Jim Corbett: 33 आदमखोर के शिकार के बाद बदला कॉर्बेट का हृदय, फिर 221 एकड़ जमीन खरीदकर 40 परिवारों को बसाया
प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिकारी जेम्स (जिम) कॉर्बेट की जयंती पर सब उनको याद कर रहे हैं। जिम कॉर्बेट ने कालाढूंगी में 221 एकड़ जमीन खरीदकर 40 परिवारों को बसाया था।
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प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिकारी जेम्स (जिम) कॉर्बेट की जयंती पर सब उनको याद कर रहे हैं। जिम कॉर्बेट ने कालाढूंगी में 221 एकड़ जमीन खरीदकर 40 परिवारों को बसाया था। जिम कॉर्बेट की ख्याति इस कदर रही कि वर्तमान में रामनगर से लेकर कालाढूंगी तक कई लोग उनके नाम से रोजगार चला रहे हैं।
25 जुलाई 1875 को नैनीताल में जन्मे जेम्स कॉर्बेट क्षेत्र में प्रसिद्ध शिकारी के रूप में जाने जाते थे जो बाद में संरक्षणवादी बन गए। भारत में आज भी कई राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य उनके नाम से जाने जाते हैं। 33 आदमखोर तेंदुओं और बाघों का शिकार करने के बाद कॉर्बेट का हृदय परिवर्तित हो गया और उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के लिए कार्य करना शुरू किया। जिम कॉर्बेट ने वर्ष 1915 में कालाढूंगी के छोटी हल्द्वानी में एक स्थानीय व्यक्ति से जमीन खरीदकर मकान बनाया जहां पर वह सर्दियों में रहते थे जबकि गर्मियों में नैनीताल चले जाया करते थे लेकिन वर्ष 1922 से कालाढूंगी में ही आकर रहने लगे। इसके बाद कालाढूंगी के छोटी हल्द्वानी में उन्होंने 221 एकड़ जमीन खरीदकर 40 परिवारों को यहां पर बसाया।
कॉर्बेट ने अपने सहयोगियों के लिए भी घर बनवाए और जमीन को जंगली जानवरों से बचाने के लिए नौ किमी लंबी और छह फीट ऊंची दीवार का निर्माण भी कराया जो आज भी छोटी हल्द्वानी में मौजूद है। कॉर्बेट शाम के समय चौपाल लगाकर लोगों की समस्याएं सुना करते थे। उनके द्वारा बनाई गई धरोहर आज भी कालाढूंगी में मौजूद है।
कॉर्बेट के नाम से चलता है रोजगार
विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क देश-विदेश में बाघों के घनत्व के साथ ही अन्य वन्यजीवों के लिए चर्चित है। एडवर्ड जेम्स कॉर्बेट को दुनिया से गए आज 68 साल हो गए हैं। उनकी हमदर्दी और ख्याति से प्रभावित लोग आज भी उन्हें आदर के साथ याद करते हैं। कॉर्बेट साहब की ख्याति का ही असर है कि रामनगर से लेकर कालाढूंगी तक कई लोग उनके नाम का इस्तेमाल कर अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। यही नहीं पर्यटकों की बुकिंग करने वाले लोगों ने अपनी साइटों का नाम भी कॉर्बेट के नाम पर ही रखा हुआ है।
रामनगर व कालाढूंगी में आयोजित हुए कार्यक्रम
धनगढ़ी गेट, जिम कार्बेट संग्रहालय, कालाढूंगी, कार्बेट वन्यजीय प्रशिक्षण केंद्र और कालागढ़ में एडवर्ड जिम कार्बेट की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनकी जयंती मनाई गई। धनगढ़ी गेट पर स्थित शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान स्कूली बच्चों को कार्बेट इन्टरप्रिटेशन सेंटर का शैक्षिक भ्रमण कराने के साथ ही जिम कार्बेट की ओर से लिखी गईं छह पुस्तकों की जानकारी दी गई। राइंका की छात्राओं में ममता भारती, इच्छा आर्या, ज्योति आर्या ने जिम कार्बेट पर आधारित गीत पेश किया।
