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जमरानी : बिना पुनर्वास कैसे होगा अधिग्रहण, लारा एक्ट में धारा आठ की मंजूरी, अब पुनर्वास की कार्यवाही करनी होगी तेज
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हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से भूमि अध्याप्ति एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 (लारा एक्ट 2013) की धारा आठ की मंजूरी के साथ ही डीएम को भले ही भूमि अधिग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन अभी तक जमरानी बांध के डूब क्षेत्रवासियों के पुनर्वास का मामला हल नहीं हो पाया है। बिना पुनर्वास की व्यवस्था के भूमि अधिग्रहण होने में अभी काफी समय लग सकता है। हालांकि, धारा आठ की मंजूरी मिलने से यह तय हो गया है कि जमरानी बांध हर हाल में बनेगा।
बांध परियोजना इकाई के अधिशासी अभियंता भारत भूषण पांडेय ने बताया कि धारा आठ की मंजूरी एसआईए यानी सोशल इंपैक्ट असेसमेंट (सामाजिक समाघात अध्ययन) रिपोर्ट के आधार पर मिली है। एसआईए में पाया गया कि बांध बनाना जनहित में जरूरी है। जमरानी बांध निर्माण से पूर्व अब तक चिह्नित 821 खातेदारों का पुनर्वास किया जाना है। इनके लिए जमीन तलाशी जा रही है। डूब क्षेत्र के तीन गांवों में प्रत्येक खातेदार की वास्तविक जमीन का सर्वे करा लिया गया है। तीन गांवों की सर्वे कोविड की वजह से रुकी हुई है। डूब क्षेत्र के खातेदारों की कुल 49.34 हेक्टेयर जमीन इसमें आ रही है जिसका अधिग्रहण किया जाएगा।
पहले होगी पुनर्वास की व्यवस्था तब होगा अधिग्रहण
ईई भारत भूषण पांडे के मुताबिक केंद्र सरकार ने बांध निर्माण को हरी झंडी देते हुए अपनी प्रतिबद्धता जता दी है लेकिन अभी पुनर्वास किया जाना प्राथमिकता में है। पुनर्वास को लेकर अब काम में तेजी लाई जाएगी। पुनर्वास की व्यवस्था होने के बाद डीएम को रिपोर्ट भेजी जाएगी, उसी के बाद भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू हो पाएगी। पुनर्वास के लिए सितारंगज, खटीमा, पंतनगर आदि स्थानों पर जमीन तलाशी जा रही है। खुरपिया फार्म और प्राग फार्म डूब प्रभावितों की पहली पसंद है। उस जमीन को भी देखा जा रहा है।
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यह है लारा एक्ट
हल्द्वानी। जमरानी बांध कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन परियोजना इकाई के अधिशासी अभियंता भारत भूषण पांडेय ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से 2013 में पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम बनाया गया। लारा यानी लैंड एक्यूजेशन रीहेबिलिटेशन एंड री सेटलमेंट (भूमि अर्जन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम) कहलाता है। इसमें डूब क्षेत्र के विस्थापित होने वाले लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करने के साथ ही उन्हें प्रति खातेदार एक एकड़ तक जमीन उपलब्ध कराने, किसी न किसी रूप में रोजगार देने और उचित मुआवजा देने का प्रावधान है।
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बांध परियोजना इकाई के अधिशासी अभियंता भारत भूषण पांडेय ने बताया कि धारा आठ की मंजूरी एसआईए यानी सोशल इंपैक्ट असेसमेंट (सामाजिक समाघात अध्ययन) रिपोर्ट के आधार पर मिली है। एसआईए में पाया गया कि बांध बनाना जनहित में जरूरी है। जमरानी बांध निर्माण से पूर्व अब तक चिह्नित 821 खातेदारों का पुनर्वास किया जाना है। इनके लिए जमीन तलाशी जा रही है। डूब क्षेत्र के तीन गांवों में प्रत्येक खातेदार की वास्तविक जमीन का सर्वे करा लिया गया है। तीन गांवों की सर्वे कोविड की वजह से रुकी हुई है। डूब क्षेत्र के खातेदारों की कुल 49.34 हेक्टेयर जमीन इसमें आ रही है जिसका अधिग्रहण किया जाएगा।
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पहले होगी पुनर्वास की व्यवस्था तब होगा अधिग्रहण
ईई भारत भूषण पांडे के मुताबिक केंद्र सरकार ने बांध निर्माण को हरी झंडी देते हुए अपनी प्रतिबद्धता जता दी है लेकिन अभी पुनर्वास किया जाना प्राथमिकता में है। पुनर्वास को लेकर अब काम में तेजी लाई जाएगी। पुनर्वास की व्यवस्था होने के बाद डीएम को रिपोर्ट भेजी जाएगी, उसी के बाद भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू हो पाएगी। पुनर्वास के लिए सितारंगज, खटीमा, पंतनगर आदि स्थानों पर जमीन तलाशी जा रही है। खुरपिया फार्म और प्राग फार्म डूब प्रभावितों की पहली पसंद है। उस जमीन को भी देखा जा रहा है।
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यह है लारा एक्ट
हल्द्वानी। जमरानी बांध कार्यक्रम एवं क्रियान्वयन परियोजना इकाई के अधिशासी अभियंता भारत भूषण पांडेय ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से 2013 में पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम बनाया गया। लारा यानी लैंड एक्यूजेशन रीहेबिलिटेशन एंड री सेटलमेंट (भूमि अर्जन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम) कहलाता है। इसमें डूब क्षेत्र के विस्थापित होने वाले लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था करने के साथ ही उन्हें प्रति खातेदार एक एकड़ तक जमीन उपलब्ध कराने, किसी न किसी रूप में रोजगार देने और उचित मुआवजा देने का प्रावधान है।