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हाईकोर्ट : प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा को अवमानना नोटिस
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने एमकेपी पीजी कॉलेज देहरादून में 45 लाख रुपये के गबन के मामले में हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी करने तथा जांच को लंबित रखने पर प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा को अवमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून की समाजसेवी सोनिया बेनीवाल ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि वर्ष 2012 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एमकेपी पीजी कॉलेज देहरादून को 45 लाख रुपये दिए थे। ऑडिट में इस धनराशि के गबन का अंदेशा जताया गया था। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी जिसमें उच्च शिक्षा विभाग की ओर से शपथपत्र पेश कर कहा गया कि विवि में 45 लाख रुपये का गबन हुआ है।
हाईकोर्ट ने तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव जितेंद्र सिंह नेगी और तत्कालीन प्राचार्य डॉ. किरण सूद को सुनवाई का अवसर देने के बाद प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा आनंद वर्धन को चार माह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। कहा था कि अगर गड़बड़ियों की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सचिव जितेंद्र सिंह नेगी ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलने के बाद जितेंद्र सिंह नेगी ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दिया था। कोर्ट के पूर्व आदेश के क्रम में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा आनंद वर्धन को इस प्रकरण में 18 दिसंबर 2020 तक उचित निर्णय लेकर कार्रवाई करनी थी। उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने और इसमें अतिविलंब करने पर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की थी।
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न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून की समाजसेवी सोनिया बेनीवाल ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि वर्ष 2012 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एमकेपी पीजी कॉलेज देहरादून को 45 लाख रुपये दिए थे। ऑडिट में इस धनराशि के गबन का अंदेशा जताया गया था। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी जिसमें उच्च शिक्षा विभाग की ओर से शपथपत्र पेश कर कहा गया कि विवि में 45 लाख रुपये का गबन हुआ है।
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हाईकोर्ट ने तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव जितेंद्र सिंह नेगी और तत्कालीन प्राचार्य डॉ. किरण सूद को सुनवाई का अवसर देने के बाद प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा आनंद वर्धन को चार माह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। कहा था कि अगर गड़बड़ियों की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सचिव जितेंद्र सिंह नेगी ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिलने के बाद जितेंद्र सिंह नेगी ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे हाईकोर्ट ने भी खारिज कर दिया था। कोर्ट के पूर्व आदेश के क्रम में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा आनंद वर्धन को इस प्रकरण में 18 दिसंबर 2020 तक उचित निर्णय लेकर कार्रवाई करनी थी। उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने और इसमें अतिविलंब करने पर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की थी।
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