इधर कालाढूंगी स्थित जिम कार्बेट म्यूजियम में आयोजित कार्यक्रम में विधायक बंशीधर भगत ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। छात्र-छात्राओं को जिम कार्बेट के जीवन पर आधारित शॉर्ट फिल्म कार्बेट लीगेसी दिखाई गई। कार्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र कालागढ़ में हुए कार्यक्रम के दौरान वन दरोगा प्रशिक्षुओं के बीच बाघ संरक्षण तथा आर्थिक विकास में संतुलन क्या हम सतत सह-अस्तित्व प्राप्त कर सकते हैं विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता कराई गई।
प्रतियोगिता में ऋषभ कुमार प्रथम, जितेंद्र सिंह द्वितीय और अभिषेक सजवाण, भुवन चंद्र, महेंद्र सिंह, पंकज सिंह, प्रवीण असवाल, ऋषभ चंद्र रमोला, शूरवीर सिंह चौहान व सुमित राणा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहां कॉर्बेट पार्क के उपनिदेशक दिगांथ नायक, आकाश गंगवार, प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा, पार्क वार्डन अमित कुमार ग्वासीकोटी, एसडीओ किरन शाह, डॉ. शालिनी जोशी, मयंक तिवारी, एजी अंसारी आदि थे।
कालाढूंगी में खुलेगी जंगल सफारी : भगत
कॉर्बेट म्यूजियम में आयोजित कार्यक्रम में विधायक बंशीधर भगत ने कॉर्बेट की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। विधायक ने कहा कि कॉर्बेट विलेज छोटी हल्द्वानी धीरे-धीरे पर्यटन के मानचित्र पर चमक रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही यहां जंगल सफारी भी खुलने जा रही है। इसके लिए ग्रामीणों ने विधायक भगत और प्रदेश प्रवक्ता विकास भगत का आभार जताया। कार्यक्रम में डीएफओ दिगांत नायक, रेंजर ललित चौहान, समिति अध्यक्ष राजकुमार पांडे, भाजपा मंडल अध्यक्ष विक्रम जतवाल, हरीश मेहरा, गोपाल बुधलकोटी आदि थे।
पहाड़ी अंग्रेज : जिम कॉर्बेट पुस्तक का विमोचन
प्रसिद्ध प्रकृतिविद, शिकार कथाओं के लेखक एवं नरभक्षी संहारक एडवर्ड जेम्स कॉर्बेट की 149वीं जयंती पर बृहस्पतिवार को वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक प्रयाग पांडे की ओर से लिखित पुस्तक पहाड़ी अंग्रेज : जिम कॉर्बेट का विमोचन किया गया। पांडे की यह छठी किताब है। इससे पहले उनकी पांच किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।
राज्य अतिथि गृह में हुए कार्यक्रम में डीएसबी पत्रकारिता एवं जनसंपर्क विभाग के विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रो. गिरीश रंजन तिवारी ने कहा कि जिम काॅर्बेट पर अब तक लिखी अधिकांश पुस्तकें अंग्रेजी भाषा में थीं लेकिन यह पुस्तक हिंदी में है। यह किताब कार्बेट में गाइडिंग करने वाले लोगों, पाठकों, पर्यावरण समेत इससे संबंधित विषयों पर शोध करने वालों के लिए बहुपयोगी साबित होगी। विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिम कॉर्बेट के निकटतम सहयोगी रहे स्व. बाबू जगत सिंह नेगी के पौत्र रवींद्र सिंह नेगी थे।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार गणेश पाठक रहे। वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक जगमोहन रौतेला ने पुस्तक के बारे में परिचयात्मक व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार ओपी पांडे, विजय तड़ागी, पूर्व दायित्वधारी डॉ. रमेश पांडे, डॉ. दुर्गा तिवारी, प्रभात ध्यानी, गणेश रावत, मोहन पांडे, भगवान सिंह गंगोला, हंसी वृजवासी, सीपी वृजवासी, जयवर्धन कांडपाल आदि ने विचार रखे। इससे पूर्व जिम कॉर्बेट की प्रतिमा के समक्ष मोमबत्ती जलाकर केक काटा गया। कार्यक्रम में तारा पांडे, गोपाल रावत, मनोज जोशी, केपी उपाध्याय, बीपी बहुगुणा, निरंजन भट्ट, शैलेंद्र नौडियाल, त्रिभुवन फर्त्याल, वीरेंद्र रावत, शिवानंद भट्ट, बर्थवाल, गोविंद पाटनी आदि थे। संचालन डॉ. विपिन चंद्रा ने किया।