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छात्रवृत्ति घोटाला : गीताराम नौटियाल का जमानत प्रार्थना पत्र मंजूर
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प्रतीकात्मक फोटो
नैनीताल। हाईकोर्ट ने छात्रवृत्ति घोटाले में फंसे मुख्य आरोपी गीताराम नौटियाल के जमानत प्रार्थनापत्र को स्वीकार कर लिया है।
न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार गीताराम नौटियाल ने हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल कर कहा था कि वह एक नवंबर 2019 से जेल में हैं।
एसआईटी ने उन्हें छात्रवृत्ति घोटाले में गिरफ्तार किया था। उन पर 16 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति घोटाले का आरोप है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का कहना था कि सरकार ने 2006 और 2009 के शासनादेश के आधार पर उनको 2012 में छात्रवृत्ति देने को कहा था। उसी के आधार पर उन्होंने छात्रवृत्ति आवंटित की। याचिका में कहा गया कि उन्होंने कभी भी सरकारी धन का उपयोग अपने व्यक्तिगत हित के लिए नहीं किया। छात्रवृत्ति का जो रुपया आया था उसे उन्होंने संबंधित संस्थाओं को भुगतान किया था।
याचिका में कहा गया कि कोर्ट ने पूर्व में सह अभियुक्त अनुराग शंखधर सहित कई अन्य लोगों के जमानत प्रार्थनापत्रों को स्वीकार कर लिया है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया। छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी समाज कल्याण अधिकारी और वर्तमान ज्वाइंट डायरेक्टर समाज कल्याण विभाग गीताराम नौटियाल ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए पूर्व में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने कारण हाईकोर्ट को रेफर कर दिया था। दोनों ही कोर्ट ने गीताराम नौटियाल की याचिका में सुनवाई के बाद गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई थी। इसके बाद गीताराम नौटियाल ने एससी-एसटी आयोग में अपना उत्पीड़न होने का मामला दर्ज कराया और कहा कि एसआईटी पूछताछ के नाम पर उनका उत्पीड़न कर रही है।
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न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार गीताराम नौटियाल ने हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल कर कहा था कि वह एक नवंबर 2019 से जेल में हैं।
एसआईटी ने उन्हें छात्रवृत्ति घोटाले में गिरफ्तार किया था। उन पर 16 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति घोटाले का आरोप है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता का कहना था कि सरकार ने 2006 और 2009 के शासनादेश के आधार पर उनको 2012 में छात्रवृत्ति देने को कहा था। उसी के आधार पर उन्होंने छात्रवृत्ति आवंटित की। याचिका में कहा गया कि उन्होंने कभी भी सरकारी धन का उपयोग अपने व्यक्तिगत हित के लिए नहीं किया। छात्रवृत्ति का जो रुपया आया था उसे उन्होंने संबंधित संस्थाओं को भुगतान किया था।
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याचिका में कहा गया कि कोर्ट ने पूर्व में सह अभियुक्त अनुराग शंखधर सहित कई अन्य लोगों के जमानत प्रार्थनापत्रों को स्वीकार कर लिया है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के जमानत प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया। छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी समाज कल्याण अधिकारी और वर्तमान ज्वाइंट डायरेक्टर समाज कल्याण विभाग गीताराम नौटियाल ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए पूर्व में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने कारण हाईकोर्ट को रेफर कर दिया था। दोनों ही कोर्ट ने गीताराम नौटियाल की याचिका में सुनवाई के बाद गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगाई थी। इसके बाद गीताराम नौटियाल ने एससी-एसटी आयोग में अपना उत्पीड़न होने का मामला दर्ज कराया और कहा कि एसआईटी पूछताछ के नाम पर उनका उत्पीड़न कर रही है।