फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Multiple layers of security protect a PIN, yet fraudsters are still searching for a weak link

अदृश्य अपराध भाग-5: एक पिन के पीछे सुरक्षा की कई दीवारें, फिर भी ठग तलाश रहे कमजोर कड़ी

Sun, 27 Sep 2026 12:10 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी
संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी Published by: गायत्री जोशी Updated Sun, 27 Sep 2026 12:10 PM IST
सार

यूपीआई भुगतान में कई सुरक्षा व्यवस्थाएं होने के बावजूद साइबर ठग लोगों को निशाना बनाकर ठगी कर रहे हैं। जानें, यूपीआई भुगतान को सुरक्षित रखने के लिए कौन-कौन सी तकनीक काम करती हैं।

विज्ञापन
Multiple layers of security protect a PIN, yet fraudsters are still searching for a weak link
साइबर क्राइम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

यूपीआई से भुगतान महज पिन डालने की प्रक्रिया नहीं है। साइबर ठगी को रोकने के लिए मोबाइल डिवाइस से लेकर बैंक के सर्वर तक लेनदेन की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी इंतजाम किए गए हैं। डिवाइस बाइंडिंग, रिस्क मॉनिटरिंग और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान जैसी व्यवस्थाएं अनधिकृत लेनदेन को रोकने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद साइबर ठग तकनीकी सुरक्षा को सीधे तोड़ने के बजाय खाता धारक को निशाना बनाकर कमजोर कड़ी तलाशते हैं और वारदात को अंजाम देते हैं।

विज्ञापन

यूपीआई भुगतान की सुरक्षा में सबसे अहम स्तरों में से एक डिवाइस बाइंडिंग है। इसमें यूपीआई सेवा को खाताधारक के पंजीकृत मोबाइल नंबर और डिवाइस से जोड़ा जाता है। इससे किसी दूसरे डिवाइस से खाते का इस्तेमाल किए जाने पर खतरे की पहचान करना आसान होता है। भुगतान के दौरान बैंक और यूपीआई सिस्टम लेनदेन से जुड़े कई संकेतों की विस्तृत जानकारी जुटाते हैं और संदिग्ध गतिविधि मिलने पर अतिरिक्त जांच या रोक की कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ रिस्क मॉनिटरिंग सिस्टम सामान्य व्यवहार से अलग ट्रांजेक्शन पैटर्न पर नजर रखते हैं। अचानक बड़ी रकम का भुगतान, असामान्य गतिविधि या संदिग्ध परिस्थितियों में किए गए लेनदेन को जोखिम के नजरिये से देखा जा सकता है। रूटेड या कमजोर सुरक्षा वाले फोन और संदिग्ध ऐप साइबर धोखाधड़ी का खतरा बढ़ा सकते हैं।

विज्ञापन

ठग तलाश रहे कमजोर कड़ी

तकनीकी सुरक्षा की इन परतों के बावजूद ठग अक्सर सीधे सिस्टम को निशाना बनाने के बजाय लोगों को फोन कर ओटीपी या यूपीआई पिन हासिल करने, फर्जी क्यूआर कोड स्कैन कराने या स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल कराने की कोशिश करते हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षित सिस्टम भी खाताधारक की अनजाने में की गई कार्रवाई से प्रभावित हो सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

यह भी हैं सुरक्षा की दीवारें

रियल-टाइम रिस्क मॉनिटरिंग : भुगतान के दौरान सिस्टम लेनदेन के पैटर्न और अन्य जोखिम संकेतकों की लगातार निगरानी करता है। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर ट्रांजेक्शन को अतिरिक्त जांच के लिए चिन्हित किया जा सकता है।

रूटेड फोन और संदिग्ध ऐप की निगरानी : रूटेड डिवाइस या संदिग्ध ऐप मोबाइल की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं। ऐसे जोखिम वाले की पहचान कर भुगतान सुरक्षा को मजबूत करने के उपाय किए जाते हैं।

अतिरिक्त प्रमाणीकरण और बायोमेट्रिक विकल्प : कुछ परिस्थितियों में केवल पिन के अलावा अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत पड़ सकती है। उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार बायोमेट्रिक जैसे विकल्प भी सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत दे सकते हैं।

संदिग्ध गतिविधि पर रोक : जोखिम का स्तर अधिक पाए जाने पर भुगतान रोका, सीमित या अतिरिक्त सत्यापन के लिए भेजा जा सकता है। इसका उद्देश्य अनधिकृत लेनदेन होने से पहले संभावित धोखाधड़ी को रोकना है।

पासवर्ड बदलने पर भुगतान की सीमा कमः वर्तमान में कई बैंकों ने अपने आधिकारिक बैंकिंग एप में भुगतान को लेकर बड़ा बदलाव किया है। इसमें अगर साइबर ठग आपका मोबाइल हैक करते भी हैं और ठगी के लिए बैंकिंग एप का पासवर्ड बदलते हैं तो पासवर्ड बदलने के बाद वह पांच हजार रुपये तक का ही ट्रांजेक्शन कर सकता है।

साइबर ठगी को देखते हुए बैंकों ने टू लेयर वेरिफिकेशन पासवर्ड संशोधन और टू स्टेप लॉगिन जैसी सुविधाएं अपने अधिकारिक यूपीआई एप में की हैं। ताकि सुरक्षा और कड़ी हो सके।-नितिन लोहनी, साइबर एक्सपर्ट, (पुलिस क्षेत्राधिकारी)

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed