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Nainital News: गठिया में समय पर इलाज न मिला तो जा सकती है आंखों की रोशनी
Mon, 17 Jun 2024 05:22 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 17 Jun 2024 05:22 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में बच्चों में गठिया रोग पर आयोजित कार्यशाला में बोलती बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रितु र
हल्द्वानी। मेडिकल कॉलेज के लेक्चर थियेटर में बाल रोग विभाग की ओर से बच्चों में गठिया रोग विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि गठिया में समय पर और उचित इलाज नहीं मिलने पर ग्रोथ में कमी, विकलांगता, आंख की रोशनी जाने, किडनी-फेफड़ों में प्रभाव और सांस लेने की मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है।
मेडिसन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. परमजीत सिंह ने कहा कि लोगों में भ्रांतियां हैं कि गठिया रोग अधिक उम्र के लोगों को होता है लेकिन यह मर्ज 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को भी हो सकता है। इसे जुवेनाइल ऑर्थराइटिस यानी बाल गठिया रोग के रूप में भी जाना जाता है। इसके लक्षणों में लंबी अवधि से तेज बुखार, वजन का न बढ़ना, मांशपेशियों में कमजोरी, जोड़ों में दर्द आदि शामिल है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतु रखोलिया ने बताया कि 16 साल से कम उम्र के एक लाख में से 50 बच्चों में गठिया रोग पाया जाता है। समय पर निदान न होने पर बच्चों के जोड़ विकृत हो जाते हैं। एम्स दिल्ली के डाॅ. नरेंद्र बागरी ने बताया कि ल्यूपस के संभावित लक्षणों में थकान, जोड़ों में दर्द, बालों का झड़ना और बच्चों के गालों पर तितली दाने आदि शामिल हैं। दवाएं ल्यूपस को कम करने में मदद कर सकती हैं। प्राचार्य डाॅ. अरुण जोशी ने बाल रोग विभाग की पहल को जानकारीपरक बताया। इस दौरान पीजी छात्र-छात्राओं ने पेपर और पोस्टर प्रस्तुतीकरण किया। कार्यशाला में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जीएस तितियाल, डाॅ. गुंजन नगरकोटी, डाॅ. पूजा अग्रवाल, डाॅ. प्रणयी बोस, डाॅ. प्रेरणा, डॉ. अनिल अग्रवाल, डाॅ. अजय पांडे, डाॅ. अमित सुयाल, डाॅ. रवि सहोता, डाॅ. रवि अदलखा, डाॅ. प्रदीप पंत, डाॅ. अदिति, डाॅ. प्रमोद आदि मौजूद रहे।
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मेडिसन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. परमजीत सिंह ने कहा कि लोगों में भ्रांतियां हैं कि गठिया रोग अधिक उम्र के लोगों को होता है लेकिन यह मर्ज 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को भी हो सकता है। इसे जुवेनाइल ऑर्थराइटिस यानी बाल गठिया रोग के रूप में भी जाना जाता है। इसके लक्षणों में लंबी अवधि से तेज बुखार, वजन का न बढ़ना, मांशपेशियों में कमजोरी, जोड़ों में दर्द आदि शामिल है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतु रखोलिया ने बताया कि 16 साल से कम उम्र के एक लाख में से 50 बच्चों में गठिया रोग पाया जाता है। समय पर निदान न होने पर बच्चों के जोड़ विकृत हो जाते हैं। एम्स दिल्ली के डाॅ. नरेंद्र बागरी ने बताया कि ल्यूपस के संभावित लक्षणों में थकान, जोड़ों में दर्द, बालों का झड़ना और बच्चों के गालों पर तितली दाने आदि शामिल हैं। दवाएं ल्यूपस को कम करने में मदद कर सकती हैं। प्राचार्य डाॅ. अरुण जोशी ने बाल रोग विभाग की पहल को जानकारीपरक बताया। इस दौरान पीजी छात्र-छात्राओं ने पेपर और पोस्टर प्रस्तुतीकरण किया। कार्यशाला में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जीएस तितियाल, डाॅ. गुंजन नगरकोटी, डाॅ. पूजा अग्रवाल, डाॅ. प्रणयी बोस, डाॅ. प्रेरणा, डॉ. अनिल अग्रवाल, डाॅ. अजय पांडे, डाॅ. अमित सुयाल, डाॅ. रवि सहोता, डाॅ. रवि अदलखा, डाॅ. प्रदीप पंत, डाॅ. अदिति, डाॅ. प्रमोद आदि मौजूद रहे।
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