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सरकारी तौल केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों की जांच शुरू
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प्रतीकात्मक फोटो।
हल्द्वानी। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सरकारी तौल केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों की जांच शुरू कर दी है। पहले 100 क्विंटल से अधिक धान बेचने वाले किसानों को केंद्र में रखकर जांच की जा रही है। उधर सितारगंज, नानकमत्ता में गन्ने के रकबे में धान तुलवाने वाले किसानों पर मुकदमा दर्ज हो चुका है।
सरकार ने सरकारी तौल केंद्रों में धान खरीद का लक्ष्य 25 लाख क्विंटल रखा था। पहली बार राज्य के सरकारी तौल केंद्रों में सरकार की ओर से तय लक्ष्य से अधिक खरीद हो चुकी है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार सरकारी तौल केंद्र्र 30 लाख क्विंटल धान खरीद चुके हैं। अब भी सरकारी तौल केंद्रों में खरीद जारी है।
तौल खरीद लक्ष्य से अधिक होने के बाद खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। सितारगंज और नानकमत्ता में 15 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें यूपी का धान किसानों की ओर से अपनी खतौनी लगाकर तोला गया था। इन किसानों पर मुकदमा दर्ज हो चुका है। अब आरएफसी ने ऐसे किसानों की जांच करने के आदेश दिए हैं, जिन्होंने सरकारी तौल केंद्रों में 100 क्विंटल से अधिक धान बेचा है। उपसंभागीय विपणन अधिकारी वेद प्रकाश धूलिया ने बताया कि जांच की जा रही है।
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बता दें कि यूपी में इस बार धान 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल रुपये तक खुलेबाजार में मिल रहा था। धान में नमी कम होने के कारण किसानों को सरकारी तौल केंद्रों में धान बेचने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी। उत्तराखंड के किसानों ने इसका जमकर फायदा उठाया। कई किसानों ने यूपी से धान लाकर अपनी खतौनी दिखाकर उत्तराखंड के सरकारी तौल केंद्रों में बेच दिया।
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सरकार ने सरकारी तौल केंद्रों में धान खरीद का लक्ष्य 25 लाख क्विंटल रखा था। पहली बार राज्य के सरकारी तौल केंद्रों में सरकार की ओर से तय लक्ष्य से अधिक खरीद हो चुकी है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार सरकारी तौल केंद्र्र 30 लाख क्विंटल धान खरीद चुके हैं। अब भी सरकारी तौल केंद्रों में खरीद जारी है।
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तौल खरीद लक्ष्य से अधिक होने के बाद खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है। सितारगंज और नानकमत्ता में 15 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें यूपी का धान किसानों की ओर से अपनी खतौनी लगाकर तोला गया था। इन किसानों पर मुकदमा दर्ज हो चुका है। अब आरएफसी ने ऐसे किसानों की जांच करने के आदेश दिए हैं, जिन्होंने सरकारी तौल केंद्रों में 100 क्विंटल से अधिक धान बेचा है। उपसंभागीय विपणन अधिकारी वेद प्रकाश धूलिया ने बताया कि जांच की जा रही है।
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बता दें कि यूपी में इस बार धान 1000 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल रुपये तक खुलेबाजार में मिल रहा था। धान में नमी कम होने के कारण किसानों को सरकारी तौल केंद्रों में धान बेचने में कोई दिक्कत नहीं आ रही थी। उत्तराखंड के किसानों ने इसका जमकर फायदा उठाया। कई किसानों ने यूपी से धान लाकर अपनी खतौनी दिखाकर उत्तराखंड के सरकारी तौल केंद्रों में बेच दिया।