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डॉक्टरों में टकराव, मरीज हलकान
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।
Updated Tue, 09 Aug 2016 11:51 PM IST
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एसटीएच में दो विभागों के विभागाध्यक्षों की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय और जिलाधिकारी का फोन आने के बाद भी एक मरीज को राहत नहीं मिली। तीमारदार को मरीज को लेकर दूसरे अस्पताल जाना पड़ा। न्यूरो और ईएनटी में ऑपरेशन न होने के कारण प्राचार्य से लिखित शिकायत की गई है।
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न्यूरो विभाग में 26 जुलाई से सर्जरी नहीं हो रही है। लगभग पांच मरीज सर्जरी के इंतजार में हैं। जबकि अन्य विभागों में भी सर्जरी नहीं हो पा रही है। न्यूरो और ईएनटी विभाग के डॉक्टरों ने प्राचार्य से लिखित में शिकायत की है। शिकायत में कहा है कि एनस्थीसिया और सर्जरी विभाग से सर्जरी में सहयोग नहीं मिल रहा है।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग एक मरीज की ईएनटी की सर्जरी होनी थी। मरीज लगभग पांच दिन तक एसटीएच में भर्ती रहा मगर सर्जरी नहीं की गई। सर्जरी के लिए एनस्थीसिया विभाग की प्रमुख ने कहा कि डीएम कार्डियोलाजी की रिपोर्ट होनी चाहिए। जबकि 1996 से डॉ. अरुण जोशी ही कार्डियोलाजी की रिपोर्ट देते हैं। उनकी रिपोर्ट को मानने से इंकार कर दिया गया।
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मरीज के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय और जिलाधिकारी ने भी फोन किया मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। मरीज के तीमारदार ने आपरेशन के लिए अपनी सहमति भी दे दी थी मगर नतीजा सिफर ही रहा। परिजन मरीज को लेकर बरेली के राममूर्ति अस्पताल में चले गए।
न्यूरो विभाग मेें पांच दिनों से माधवी देवी (35) भर्ती है मगर आज तक उसकी भी सर्जरी नहीं हुई है। न्यूरो विभाग से पीजी जेआर भी वापस ले लिए गए हैं। सर्जरी विभाग में भी तीन ही पीजी डाक्टर हैं। पीजी डाक्टर न होने के कारण न्यूरो में सर्जरी नहीं हो पा रही है।
जबकि सर्जरी विभाग में भर्ती हो रहे मरीजों का आपरेशन हो रहा है। खास बात ये है कि न्यूरो विभाग में नान पीजी के छह डाक्टर दिए गए हैं। प्रशिक्षित होने तक ये डाक्टर कहीं और शिफ्ट हो जाते हैं।
ईएनटी और न्यूरो विभाग ने सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष और एनस्थीसिया विभाग से सहयोग न मिलने की शिकायत पर प्राचार्य डा. सीपी भैसोड़ा से की। डा. भैसोड़ा ने बताया कि बैठक के बाद सहमति बन गई है और इस सप्ताह से आपरेशन शुरू हो जाएंगे।