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दया पर नहीं रही चंचल हथिनी
ब्यूरो/अमर उजाला,रामनगर
Updated Mon, 08 Jun 2015 12:54 AM IST
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कार्बेट पार्क के ढिकाला रेंज में लंबे समय से जख्मी और बेशुमार दर्द से तड़प रही जिस हथिनी को दया मृत्यु देने की तैयारी थी, वह खुद ही रविवार शाम को दुनिया से चल बसी। सोमवार को सम्मान के साथ उसे हाथीखाने के पास दफनाया जाएगा।
पार्क निदेशक समीर सिन्हा ने बताया कि कार्बेट नेशनल पार्क के ढिकाला रेंज में 60 वर्षीय पालतू हथिनी चंचल का 28 अप्रैल को साथी पालतू हथिनी से लड़ाई होने से दायां पैर फैक्चर हो गया था। वह डेढ़ माह से जमीन पर ही पड़ी थी। इसके चलते उसका स्वास्थ्य खराब होता चला गया था।
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उसे खड़ा करने के लिए चेन कुप्पी की मदद से, क्रेन से उठाने की कोशिश की गई। बावजूद इसके वह खड़ी नहीं हो पाई। श्री सिन्हा ने बताया कि चंचल पार्क की सदस्य थी, उसने पार्क को लंबे समय तक सेवाएं दीं। सोमवार को फूलमालाओं से सजाकर चंचल को हाथीखाने के पास ही दफना दिया जाएगा।
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बताते चलें कि 60 साल की उम्र में कार्बेट पार्क की पालतू हथिनी चंचल पैर टूटने से उठ नहीं पा रही थी। पिछले डेढ़ महीने से उसकी जिंदगी एक तरह से बोझ बन गई थी। सारी कोशिशों के बावजूद उसकी सेहत नहीं सुधर पाई। उसकी असहनीय पीड़ा के मद्देनजर दया मृत्यु के विकल्प पर विचार हो रहा था। इस बीच हाथिनी ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
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पार्क निदेशक समीर सिन्हा ने बताया कि कार्बेट नेशनल पार्क के ढिकाला रेंज में 60 वर्षीय पालतू हथिनी चंचल का 28 अप्रैल को साथी पालतू हथिनी से लड़ाई होने से दायां पैर फैक्चर हो गया था। वह डेढ़ माह से जमीन पर ही पड़ी थी। इसके चलते उसका स्वास्थ्य खराब होता चला गया था।
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उसे खड़ा करने के लिए चेन कुप्पी की मदद से, क्रेन से उठाने की कोशिश की गई। बावजूद इसके वह खड़ी नहीं हो पाई। श्री सिन्हा ने बताया कि चंचल पार्क की सदस्य थी, उसने पार्क को लंबे समय तक सेवाएं दीं। सोमवार को फूलमालाओं से सजाकर चंचल को हाथीखाने के पास ही दफना दिया जाएगा।