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कुनबा विस्तार से ‘अपनों’ की गिनती
निशांत खनी हल्द्वानी।
Updated Tue, 09 Aug 2016 11:30 PM IST
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मिशन 2017 के लिए भाजपा का कुनबा कागजों में हर रोज बढ़ रहा है। भाजपा से कई प्रकोष्ठ और मोर्चे जुड़े हैं। आरएसएस और उसके सहयोगी संगठन अलग हैं। प्रकोष्ठों और मोर्चों में कार्यकारिणी विस्तार का सीजन शुरू हो गया है।
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विस्तार शहर और ब्लाक ही नहीं बल्कि बूथ इकाइयों तक पहुंच गया है। जंबोजेट कार्यकारिणी में एक-एक पदों पर ही कइयों की नियुक्ति हो रही है। भाजपा के अलावा बाकी दल भी अपना परिवार बढ़ाने में पीछे नहीं हैं।
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नैनीताल जिले की अधिकांश विधानसभा सीटों पर इस बार चुनाव रोचक होगा। भाजपा के लिहाज से ज्यादातर सीटों पर संभावित प्रत्याशियों की संख्या अधिक है। संभावित प्रत्याशी पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच जाने से ज्यादा वक्त खुद की दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं।
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प्रकोष्ठों की जंबोजेट कार्यकारिणी विस्तार भी संभावित दावेदारों की सिफारिश की ही कड़ी है। जिस दावेदार की संगठन, प्रकोष्ठ और विभागों में जितनी मजबूत पकड़ है उसके उतने अपनों को जगह मिल रही है। मोर्चों और प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी में जगह पाने वाले अधिकांश लोगों का कोई राजनीतिक आधार नहीं है।
कुछ लोग तो सिर्फ वाहनों के आगे नेम प्लेट लगा अपना रुतबा बढ़ाने के लिए पदाधिकारी बने हैं। भाजपा की तरह कांग्रेस और बाकी राजनीतिक दल भी अपने विभागों और प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी का विस्तार कर परिवार बढ़ा रहे हैं। इस होड़ में कालाढूंगी विकास मंच भी पीछे नहीं है।
कालाढूंगी विकास मंच शहर से गांव तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। कालाढूंगी सीट में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़े महेश शर्मा ने कांग्रेस से बगावत करने के बाद मंच का गठन किया है।
इतने हैं मोर्चा और प्रकोष्ठ
भाजपा के प्रमुख मोर्चों में महिला मोर्चा, अल्पसंख्यक मोर्चा, अनुसूचित मोर्चा, किसान मोर्चा और युवा मोर्चा शामिल हैं। इनकी जिला, नगर, मंडल, ब्लाक और बूथ स्तर पर इकाइयां हैं। मोर्चा के अलावा प्रशासन, विधि, गौ रक्षा और व्यापार समेत करीब 32 प्रकोष्ठ हैं।
आरएसएस और अखिल भारतीय परिषद, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल अलग से हैं। कांग्रेस की तुलना में भाजपा में उसके सहयोगी मोर्चों और प्रकोष्ठों की संख्या कहीं ज्यादा है।