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अल्मोड़ा परिसर में हुई घटना की जांच को पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित
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Five-member inquiry committee constituted to investigate the incident in Almora campus
नैनीताल। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा में दो दिन पहले हुए घटनाक्रम को कुलपति प्रो. केएस राना ने गंभीरता से लिया है। उन्हें घटना को दुर्भाग्यपूर्ण और दुखदायी बताते हुए मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच कमेटी भी गठित कर दी है। इसमें कार्य परिषद सदस्य केवल सती को संयोजक बनाया गया है, जबकि डीएसबी परिसर के प्रो. वीएस बिष्ट, अल्मोड़ा विधि विभाग के प्रो. डीके भट्ट, विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. एसपीएस मेहता और पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारी अशोक कनवाल को शामिल किया है।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि कुलपति प्रो. राना ने देहरादून से वापस लौटने के बाद इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। कुलपति प्रो. राना ने कहा कि गुरु और शिष्य के रिश्ते में गुरुजनों को गरिमा और शिष्यों को मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा है कि बेहतर होता यदि मतभेद आपस में बैठकर सुलझाए जाते। अन्यथा विवि से मध्यस्थता हेतु वरिष्ठ शिक्षकों को सहभागी बनाया जाता।
कुलपति प्रो. राना ने कहा कि अल्मोड़ा परिसर की समस्याओं के निराकरण के लिए छात्रसंघ चुनाव से पहले ही छात्र एवं शिक्षक प्रतिनिधियों से वार्ता कर उन्होंने समस्याओं के निराकरण के लिये दो लाख की धनराशि स्वीकृति करा दी थी, जिससे अल्मोड़ा परिसर में कुछ कार्य हुए भी। उन्होंने कहा कि छात्रों के कानून हाथ में लेने से तुरंत समस्याओं का समाधान नहीं होता।
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विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि कुलपति प्रो. राना ने देहरादून से वापस लौटने के बाद इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है। कुलपति प्रो. राना ने कहा कि गुरु और शिष्य के रिश्ते में गुरुजनों को गरिमा और शिष्यों को मर्यादा का ध्यान रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा है कि बेहतर होता यदि मतभेद आपस में बैठकर सुलझाए जाते। अन्यथा विवि से मध्यस्थता हेतु वरिष्ठ शिक्षकों को सहभागी बनाया जाता।
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कुलपति प्रो. राना ने कहा कि अल्मोड़ा परिसर की समस्याओं के निराकरण के लिए छात्रसंघ चुनाव से पहले ही छात्र एवं शिक्षक प्रतिनिधियों से वार्ता कर उन्होंने समस्याओं के निराकरण के लिये दो लाख की धनराशि स्वीकृति करा दी थी, जिससे अल्मोड़ा परिसर में कुछ कार्य हुए भी। उन्होंने कहा कि छात्रों के कानून हाथ में लेने से तुरंत समस्याओं का समाधान नहीं होता।
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