय लोग रिजॉर्ट में काम भी करते हैं। यह बीमारी बिहार में ज्यादा होती है। सोमवार को क्षेत्र में चिकित्सीय टीम जांच करेगी कि किसी ओर को कालाजार तो नहीं है।
-दीपक रावत, डीएम, नैनीताल