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कुमाऊं के आई बैंक को पहला कार्निया मिला
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हल्द्वानी। कुमाऊं के आई बैंक को शुक्रवार को पहला कार्निया मिला है। इस कार्निया को दो नेत्रहीन लोगों की आंखों में प्रत्यारोपित किया जाएगा जिससे वे दुनिया को देख सकेंगे। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कुमाऊं में लंबे समय से आई बैंक और नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू करने की मांग उठ रही थी। कुछ समय पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में आई बैंक स्थापित हुई है। शुक्रवार को पहला नेत्रदान होने के बाद आई बैंक को कार्निया मिला है। मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गोविंद सिंह तितियाल ने बताया कि लालडांठ निवासी तुलसी धानिक का नेत्रदान हुआ है। उनके निधन के बाद बाद चिकित्सकों की टीम ने नेत्रदान संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा कराया है।
डॉ. तितियाल ने बताया कि जल्द ही लोगों को नेत्र प्रत्यारोपित करने संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि यह एक बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए काफी समय से प्रयास किया जा रहा था। नेत्र प्रत्यारोपण होने से लोगों को रोशनी मिल सकेगी।
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नेत्रदान के साथ देहदान भी किया
हल्द्वानी। नेत्र बाधित बच्चों के नैब संस्था के संचालन से जुड़े लालडांठ निवासी श्याम धानक ने बताया कि उनकी माता तुलसी (निवासी ग्राम सभा बारोकोट जिला अल्मोड़ा) ने नेत्रदान और देहदान की इच्छा जताई थी। उनकी इसी इच्छा को पूरा किया गया। वह चाहती थीं कि उनके प्रयास से कुछ लोग दुनिया देख सकें। उन्होंने ग्राम प्रधान रहते हुए भी कई सामाजिक कार्य किए थे। उन्होंने कहा कि नेत्रदान के लिए जागरूकता उत्पन्न करने के साथ पहल करने की जरूरत है। (माई सिटी रिपोर्टर)
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कुमाऊं में लंबे समय से आई बैंक और नेत्र प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू करने की मांग उठ रही थी। कुछ समय पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में आई बैंक स्थापित हुई है। शुक्रवार को पहला नेत्रदान होने के बाद आई बैंक को कार्निया मिला है। मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गोविंद सिंह तितियाल ने बताया कि लालडांठ निवासी तुलसी धानिक का नेत्रदान हुआ है। उनके निधन के बाद बाद चिकित्सकों की टीम ने नेत्रदान संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा कराया है।
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डॉ. तितियाल ने बताया कि जल्द ही लोगों को नेत्र प्रत्यारोपित करने संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि यह एक बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए काफी समय से प्रयास किया जा रहा था। नेत्र प्रत्यारोपण होने से लोगों को रोशनी मिल सकेगी।
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नेत्रदान के साथ देहदान भी किया
हल्द्वानी। नेत्र बाधित बच्चों के नैब संस्था के संचालन से जुड़े लालडांठ निवासी श्याम धानक ने बताया कि उनकी माता तुलसी (निवासी ग्राम सभा बारोकोट जिला अल्मोड़ा) ने नेत्रदान और देहदान की इच्छा जताई थी। उनकी इसी इच्छा को पूरा किया गया। वह चाहती थीं कि उनके प्रयास से कुछ लोग दुनिया देख सकें। उन्होंने ग्राम प्रधान रहते हुए भी कई सामाजिक कार्य किए थे। उन्होंने कहा कि नेत्रदान के लिए जागरूकता उत्पन्न करने के साथ पहल करने की जरूरत है। (माई सिटी रिपोर्टर)