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Nainital News: जमरानी बांध में चट्टान की दरार का ट्रीटमेंट शुरू
Tue, 06 Oct 2026 02:40 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Tue, 06 Oct 2026 02:40 AM IST
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प्रतीकात्मक
हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना में चट्टान में आए आठ मीटर लंबे गैप के ट्रीटमेंट का काम केंद्रीय जल आयोग के निर्देश पर शुरू कर दिया गया है, हालांकि अंतिम जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है।
परियोजना के उप महाप्रबंधक बीबी पांडेय ने बताया कि बांध की डिजाइन लेवल 765.6 मीटर से 53 मीटर गहरी खोदाई के बाद 712 मीटर लेवल पर दाहिनी एबटमेंट की चट्टान में गैप मिला था। तुरंत काम रोककर मामला केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया। आयोग की टीम ने साइट का निरीक्षण कर जियोफिजिकल सर्वे के निर्देश दिए थे।
बीबी पांडेय ने बताया कि केंद्रीय जल आयोग ने ट्रीटमेंट के लिए विस्तृत सुझाव दिए हैं। इसके तहत गैप वाले हिस्से में 1.5 मीटर से 2 मीटर की दूरी पर रॉक बोल्ट लगाए जा रहे हैं। कुल 60 से 70 रॉक बोल्ट 6 से 9 मीटर गहराई तक लगेंगे।
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रॉक बोल्ट के बाद प्रेशर ग्राउटिंग से सीमेंट घोल भरकर चट्टान की दरारों को सील किया जाएगा। ऊपर से शॉटक्रीट और कंक्रीट ब्लॉकों से सिलाई की जाएगी ताकि दोनों चट्टानें आपस में जुड़ जाएं। जरूरत पड़ने पर लोहे की सरिया और बीम से सपोर्ट दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आयोग के निर्देश पर ट्रीटमेंट का काम शुरू हो गया है। लेकिन जियोफिजिकल सर्वे की फाइनल रिपोर्ट अभी तक केंद्रीय जल आयोग से नहीं आई है।
ॉप्रारंभिक रिपोर्ट में गैप की पुष्टि हुई है, लेकिन यह गैप अंदर कितनी गहराई तक है, इसकी अंतिम पुष्टि फाइनल रिपोर्ट के बाद ही होगी।
पांडेय ने बताया कि ट्रीटमेंट में दो माह का समय लग सकता है। इस दौरान डायवर्जन टनल और अन्य एप्रोच वर्क जारी रहेंगे।
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परियोजना के उप महाप्रबंधक बीबी पांडेय ने बताया कि बांध की डिजाइन लेवल 765.6 मीटर से 53 मीटर गहरी खोदाई के बाद 712 मीटर लेवल पर दाहिनी एबटमेंट की चट्टान में गैप मिला था। तुरंत काम रोककर मामला केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया। आयोग की टीम ने साइट का निरीक्षण कर जियोफिजिकल सर्वे के निर्देश दिए थे।
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बीबी पांडेय ने बताया कि केंद्रीय जल आयोग ने ट्रीटमेंट के लिए विस्तृत सुझाव दिए हैं। इसके तहत गैप वाले हिस्से में 1.5 मीटर से 2 मीटर की दूरी पर रॉक बोल्ट लगाए जा रहे हैं। कुल 60 से 70 रॉक बोल्ट 6 से 9 मीटर गहराई तक लगेंगे।
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रॉक बोल्ट के बाद प्रेशर ग्राउटिंग से सीमेंट घोल भरकर चट्टान की दरारों को सील किया जाएगा। ऊपर से शॉटक्रीट और कंक्रीट ब्लॉकों से सिलाई की जाएगी ताकि दोनों चट्टानें आपस में जुड़ जाएं। जरूरत पड़ने पर लोहे की सरिया और बीम से सपोर्ट दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आयोग के निर्देश पर ट्रीटमेंट का काम शुरू हो गया है। लेकिन जियोफिजिकल सर्वे की फाइनल रिपोर्ट अभी तक केंद्रीय जल आयोग से नहीं आई है।
ॉप्रारंभिक रिपोर्ट में गैप की पुष्टि हुई है, लेकिन यह गैप अंदर कितनी गहराई तक है, इसकी अंतिम पुष्टि फाइनल रिपोर्ट के बाद ही होगी।
पांडेय ने बताया कि ट्रीटमेंट में दो माह का समय लग सकता है। इस दौरान डायवर्जन टनल और अन्य एप्रोच वर्क जारी रहेंगे।