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डॉक्टर बना हैवान, मुश्किल में डाल दी जान
काशीपुर/ब्यूरो
Updated Wed, 13 Mar 2013 11:08 AM IST
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डॉक्टर को लोग भगवान मानते हैं। मरीज का सही इलाज हो जाए तो डॉक्टर भगवान से कम नहीं, लेकिन काशीपुर के एक निजी अस्पताल के डॉक्टर ने तो इसके उलट ही कर दिया। उसने मरीज को प्लाज्मा चढ़ाने के बजाय कुछ और ही द्रव्य चढ़ा दिया, जिससे उसकी जान पर बन आई। शिकायत पर चिकित्साधीक्षक ने डॉक्टर नोटिस भेज जांच बैठा दी है।
एलडी भट्ट राजकीय चिकित्सालय के चिकित्साधीक्षक डा. केके शर्मा ने बताया कि नैनीताल के ग्राम राजपुर हल्दुआ निवासी नसीब सिंह (82) को दमे की शिकायत पर उनका बेटा विक्रम सिंह जसपुर बस अड्डा स्थित एक निजी अस्पताल में ले गया। वहां के डॉक्टर ने उन्हें हृदय रोग से भी पीड़ित होने की बात कहकर रामनगर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में ले जाने को कहा। इस पर विक्रम सिंह ने पिता को रामनगर रोड स्थित अस्पताल में भर्ती करा दिया।
वहां डा. डीके सिंह ने मरीज को एक हफ्ते में शर्तिया ठीक करने का दावा किया। डाक्टर ने कहा कि मरीज को तीन यूनिट प्लाज्मा (ब्लड का कंपोनेंट) चढ़ाना पड़ेगा। विक्रम सिंह के प्लाज्मा का इंतजाम करने में असमर्थता जताने पर डा. डीके सिंह ने कहा कि यदि वह (विक्रम) प्रति यूनिट 3200 रुपया जमा कराएं तो वह प्लाज्मा का इंतजाम कर देगा। डाक्टर ने इसकी कोई रसीद भी विक्रम को नहीं दी। अगले दिन सुबह मरीज को दो यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया।
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विक्रम सिंह ने बताया कि प्लाज्मा चढ़ाते ही उसके पिता की हालत बिगड़ने लगी। इसका कारण पूछने पर जब उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उसे संदेह हुआ और वह प्लाज्मा के खाली रैपर को लेकर एक निजी ब्लड बैंक में गया। वहां उसे पता चला कि उसमें प्लाज्मा था ही नहीं। इसके बाद उसने मामले की शिकायत चिकित्साधीक्षक डा. केके शर्मा से की। डा. शर्मा ने चिकित्सक को नोटिस जारी कर दस दिन के अंदर अपनी डिग्री के प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेख पेश करने का आदेश जारी कर दिए।
निजी अस्पताल के चिकित्सक डा. डीके सिंह और अधीनस्थ कर्मचारी परवेज खान को नोटिस जारी किया गया है। 10 दिन के अंदर उन्हें स्वयं अपनी डिग्री और अभिलेख पेश करने होंगे। अन्यथा पुलिस बल के साथ अस्पताल सीज कर दिया जाएगा। इस बारे में एक साल पहले भी निरीक्षण के बाद नोटिस जारी किया गया था।- डा.केके शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक राजकीय चिकित्सालय।
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एलडी भट्ट राजकीय चिकित्सालय के चिकित्साधीक्षक डा. केके शर्मा ने बताया कि नैनीताल के ग्राम राजपुर हल्दुआ निवासी नसीब सिंह (82) को दमे की शिकायत पर उनका बेटा विक्रम सिंह जसपुर बस अड्डा स्थित एक निजी अस्पताल में ले गया। वहां के डॉक्टर ने उन्हें हृदय रोग से भी पीड़ित होने की बात कहकर रामनगर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में ले जाने को कहा। इस पर विक्रम सिंह ने पिता को रामनगर रोड स्थित अस्पताल में भर्ती करा दिया।
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वहां डा. डीके सिंह ने मरीज को एक हफ्ते में शर्तिया ठीक करने का दावा किया। डाक्टर ने कहा कि मरीज को तीन यूनिट प्लाज्मा (ब्लड का कंपोनेंट) चढ़ाना पड़ेगा। विक्रम सिंह के प्लाज्मा का इंतजाम करने में असमर्थता जताने पर डा. डीके सिंह ने कहा कि यदि वह (विक्रम) प्रति यूनिट 3200 रुपया जमा कराएं तो वह प्लाज्मा का इंतजाम कर देगा। डाक्टर ने इसकी कोई रसीद भी विक्रम को नहीं दी। अगले दिन सुबह मरीज को दो यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया।
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विक्रम सिंह ने बताया कि प्लाज्मा चढ़ाते ही उसके पिता की हालत बिगड़ने लगी। इसका कारण पूछने पर जब उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उसे संदेह हुआ और वह प्लाज्मा के खाली रैपर को लेकर एक निजी ब्लड बैंक में गया। वहां उसे पता चला कि उसमें प्लाज्मा था ही नहीं। इसके बाद उसने मामले की शिकायत चिकित्साधीक्षक डा. केके शर्मा से की। डा. शर्मा ने चिकित्सक को नोटिस जारी कर दस दिन के अंदर अपनी डिग्री के प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेख पेश करने का आदेश जारी कर दिए।
निजी अस्पताल के चिकित्सक डा. डीके सिंह और अधीनस्थ कर्मचारी परवेज खान को नोटिस जारी किया गया है। 10 दिन के अंदर उन्हें स्वयं अपनी डिग्री और अभिलेख पेश करने होंगे। अन्यथा पुलिस बल के साथ अस्पताल सीज कर दिया जाएगा। इस बारे में एक साल पहले भी निरीक्षण के बाद नोटिस जारी किया गया था।- डा.केके शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक राजकीय चिकित्सालय।