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भवाली से रामगढ़ तक 80 करोड़ की फलपट्टी बरबाद
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सकुना। आपदा के कारण भवाली से लेकर तल्ला रामगढ़, मल्ला रामगढ़, हरतोला, सकुना, झूतिया आदि क्षेत्र की 80 करोड़ रुपये की फलपट्टी पूरी तरह बरबाद हो गई। करीब दो करोड़ की सब्जी, दालें भी आपदा के कारण बरबाद हो गई। पांच करोड़ के भवन, गौशाला, दुकानें भी बह गई। सड़कें बंद होने के कारण सब्जी भी खेतों में खराब हो रही है।
बोहरा कोट निवासी सोबन सिंह, हरीश सिंह, जीवन सिंह ने बताया कि बारिश के कारण उनके दो पक्के गोशाला, दूध देने वाली चार गाय, 128 नाली फल पट्टी आपदा के भेंट चढ़ गए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष वह आठ लाख के आडू इससे बेचते थे।
बोहरा कोट निवासी चंद्र प्रकाश ने बताया कि आपदा के कारण उनकी दो मकान और 10 नाली जमीन बह गई। हरतोला तोक राधाबल्लभ भट्ट, त्रिलोचन भट्ट, मोहन चंद्र भट्ट, केदार दत्त भट्ट, शंकर सिंह, प्रकाश पांडे ने बताया कि आपदा के कारण उनका सेब का बाग उजड़ गया। करीब 250 नाली जमीन बह गई।
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प्रतीक बिष्ट निवासी झूतिया ने बताया कि आपदा में उनकी पूरी दुकान बह गई। गोविंद सिंह नेगी ने बताया कि आपदा के कारण सड़कें पांच दिन से बंद हैं। राशन की किल्लत होने लगी है। कहा कि उनके रोजगार का साधन खत्म हो गए हैं। सड़कें बंद होने के कारण वह शिमला मिर्च, लाकी, कद्दू, टमाटर मंडी तक नहीं ले जा पा रहे हैं। इससे उनकी सब्जियां खराब हो रही हैं। राजन सिंह नेगी ने कहा कि आपदा के कारण काले भट्ट, गहत, राजमा, शिमला मिर्च और टमाटर पूरी तरह खराब हो गए।
रास्ते नहीं खुले तो राशन की हो जाएगी किल्लत
सकुना। रास्ता बंद होने के कारण सरकारी सस्ता गल्ला की दुकानों, परचून की दुकानों में सामान की कमी होने लगी है। हाल ये है कि लोगों के पास जरूरी सामान भी खत्म होने लगा है। सकुना निवासी हरिओम ने बताया कि जल्द ही सड़क मार्ग नहीं खुले तो तेल, नमक, चीनी, दाल, चावल की भी भारी कमी हो जाएगी। कहा कि दुकानों में सामान खत्म होने लगा है।
1200 परिवारों का सड़क मार्ग से संपर्क कटा
सकुना। आपदा के कारण हली, झूतिया, सकुना, पिछलटान, सलिया, तितोली, हरतप्पा, कूंणा, कानीधार और कैंची गांव के 1200 परिवारों के गांव से गुजरने वाली सड़क कई जगह से टूट गई है। इन परिवारों का संपर्क पूरी तरह रामगढ़ और भवाली से टूट गया है।
आपदा छोड़ गई गहरे घाव, भरने में लगेंगे कई साल
सकुना। आपदा रामगढ़ क्षेत्र के लोगों के दिलों में गहरे घाव छोड़ गई। कई लोगों को अपनों को खोने का दर्द, तो कई के दिलों में अपनी जमीन, मकान खोने का दर्द है। इस दर्द को भरने में लंबा समय लगेगा।
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बोहरा कोट निवासी सोबन सिंह, हरीश सिंह, जीवन सिंह ने बताया कि बारिश के कारण उनके दो पक्के गोशाला, दूध देने वाली चार गाय, 128 नाली फल पट्टी आपदा के भेंट चढ़ गए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष वह आठ लाख के आडू इससे बेचते थे।
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बोहरा कोट निवासी चंद्र प्रकाश ने बताया कि आपदा के कारण उनकी दो मकान और 10 नाली जमीन बह गई। हरतोला तोक राधाबल्लभ भट्ट, त्रिलोचन भट्ट, मोहन चंद्र भट्ट, केदार दत्त भट्ट, शंकर सिंह, प्रकाश पांडे ने बताया कि आपदा के कारण उनका सेब का बाग उजड़ गया। करीब 250 नाली जमीन बह गई।
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प्रतीक बिष्ट निवासी झूतिया ने बताया कि आपदा में उनकी पूरी दुकान बह गई। गोविंद सिंह नेगी ने बताया कि आपदा के कारण सड़कें पांच दिन से बंद हैं। राशन की किल्लत होने लगी है। कहा कि उनके रोजगार का साधन खत्म हो गए हैं। सड़कें बंद होने के कारण वह शिमला मिर्च, लाकी, कद्दू, टमाटर मंडी तक नहीं ले जा पा रहे हैं। इससे उनकी सब्जियां खराब हो रही हैं। राजन सिंह नेगी ने कहा कि आपदा के कारण काले भट्ट, गहत, राजमा, शिमला मिर्च और टमाटर पूरी तरह खराब हो गए।
रास्ते नहीं खुले तो राशन की हो जाएगी किल्लत
सकुना। रास्ता बंद होने के कारण सरकारी सस्ता गल्ला की दुकानों, परचून की दुकानों में सामान की कमी होने लगी है। हाल ये है कि लोगों के पास जरूरी सामान भी खत्म होने लगा है। सकुना निवासी हरिओम ने बताया कि जल्द ही सड़क मार्ग नहीं खुले तो तेल, नमक, चीनी, दाल, चावल की भी भारी कमी हो जाएगी। कहा कि दुकानों में सामान खत्म होने लगा है।
1200 परिवारों का सड़क मार्ग से संपर्क कटा
सकुना। आपदा के कारण हली, झूतिया, सकुना, पिछलटान, सलिया, तितोली, हरतप्पा, कूंणा, कानीधार और कैंची गांव के 1200 परिवारों के गांव से गुजरने वाली सड़क कई जगह से टूट गई है। इन परिवारों का संपर्क पूरी तरह रामगढ़ और भवाली से टूट गया है।
आपदा छोड़ गई गहरे घाव, भरने में लगेंगे कई साल
सकुना। आपदा रामगढ़ क्षेत्र के लोगों के दिलों में गहरे घाव छोड़ गई। कई लोगों को अपनों को खोने का दर्द, तो कई के दिलों में अपनी जमीन, मकान खोने का दर्द है। इस दर्द को भरने में लंबा समय लगेगा।