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पकड़ने के दौरान बाघिन की मौत, अफसर बोले-आपसी संघर्ष में गई जान
Tue, 28 May 2019 02:15 AM IST
बृजमोहन बृजमोहन
रामनगर (नैनीताल)।
रामनगर (नैनीताल)।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Tue, 28 May 2019 02:15 AM IST
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प्रतीकात्मक
- फोटो : अमर उजाला
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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) ढेला रेंज के जंगल से भटकी बाघिन मनोरथपुर बासीटीला गांव में पकड़ तो ली गई मगर रेंज कार्यालय लाने पर उसने दम तोड़ दिया। वन विभाग के अधिकारी आपसी संघर्ष में घायल होकर जान जाने की आशंका व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि बाघिन काफी समय से बीमार थी और उसकी रीढ़ की हड्डी टूटी थी। पोस्टमार्टम के बाद उसके शव जला दिया गया।
मनोरथपुर बासीटीला में पिछले सप्ताह से बाघिन आने की सूचना थी। उसे 23 मई को सांवल्दे पुल पर भी देखा गया था। उसे पकड़ने के लिए वन विभाग ने संतोष सिंह के चरी के खेत में पिंजरा लगाया था। रविवार को दिनभर बाघिन वहीं रही लेकिन वह पिंजरे में नहीं गई। हाका लगाने के दौरान बिजरानी रेंज के रेंजर पर उसने हमला भी किया था। रातभर इंतजार के बाद भी जब बाघिन नहीं पकड़ी गई तो सोमवार दोपहर करीब 11 बजे जाल डालकर उसे पकड़ा गया। वनाधिकारियों ने पिंजरे में डालकर बाघिन को ढेला रेंज परिसर में पहुंचाया। दोपहर करीब 12 बजे उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम के दौरान उसकी रीढ़ की हड्डी टूटी मिली और उसकी पीठ पर दांत के गहरे निशान भी मिले। उसकी उम्र करीब चार वर्ष बताई जा रही है। घायल होने के बाद से उसने खाना छोड़ दिया था और गांव के पास खेतों में रह रही थी। सीटीआर के निदेशक संजीव चतुर्वेदी, एसडीओ कालागढ़ आरके तिवारी, ढेला रेंजर संदीप गिरी सहित कई वनाधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी ली। सीटीआर के निदेशक संजीव चतुर्वेदी के अनुसार आपसी संघर्ष में रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण बाघिन की मौत हुई है। घायल होने के कारण बाघिन भोजन नहीं कर पा रही थी।
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मनोरथपुर बासीटीला में पिछले सप्ताह से बाघिन आने की सूचना थी। उसे 23 मई को सांवल्दे पुल पर भी देखा गया था। उसे पकड़ने के लिए वन विभाग ने संतोष सिंह के चरी के खेत में पिंजरा लगाया था। रविवार को दिनभर बाघिन वहीं रही लेकिन वह पिंजरे में नहीं गई। हाका लगाने के दौरान बिजरानी रेंज के रेंजर पर उसने हमला भी किया था। रातभर इंतजार के बाद भी जब बाघिन नहीं पकड़ी गई तो सोमवार दोपहर करीब 11 बजे जाल डालकर उसे पकड़ा गया। वनाधिकारियों ने पिंजरे में डालकर बाघिन को ढेला रेंज परिसर में पहुंचाया। दोपहर करीब 12 बजे उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमार्टम के दौरान उसकी रीढ़ की हड्डी टूटी मिली और उसकी पीठ पर दांत के गहरे निशान भी मिले। उसकी उम्र करीब चार वर्ष बताई जा रही है। घायल होने के बाद से उसने खाना छोड़ दिया था और गांव के पास खेतों में रह रही थी। सीटीआर के निदेशक संजीव चतुर्वेदी, एसडीओ कालागढ़ आरके तिवारी, ढेला रेंजर संदीप गिरी सहित कई वनाधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनाक्रम की जानकारी ली। सीटीआर के निदेशक संजीव चतुर्वेदी के अनुसार आपसी संघर्ष में रीढ़ की हड्डी टूटने के कारण बाघिन की मौत हुई है। घायल होने के कारण बाघिन भोजन नहीं कर पा रही थी।
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