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जस्टिस रेड्डी को आरोपमुक्त करने के आदेश को रिकॉल करने के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई 14 को
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस एल नरसिम्हन रेड्डी से संबंधित अवमानना याचिका तथा जस्टिस रेड्डी को आरोपमुक्त करने के आदेश को रिकॉल करने संबंधी प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जनवरी की तिथि नियत की है।
मामला वर्ष 2019 में मुख्य वन संरक्षक हल्द्वानी संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर कैट के तत्कालीन चेयरमैन जस्टिस रेड्डी को अवमानना नोटिस से संबंधित है। इस प्रकरण में जस्टिस रेड्डी को हाईकोर्ट के न्यायाधीश शरद शर्मा की एकलपीठ ने जून 2017 में तथा अगस्त 2018 में दिए गए दो आदेशों में अवमानना का दोषी पाया था। कोर्ट ने आदेश दिया था कि आईएफएस संजीव की एसीआर में जीरो अंकन के खिलाफ दायर याचिका पर कैट की नैनीताल बैंच में सुनवाई की जाए। इसी आदेश को जस्टिस रेड्डी ने एलएलपी दायर कर कोर्ट में चुनौती दी थी। 11 मार्च 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अग्रिम आदेशों तक समस्त कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। इसमें नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के आदेश को समाप्त कर रेड्डी को अवमानना के आरोप से मुक्त कर दिया था।
एकलपीठ के इसी आदेश को रिकाल करने के लिए संजीव ने प्रार्थना पत्र दिया था। याची ने कोर्ट से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करने की प्रार्थना की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में किसी तरह की कार्यवाही पर रोक लगाई थी।
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मामला वर्ष 2019 में मुख्य वन संरक्षक हल्द्वानी संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर कैट के तत्कालीन चेयरमैन जस्टिस रेड्डी को अवमानना नोटिस से संबंधित है। इस प्रकरण में जस्टिस रेड्डी को हाईकोर्ट के न्यायाधीश शरद शर्मा की एकलपीठ ने जून 2017 में तथा अगस्त 2018 में दिए गए दो आदेशों में अवमानना का दोषी पाया था। कोर्ट ने आदेश दिया था कि आईएफएस संजीव की एसीआर में जीरो अंकन के खिलाफ दायर याचिका पर कैट की नैनीताल बैंच में सुनवाई की जाए। इसी आदेश को जस्टिस रेड्डी ने एलएलपी दायर कर कोर्ट में चुनौती दी थी। 11 मार्च 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अग्रिम आदेशों तक समस्त कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। इसमें नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ के आदेश को समाप्त कर रेड्डी को अवमानना के आरोप से मुक्त कर दिया था।
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एकलपीठ के इसी आदेश को रिकाल करने के लिए संजीव ने प्रार्थना पत्र दिया था। याची ने कोर्ट से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करने की प्रार्थना की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में किसी तरह की कार्यवाही पर रोक लगाई थी।
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