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अंधेरे में डूबा विभाग, उजाला बेचने की तैयारी में

Sun, 10 Jul 2016 10:35 AM IST
धन सिंह बिष्ट  हल्द्वानी।
धन सिंह बिष्ट  हल्द्वानी। Updated Sun, 10 Jul 2016 10:35 AM IST
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Department shrouded in darkness, the light planning to sell
डाकघर - फोटो : अमर उजाला

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डाकघरों से भी जल्द ही एलईडी बल्ब मिलने की बात भले ही उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी वाली हो, लेकिन डाक विभाग का अंधेरा इससे दूर होने की उम्मीद नहीं है। हल्द्वानी का प्रधान डाकघर इस बात का प्रमाण दे रहा है। तीन माह से जनरेटर के खराब होने के कारण यहां पर काम बाधित होने से जहां उपभोक्ताओं की फजीहत हो रही है। वहीं, कर्मचारी भी गर्मी के साथ दोहरे काम का बोझ झेल रहे हैं, क्योंकि अक्सर दिन में लाइट जाने पर कर्मचारियों को रात में लाइट आने पर करीब आठ बजे तक दफ्तर में बैठकर काम निपटाना पड़ रहा है। 

जल्द ही डाकघरों में उपभोक्ताओं को सस्ते एलईडी बल्ब मिलने लगेंगे। पोस्टमास्टर जनरल कार्यालय (देहरादून) में कमेटी गठित की गई है, जिसने राज्य में 50 से अधिक डाकघरों में काउंटर बनाने का प्रस्ताव दिया है। लेकिन, हल्द्वानी के प्रधान डाकघर के कर्मचारियों को अंधेरे से कैसे उबारा जाए इसका हल विभागीय अधिकारियों के पास नहीं है। प्रधान डाकघर में जनरेटर के तीन माह से खराब होने के कारण कामकाज पूरी तरह बाधित है। उपभोक्ताओं को घंटों लंबी लाइन में लगने के बाद खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। शनिवार सुबह बिजली जाने के बाद महज डेढ़ घंटे ही उपभोक्ताओं का काम हो पाया। शाम तक बिजली नहीं आने पर पोस्टमास्टर यतिंद्र कुमार बमेठा ने चार सौ रुपये में किराये पर जनरेटर मंगाया। बमेठा के अनुसार जनरेटर तीन माह से खराब पड़ा है, उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत कराने के बाद भी समस्या का निदान नहीं हुआ। 
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कैंडल और टॉर्च के भरोसे कर्मचारी 
खराब पड़े जनरेटर के कारण बिजली जाने पर शाम होते ही कार्यालय के कमरों में अंधेरा भर जाता है। कार्यालय के एक कमरे से दूसरे कमरे में जाने या कोई पत्र खोजने में कर्मचारियों को कैंडल या मोबाइल टॉर्च का सहारा लेना पड़ रहा है। खास बात यह है कि सुबह नौ से पांच बजे की ड्यूटी का शेड्यूल अधिकांश सरकारी दफ्तरों में तय है। लेकिन, डाकघर में बिजली नहीं आने और जनरेटर के खराब होने के चलते कर्मचारियों को रोजाना का काम निपटाने के लिए कभी लाइट का इंतजार कर रात में काम निपटाना पड़ता है तो कभी कैंडल और टॉर्च की रोशनी में। कभी-कभी तो डाक कर्मी रविवार की छुट्टी में भी दफ्तर आकर काम निपटाते हैं। 
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