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खटारा वाहनों पर जीवन का बोझ
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।
Updated Thu, 30 Nov 2017 01:53 AM IST
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Punjab Ambulance
- फोटो : File Photo
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लोगों के जीवन की रक्षक के लिए शुरू की गई 108 सेवा बदहाली के दौर से गुजर रही है। खटारा वाहनों पर लोगों के जीवन का बोझ है। 139 गाड़ियों के बेड़े में 75 गाड़ियों की उम्र पूरी हो चुकी है और कभी भी कहीं भी खड़ी हो सकती है। 108 सेवा आए दिन खराब होने के कारण सर्विस सेंटरों पर नजर आती है।
वर्ष 2008 में 108 सेवा शुरू की गई थी। 108 सेवा का उद्देश्य ये था कि पहाड़ से बीमार मरीजों को या सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले मरीजों को जल्द से जल्द अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके। मंगलवार की रात रामपुर रोड पर सड़क दुर्घटना में दो लोग घायल हो गए।
घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 को फोन किया गया तो जवाब मिला कि हल्द्वानी की 108 खराब है और काठगोदाम वाली गाड़ी आने में कुछ समय लगेगा तब तक आप अपनी व्यवस्था कर लीजिए। घायलों को एक निजी वाहन से एसटीएच पहुंचाया गया था। 2008 में 90 गाड़ियां खरीदी गई थीं। जबकि 2010 में 18 और 2011 में 31 गाड़ियों की खरीद हुई थी।
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सूत्रों की मानें तो 139 गाड़ियों में 75 गाड़ियां खस्ताहाल हो चुकी हैं। इनमें से अधिकांश गाड़ियां तीन से पांच लाख किलोमीटर चल चुकी है। बेड़े में 61 नई गाड़ियां आनी है और ये कब तक हो पाएगा इसका इंतजार है। सूत्रों की मानें तो नई गाड़ियों की खरीद के लिए जो टेंडर हुए थे उसमें महज एक ही कंपनी आई थी।
हालांकि 108 ने अभी तक 12 लाख से अधिक लोगों को सेवाएं दी हैं। लगभग 04 लाख 72 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाया है। 9,900 से अधिक बच्चों का जन्म 108 वाहन में हुआ है। 01 लाख 24 हजार से अधिक सड़क दुर्घटना के मामले में घायलों को अस्पताल तक पहुंचाया है।
सवाल ये उठता है कि मरीजों के लिए इतनी कारगर 108 सेवा की बदहाल स्थिति को नजर अंदाज क्यों किया जा रहा है और पिछले चार माह से सिर्फ नए वाहन बेड़े आने की बात ही चल रही है। क्या जिम्मेदार लोगों को 108 सेवा की बदहाल स्थिति दिखाई नहीं दे रही है।
108 वाहनों की मरम्मत के लिए अच्छा खासा बजट दिया जाता है। काफी गाड़ियों के टायर बदले गए हैं। सरकार एवं विभाग का पूरा ध्यान 108 सेवाओं पर है। 61 नई गाड़ियां खरीदी जानी है और जेम पोर्टल के माध्यम से गाड़ियां खरीदने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। शासन से अनुमति मिलते ही गाड़ियों की खरीद हो जाएगी।
दो माह का वेतन आज मिला
108 सेवा में कार्यरत कर्मियों को दो माह से वेतन नहीं मिला था साथ ही पिछला एरियर भी बकाया था। वेतन न मिलने के कारण धीरे-धीरे कर्मियों में असंतोष पनप रहा था। 108 सेवा के राज्य प्रमुख मनीष टिंकू ने बताया कि बुधवार को 950 कर्मियों को दो माह का वेतन बांट दिया गया। सभी कर्मियों को पिछले छह माह का एरियर भी दिया गया है। बताया कि कर्मियों को वेतन एवं एरियर मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये बांटे गए हैं।
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वर्ष 2008 में 108 सेवा शुरू की गई थी। 108 सेवा का उद्देश्य ये था कि पहाड़ से बीमार मरीजों को या सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले मरीजों को जल्द से जल्द अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके। मंगलवार की रात रामपुर रोड पर सड़क दुर्घटना में दो लोग घायल हो गए।
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घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 को फोन किया गया तो जवाब मिला कि हल्द्वानी की 108 खराब है और काठगोदाम वाली गाड़ी आने में कुछ समय लगेगा तब तक आप अपनी व्यवस्था कर लीजिए। घायलों को एक निजी वाहन से एसटीएच पहुंचाया गया था। 2008 में 90 गाड़ियां खरीदी गई थीं। जबकि 2010 में 18 और 2011 में 31 गाड़ियों की खरीद हुई थी।
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सूत्रों की मानें तो 139 गाड़ियों में 75 गाड़ियां खस्ताहाल हो चुकी हैं। इनमें से अधिकांश गाड़ियां तीन से पांच लाख किलोमीटर चल चुकी है। बेड़े में 61 नई गाड़ियां आनी है और ये कब तक हो पाएगा इसका इंतजार है। सूत्रों की मानें तो नई गाड़ियों की खरीद के लिए जो टेंडर हुए थे उसमें महज एक ही कंपनी आई थी।
हालांकि 108 ने अभी तक 12 लाख से अधिक लोगों को सेवाएं दी हैं। लगभग 04 लाख 72 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाया है। 9,900 से अधिक बच्चों का जन्म 108 वाहन में हुआ है। 01 लाख 24 हजार से अधिक सड़क दुर्घटना के मामले में घायलों को अस्पताल तक पहुंचाया है।
सवाल ये उठता है कि मरीजों के लिए इतनी कारगर 108 सेवा की बदहाल स्थिति को नजर अंदाज क्यों किया जा रहा है और पिछले चार माह से सिर्फ नए वाहन बेड़े आने की बात ही चल रही है। क्या जिम्मेदार लोगों को 108 सेवा की बदहाल स्थिति दिखाई नहीं दे रही है।
108 वाहनों की मरम्मत के लिए अच्छा खासा बजट दिया जाता है। काफी गाड़ियों के टायर बदले गए हैं। सरकार एवं विभाग का पूरा ध्यान 108 सेवाओं पर है। 61 नई गाड़ियां खरीदी जानी है और जेम पोर्टल के माध्यम से गाड़ियां खरीदने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। शासन से अनुमति मिलते ही गाड़ियों की खरीद हो जाएगी।
दो माह का वेतन आज मिला
108 सेवा में कार्यरत कर्मियों को दो माह से वेतन नहीं मिला था साथ ही पिछला एरियर भी बकाया था। वेतन न मिलने के कारण धीरे-धीरे कर्मियों में असंतोष पनप रहा था। 108 सेवा के राज्य प्रमुख मनीष टिंकू ने बताया कि बुधवार को 950 कर्मियों को दो माह का वेतन बांट दिया गया। सभी कर्मियों को पिछले छह माह का एरियर भी दिया गया है। बताया कि कर्मियों को वेतन एवं एरियर मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये बांटे गए हैं।