हर मोड़ पर हादसे का खतरा: टांडा रोड के 21 किमी हाईवे पर आठ अंधे मोड़, रात में एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं
टांडा रोड पर रामपुर रोड स्थित वन चेक पोस्ट से पंतनगर बाईपास तक करीब 21 किमी के स्टेट हाईवे पर आठ अंधे मोड़ हादसों का कारण बने हुए हैं। सड़क किनारे विज्ञापन के लिए एक दर्जन होर्डिंग खड़े हैं, लेकिन रात में राह दिखाने के लिए एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं है।
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हल्द्वानी शहर के टांडा रोड पर सफर करना खतरे से कम नहीं है। रामपुर रोड स्थित वन चेक पोस्ट से पंतनगर बाईपास तक करीब 21 किलोमीटर के स्टेट हाईवे पर आठ अंधे मोड़ हादसों को दावत दे रहे हैं। हैरानी यह है कि सड़क किनारे विज्ञापन के लिए एक दर्जन होर्डिंग तो खड़े हैं, लेकिन रात में राह दिखाने के लिए एक भी स्थान पर स्ट्रीट लाइट नहीं है। मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने जब इस रास्ते की पड़ताल की तब सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत सामने आई।
अंधे मोड़ों पर चेतावनी संकेतक, कैट आई, रिफ्लेक्टर और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होने चाहिए, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने मानो इस मार्ग को उसके हाल पर छोड़ दिया है। स्टेट हाईवे की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले विभाग की निगरानी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यातायात पुलिस की निगरानी भी नदारद नजर आती है। बिना हेलमेट, दोपहिया वाहनों का ओवरलोड होकर दौड़ना भी आम है। परिवहन विभाग की प्रवर्तन व्यवस्था भी ऐसे वाहन चालकों पर अंकुश लगाने में नाकाम दिखती है। जिला सड़क सुरक्षा समिति और प्रशासन की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
झाड़ियों में छिपे सुरक्षा के इंतजाम
हल्द्वानी से रुद्रपुर की तरफ जाते समय टांडा जंगल मार्ग पर कई ऐसे स्थान हैं जहां रेडियम लाइट पोल या तो टूट चुके हैं या फिर झाड़ियों में दब गए हैं। इसकी वजह से रात के अंधेरे में इनका सही इस्तेमाल नहीं हो पाता है। हालात यह हैं कि हाईवे के दोनों तरफ काफी नीचाई तक पेड़ों की शाखें सड़क की तरफ झुक चुकी हैं। इनकी वजह से भी अंधे मोड़ों पर रात के समय सामने से आने वाला वाहन जल्दी दिखाई नहीं देता।
न नेटवर्क न ही लगा है एसओएस बॉक्स
टांडा मार्ग स्टेट हाईवे होने के साथ-साथ हादसों का हॉट-स्पॉट बन गया है। सबसे परेशानी की बात यह भी है कि इस रास्ते पर करीब 25 किमी का हिस्सा नो नेटवर्क जोन है। ऐसी स्थिति के बावजूद यहां न आपातकालीन लैंडलाइन है और न ही एसओएस बॉक्स। हांलाकि स्टेट हाईवे के लिए यह अनिवार्य नहीं है लेकिन हादसों को देखते हुए राज्य सरकार इसके प्रयास कर सकती है। देश में राजस्थान और महाराष्ट्र के कई स्टेट हाईवे ऐसे हैं जहां स्थानीय सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से यह सुविधा दी है।
चौथी बार में लगी डायल 112 पर कॉल
जब पड़ताल के दौरान तथ्यों की पुष्टि के लिए डायल 112 पर कॉल की तब आपातकालीन नंबर पर कॉल ही नहीं लगी। चौथी बार में कॉल लगी भी लेकिन अधिक देर तक बातचीत नहीं हो पाई। ऐसी स्थिति में अगर कोई भी हादसा होता है तो घायल या अन्य कोई व्यक्ति मदद के लिए कैसे सूचना पुलिस तक पहुंचा पाएगा। इसकी वजह से घायलों के लिए जरूरी गोल्डन आवर भी मौत के समय में बदल जाते हैं।
वाहन चालक भी लापरवाह, हादसों को बुलावा
अमर उजाला की टीम जब पड़ताल के लिए पहुंची तब एक स्थान पर स्कूटी सवार दंपति छोटे बच्चे के साथ जाते दिखाई दिए। किसी ने भी हेलमेट नहीं लगाया था। वहीं एक बाइक पर तीन युवक बेतरतीब हेलमेट लगाए बाइक पर बड़े बॉक्स लादकर जाते दिखे। यही नहीं एक बाइक पर सवार दो लोगों ने हेलमेट तो पहना था लेकिन नाम के लिए। चालक के हेलमेट की स्ट्रिप नहीं लगी थी और पीछे बैठे व्यक्ति का हेलमेट बस सिर पर टिका हुआ था।
पैंचवर्क के बाद बजरी की सफाई तक नहीं
सोमवार को कालाढूंगी में एक हादसा हुआ। इसमें बाइक बजरी पर फिसलने की वजह से युवक की मौत हो गई थी। ऐसा ही दृश्य टांडा मार्ग पर भी दिखाई दिया। यहां जगह-जगह टीम को पैंचवर्क होता मिला। वहीं जहां यह कार्य हो चुका है उसके आसपास काफी बड़े हिस्से में बजरी सड़क पर फैली हुई मिली। ऐसे में कभी दो पहिया वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है।
विभाग जिम्मेदारी को तैयार नहीं
टांडा जंगल मार्ग ब्रिडकुल के अधीन है। अमर उजाला ने जब इस मार्ग पर सुरक्षा के अधूरे इंतजामों को लेकर ब्रिडकुल के प्रोजेक्ट प्रबंधक आकाश दीप भट्ट से बातचीत की तब उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि वह लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) को हैंडओवर कर चुके हैं। वहीं जब लोनिवि के अधिशासी अभियंता प्रत्यूष कुमार से सवाल किया गया तब उन्होंने भी जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया। कहा कि ब्रिडकुल ने केवल पत्राचार किया है, लेकिन सड़क अभी हैंडओवर नहीं हुई है। दोनों विभागों की इस आपसी तनातनी में आम जनता की जान दांव पर लगी है।
नहीं दिखती पुलिस, कैसे रुके ओवरस्पीडिंग
अब तक हुए हादसों में से अधिकतर मामलों में हादसों का कारण ओवरस्पीडिंग निकलकर सामने आया है। इसका भी प्रमुख कारण है कि इस पूरे रास्ते पर पुलिस और परिवहन की प्रवर्तन टीम का नदारद होना। मंगलवार को भी पड़ताल के दौरान हल्द्वानी की तरफ से जाते समय ही रास्ते में केवल एक ही स्थान पर परिवहन विभाग की इंटरसेप्टर वाहन खड़ा दिखाई दिया। इसके अलावा न पुलिस मिली और न ही सीपीयू।
सड़क मरम्मत से लेकर उसकी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने तक का काम अभी ब्रिडकुल के पास ही है। जल्द ही सुरक्षा इंतजाम पुख्ता कराए जाएंगे। प्राधिकरण से बातचीत कर एक-दो पुलिस चौकी भी शुरू कराने का प्रस्ताव रखा जाएगा ताकि लगातार निगरानी और चेकिंग हो। इससे ओवर स्पीडिंग पर भी नियंत्रण होगा और हादसों की रोकथाम में मदद मिलेगी। व्यवस्थाओं को जल्द पूरा कराया जाएगा। दीपक रावत, कुमाऊं कमिश्नर