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रिटायर्ड फौजी ने फांसी लगाकर जान दी
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Tue, 31 Mar 2015 01:55 AM IST
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नयीबस्ती काठगोदाम में रविवार रात रिटायर्ड फौजी ने फांसी लगाकर जान दे दी। घटना से पहले उसने पत्नी और बच्चों को सोते समय कमरे में बंद कर दिया था। सुबह दरवाजा नहीं खुलने पर पत्नी ने शोर मचाया तो पड़ोसियों ने दरवाजा खोला, तब जाकर घटना का पता चला। पुलिस के समक्ष फौजी के पिता ने बहू पर बेटे की हत्या करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। बताया कि पति और पत्नी के विवाद के चलते तीन साल पहले तलाक की नौबत आ गई थी।
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पनियाली निवासी महेश चंद्र (38) पुत्र बेनी प्रसाद ने सेना से पिछले साल स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया था। तीन साल पहले अपना पैतृक घर छोड़कर नयीबस्ती काठगोदाम में मकान बनाकर परिवार के साथ रहने लगे। रविवार रात पत्नी डॉली उर्फ तनूजा और दो बच्चे के कमरे की कुंडी बाहर से बंद कर रिटायर्ड फौजी ने दूसरे कमरे के छत की कुंडी में फंदा लगाकर फांसी लगा ली। सुबह दरवाजा नहीं खुलने पर पत्नी ने शोर मचाया तो पड़ोसियों ने दरवाजा खोला। पत्नी ने जब पति के कमरे में झांका तो वह फंदे पर झूल रहा था। पड़ोसियों की मदद से शव नीचे उतारा गया। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पत्नी ने बताया कि उसकी शादी 2005 में हुई थी। उसकी एक बेटी और एक बेटा है। परिवार के लोगों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। ससुराल के लोग उसे स्वीकार नहीं करते थे।
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पति के बड़े भाई सुरेश ने भी इसी प्रकार 2002 मेें जान दी थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद महेश के पिता बेनी प्रसाद बड़े भाई रमेश सहित काफी लोग मौके पर पहुंचे। महेश के पैरों में चप्पलें पड़ी थीं। पिता ने बहू पर हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। पिता का कहना है कि यदि बेटे ने आत्महत्या की होती तो पैर से चप्पलें बाहर निकल जातीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बेटे की हत्या की गई है। बताया कि झगड़े के चलते तीन साल पहले बेटे और बहू में तलाक तक की नौबत तक आ गई थी। समझौता होने पर दोनों साथ-साथ रहने लगे थे। पुलिस ने तहरीर लेने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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डीएससी में तीन अप्रैल को करना था ज्वाइन
महेश के पिता बेनी प्रसाद भी रिटायर्ड फौजी हैं। पिता ने बताया कि रात में बेटे ने उन्हें फोन किया था। बताया कि डाली के सिर में दर्द है। उसने दर्द दूर करने के लिए ब्रांडी के बारे में पूछा। पिता ने बताया कि वह ब्रांडी नहीं रखते हैं। बेटा महेश चंद्र नासिक (महाराष्ट्र) में 20 मार्च को इंटरव्यू देकर लौटा था। डीएससी में चयन होने के बाद तीन अप्रैल को उसे नौकरी ज्वाइन करनी थी। इस बीच सुबह अनहोनी घटना की सूचना मिल गई। इधर, लोगों का भी कहना है कि महेश आत्महत्या नहीं कर सकता। वह मिलनसार व्यक्ति था।