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Nainital News: डेसीबल मापक मीटर पकड़ेगा होटल-रिजॉर्ट का ध्वनि प्रदूषण

Fri, 13 Oct 2023 01:39 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Fri, 13 Oct 2023 01:39 AM IST
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Decibel measuring meter will detect noise pollution of hotel-resort
रामनगर पुलिस को मिला डेसीबल मापक मीटर
जीवन कुमार
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रामनगर (नैनीताल)। अक्सर होटल-रिजॉर्ट में डांस और नाइट पार्टी के दौरान ध्वनि प्रदूषण के दौरान आसपास रहने वाले लोगों को दिक्कतें झेलनी पड़ती है। अब पुलिस शिकायत के बिना भी कार्रवाई करेगी। पुलिस को ध्वनि प्रदूषण मापने के लिए डेसीबल मीटर मिल गया है। अत्यधिक शोर होने पर डेसीबल मीटर से ध्वनि प्रदूषण मापकर चालान की कार्रवाई करेगी।


पर्यटन नगरी होने से रामनगर में सालभर पर्यटकों की आवाजाही रहती है। जंगल सफारी के लिए आने वाले पर्यटक यहां मौजूद 250 से अधिक होटल-रिजॉर्ट में ठहरते हैं। होटल-रिजॉर्ट भी पर्यटकों के जश्न के लिए तमाम इंतजाम करते हैं। रिजर्व वन क्षेत्र में डीजे से लेकर अन्य साउंड सिस्टम बजाने में कई बार संचालक नियम-कानून भूल जाते हैं और इससे आम लोगों से लेकर वन्यजीवों की जिदंगी में खलल पड़ता है। अब नियम तोड़ने वाले संचालकों से पुलिस सख्ती से पेश आएगी और डेसीबल मापक मीटर से ध्वनि प्रदूषण को मापकर कार्रवाई करेगी।
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तेज आवाज में डीजे बजाने पर हंगामे की शिकायत आम

पर्यटन सीजन के दौरान होटल-रिजॉर्ट में डीजे की धुन पर देर रात तक कार्यक्रम चलते हैं। दो साल पहले हिम्मतपुर डोटियाल, टेड़ा स्थित रिजॉर्ट में रात के समय तेज आवाज में डीजे बजने को लेकर ग्रामीणों ने हंगामा भी किया था। इस पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर डीजे बंद कराया था। कोतवाल अरुण कुमार सैनी ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण को मापने वाला डेसीबल मीटर कोतवाली को मिल गया है। दीपावली से लेकर नए साल सहित अन्य आयोजनो में ध्वनि प्रदूषण मिलने पर मौके पर ही चालान की कार्रवाई की जाएगी।
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ये हैं ध्वनि प्रदूषण के मानक

क्षेत्र दिन के समय रात के समय


औद्योगिक क्षेत्र 75 डेसीबल 70 डेसीबल



वाणिज्य क्षेत्र 60 डेसीबल 55 डेसीबल



आवासीय क्षेत्र 55 डेसीबल 45 डेसीबल



शांत परिक्षेत्र 50 डेसीबल 40 डेसीबल



ध्वनि प्रदूषण के कारण तनाव से लेकर चिड़चिड़ापन
डॉक्टरों के मुताबिक ध्वनि प्रदूषण का लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। आमतौर पर लोगों के बीच संवाद 40-50 डेसीबल के बीच होता है। अगर कोई व्यक्ति 100 डेसीबल की आवाज को लगातार 15 मिनट तक सुन ले तो उसके सुनने की क्षमता छिन सकती है। ध्वनि प्रदूषण के कारण तनाव, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, और मांसपेशियों में जकड़न की समस्या होती है। शोर में अधिक देर तक रहने से बचना चाहिए।




दिन का शोर 45 डेसीबल से अधिक नहीं होना चाहिए

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार निंद्रावस्था में आसपास के वातावरण में 35 डेसीबल से ज्यादा शोर नहीं होना चाहिए और दिन का शोर भी 45 डेसीबल से अधिक नहीं होना चाहिए। शांत क्षेत्र में अस्पताल, शिक्षा संस्थान, न्यायालय आदि के चारों तरफ 100 मी. तक का क्षेत्र शामिल किया जाता है।

कोट

ध्वनि प्रदूषण मापक से रिजॉर्ट व होटल में होने वाले शोर को मापा जाएगा। यदि मानक से अधिक डेसीबल का ध्वनि प्रदूषण मिलता है तो मौके पर चालान किया जाएगा। बार-बार ऐसा करने वाले रिजॉर्ट व होटल पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

- प्रहलाद नारायण मीणा, एसएसपी, नैनीताल
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