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ये भी सियासत की मजबूरी है
निशांत खनी
Updated Tue, 27 Sep 2016 01:02 AM IST
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राजनीति
- फोटो : अमर उजाला
यह संस्कृति का प्रेम ही नहीं है बल्कि सियासी मजबूरी भी है कि विधानसभा चुनाव में टिकट की होड़ में दो धुर विरोधी और एक-दूसरे को फूटी आंख न सुहाने वाले भी मंच पर एक साथ नजर आए।
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अवसर था सोमवार को मोतीनगर में तराई भाबर महोत्सव के सांस्कृतिक समारोह के समापन का। सांस्कृतिक मंच में लालकुआं विधानसभा से भाजपा के दोनों प्रबल दावेदारों ने जनता का अभिवादन किया।
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तराई भाबर महोत्सव का सोमवार को समापन हो गया।
तीन दिवसीय महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री हरीश रावत और श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने किया था। महोत्सव फताबंगर ग्राम पंचायत की तरफ से किया गया। महोत्सव के तीनों दिन जबरदस्त भीड़ उमड़ी। उद्घाटन में कांग्रेसी तो समापन में भाजपाई नेताओं को आमंत्रित किया।
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ग्राम पंचायत की तरफ से सभी भाजपाइयों को न्योता दिया गया था। चुनावी साल होने से नेताओं के लिए महोत्सव बड़ा मंच साबित हुआ। सोमवार को भाजपा नेता हेमंत द्विवेदी और डॉ. मोहन सिंह बिष्ट समर्थकों के साथ महोत्सव में पहुंचे।
दोनों ही नेता लालकुआं से भाजपा के प्रबल दावेदार हैं। टिकट की होड़ के चलते राजनीति के लिहाज से फिलहाल दोनों ही एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं। पार्टी के कार्यक्रमों में भले ही एक मंच में जाना मजबूरी हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर उनकी एक साथ मौजूदगी कहीं न कहीं वोट बैंक के राजनीति की मजबूरी भी है।