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हाईकोर्ट में अति आवश्यक मामलों की ही होगी सुनवाई
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प्रतीकात्मक फोटो।
नैनीताल। कोरोना को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट भी सतर्क हो गया है। इसी क्रम में सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन के साथ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महाधिवक्ता की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब तक कोरोना वायरस की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती तब तक कोर्ट में अति आवश्यक मामलों की सुनवाई होगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि अधिवक्ता की गैर मौजूदगी में कोई भी एडवर्स आदेश पारित नहीं किया जाएगा।
इससे पूर्व हाईकोर्ट बार सभा में बार एसोसिएशन ने सरकार व विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोरोना को महामारी घोषित करने का जिक्र करते हुए इससे बचने के लिए अपनी कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। बैठक में निर्णय लेकर मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की गई कि जब तक कोरोना से निजात नहीं मिल जाती तब तक कोर्ट में सिर्फ अर्जेंट यानी अति आवश्यक मामलों की ही सुनवाई की जाए। इस पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से दिन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की और इसके बाद बार को अवगत कराया कि अधिवक्ता इसमें सहयोग करें और अति आवश्यक मामले ही फाइल करें। यदि कोई अधिवक्ता इस दौरान कोर्ट में सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहता है तो उनके मामलों में एडवर्स आदेश पारित नहीं किए जाएंगे।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव जयवर्धन कांडपाल ने बताया कि अभी उत्तराखंड में कोरोना वायरस का केवल एक मामला ही सामने आया है। इसलिए इससे डरने की आवश्यकता नहीं है लेकिन नैनीताल एक पर्यटन नगरी है, इसलिए यहां भी वायरस फैल सकता है। इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए। सचिव ने यह भी बताया कि मुख्य न्यायाधीश से वार्ता के दौरान ये बातें भी निकल कर आईं कि तात्कालिक व अत्यावश्यक मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें विशेषत: क्रिमिनल और सिविल के डिमोलिशन आदि के मामले प्राथमिकता पर सुने जाएंगे।
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इसलिए उन्होंने अधिवक्ताओं से अपेक्षा की है कि वे अति आवश्यक मामले ही फाइल करें। संभव हो तो अनावश्यक गैदरिंग से भी बचें। इसके अलावा, बैठक में यह भी तय किया गया कि कोई भी वादकारी अनावश्यक रूप से अदालत न आए जब तक कि कोई अर्जेंसी ना हो इसके अलावा हाईकोर्ट के सभी अधिवक्ताओं से कहा गया है कि अर्जेंट केसों को ही फाइल करें और मिल-जुलकर सहयोग करें। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में वादकारियों के प्रवेश पर रोक लग सकती है। साथ ही कहा कि अन्य दिशानिर्देश कॉज लिस्ट के माध्यम से सबको प्राप्त होंगे।
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इससे पूर्व हाईकोर्ट बार सभा में बार एसोसिएशन ने सरकार व विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोरोना को महामारी घोषित करने का जिक्र करते हुए इससे बचने के लिए अपनी कार्यकारिणी की बैठक बुलाई। बैठक में निर्णय लेकर मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की गई कि जब तक कोरोना से निजात नहीं मिल जाती तब तक कोर्ट में सिर्फ अर्जेंट यानी अति आवश्यक मामलों की ही सुनवाई की जाए। इस पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से दिन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की और इसके बाद बार को अवगत कराया कि अधिवक्ता इसमें सहयोग करें और अति आवश्यक मामले ही फाइल करें। यदि कोई अधिवक्ता इस दौरान कोर्ट में सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहता है तो उनके मामलों में एडवर्स आदेश पारित नहीं किए जाएंगे।
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हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव जयवर्धन कांडपाल ने बताया कि अभी उत्तराखंड में कोरोना वायरस का केवल एक मामला ही सामने आया है। इसलिए इससे डरने की आवश्यकता नहीं है लेकिन नैनीताल एक पर्यटन नगरी है, इसलिए यहां भी वायरस फैल सकता है। इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए। सचिव ने यह भी बताया कि मुख्य न्यायाधीश से वार्ता के दौरान ये बातें भी निकल कर आईं कि तात्कालिक व अत्यावश्यक मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें विशेषत: क्रिमिनल और सिविल के डिमोलिशन आदि के मामले प्राथमिकता पर सुने जाएंगे।
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इसलिए उन्होंने अधिवक्ताओं से अपेक्षा की है कि वे अति आवश्यक मामले ही फाइल करें। संभव हो तो अनावश्यक गैदरिंग से भी बचें। इसके अलावा, बैठक में यह भी तय किया गया कि कोई भी वादकारी अनावश्यक रूप से अदालत न आए जब तक कि कोई अर्जेंसी ना हो इसके अलावा हाईकोर्ट के सभी अधिवक्ताओं से कहा गया है कि अर्जेंट केसों को ही फाइल करें और मिल-जुलकर सहयोग करें। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में वादकारियों के प्रवेश पर रोक लग सकती है। साथ ही कहा कि अन्य दिशानिर्देश कॉज लिस्ट के माध्यम से सबको प्राप्त होंगे।