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डिफॉल्टर चाय कंपनी से वसूली न करने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को दिए कंपनी से शीघ्र वसूली के आदेश

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 02 Dec 2020 02:11 AM IST
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High court strict on not recovering from defaulter tea company, orders for speedy recovery from company
प्रतीकात्मक फोटो।
नैनीताल। हाईकोर्ट ने बंद हो चुकी उत्तरांचल चाय कंपनी कौसानी से देयकों की वसूली पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने सरकार को इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राज्य के मुख्य सचिव को कोर्ट के आदेश की प्रति डिफॉल्टर कंपनी को उपलब्ध कराने को कहा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 दिसंबर की तिथि नियत की है।
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पूर्व में हुई सुनवाई के क्रम में अपर सचिव कृषि किसान कल्याण विभाग उत्तराखंड शासन की ओर से शपथपत्र दाखिल कर कहा गया था कि कर्नाटक स्थित मै. गिरियाज इन्वेस्टमेंट लिमिटेड की सहयोगी कंपनी मै. उत्तरांचल टी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड से 25 लाख 85 हजार 269 रुपये की वसूली के लिए 26 नवंबर 2020 को मुख्य सचिव बंगलौर को पत्र भेजा है। हाईकोर्ट ने सरकार के इस शपथपत्र पर असंतुष्टि व्यक्त करते हुए पुन: आदेश दिए कि 2015 से उत्तरांचल टी कंपनी से लंबित देनदारी की वसूली के लिए गंभीरता से कार्रवाई करें।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ एवं न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार कौसानी निवासी किशन चंद्र सिंह खत्री ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि कौसानी में चाय विकास बोर्ड उत्तराखंड की लापरवाही से करीब 6 वर्षो से एकमात्र चाय फैक्ट्री बंद पड़ी है। इससे न केवल 500 हेक्टेयर भूमि में चाय उत्पादन में लगे 1200 से अधिक मजदूरों का रोजगार प्रभावित हुआ है बल्कि सरकार को चाय उत्पादन से होने वाले राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
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याचिका में कहा गया कि 2002 में कुमाऊं मंडल विकास निगम और उत्तराचंल चाय कंपनी के संयुक्त उपक्रम ने एक चाय फैक्टरी का संचालन किया, लेकिन फरवरी 2015 में उत्तरांचल चाय कंपनी ने फैक्टरी का संचालन बंद कर दिया। इसके कारण करीब 30 कर्मचारी प्रत्यक्ष रूप से बेरोजगार ही नहीं हुए बल्कि सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल कौसानी में पर्यटकों के आकर्षण का केंद व चाय से होने वाली आमदनी भी प्रभावित हुई। याचिका में कहा गया है कि बंद हो चुकी चाय कंपनी के खिलाफ 44 लाख रुपये से अधिक की देनदारी लंबित है, जिसे राज्य सरकार वसूलने में विफल साबित हुई।
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