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सजायाफ्ता कैदी ने अस्पताल में दम तोड़ा
Updated Tue, 12 Dec 2017 02:28 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। सितारगंज जेल के सजायाफ्ता कैदी इल्मी की सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार को मौत हो गई। कैदी हत्या के मामले में करीब साढ़े 13 साल की सजा काट चुका था। कैदी का साथी अब भी जेल में बंद है। जेल प्रशासन का कहना है कि इल्मी हृदयरोग से पीड़ित था।
जेल प्रशासन के अनुसार ऊधमसिंह नगर जिले के गदरपुर महतोष निवासी मोहम्मद इल्मी (57) को हत्या के एक मामले में दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा हुई थी। छह दिसंबर को सीने में दर्द उठने पर कैदी को बंदीरक्षकों ने एसटीएच में भर्ती कराया। अस्पताल में उपचार के दौरान सोमवार को उसकी मौत हो गई। जेल अधीक्षक टीडी जोशी ने बताया कि कैदी इल्मी करीब साढ़े 13 साल की सजा काट चुका था। हृदयरोग से पीड़ित कैदी को पहले भी अस्पताल में इलाज कराया गया था लेकिन इल्मी पूरी तरह से ठीक नहीं हो सका। हत्या के मामले में इल्मी का साथी वकील अहमद अभी सितारगंज जेल में बंद हैं। परिजनों का कहना था कि इल्मी के पांच पुत्र हैं। घटना की सूचना मिलने पर आए पुत्र मोर्चरी में काफी गमगीन हो गए थे। दो डॉक्टरों ने वीडियो रिकार्डिंग के माध्यम से शव का पोस्टमार्टम किया।
गांव में 32 साल पहले चली थीं गोलियां
जेल अधीक्षक के पूछने पर हत्याभियुक्त वकील अहमद ने बताया कि उनके गांव के दो दबंग भाई आबिर और जाबिर हैं। 1985 में दोनों पक्षों के बीच गोलियां चलीं तो जाबिर की मौत हो गई और आबिर घायल हो गया था। इस मामले में उसके साथ इल्मी को धारा 307 और 302 के तहत गिरफ्तार किया गया था। दोनों को एक साथ अदालत से आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
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जेल प्रशासन के अनुसार ऊधमसिंह नगर जिले के गदरपुर महतोष निवासी मोहम्मद इल्मी (57) को हत्या के एक मामले में दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा हुई थी। छह दिसंबर को सीने में दर्द उठने पर कैदी को बंदीरक्षकों ने एसटीएच में भर्ती कराया। अस्पताल में उपचार के दौरान सोमवार को उसकी मौत हो गई। जेल अधीक्षक टीडी जोशी ने बताया कि कैदी इल्मी करीब साढ़े 13 साल की सजा काट चुका था। हृदयरोग से पीड़ित कैदी को पहले भी अस्पताल में इलाज कराया गया था लेकिन इल्मी पूरी तरह से ठीक नहीं हो सका। हत्या के मामले में इल्मी का साथी वकील अहमद अभी सितारगंज जेल में बंद हैं। परिजनों का कहना था कि इल्मी के पांच पुत्र हैं। घटना की सूचना मिलने पर आए पुत्र मोर्चरी में काफी गमगीन हो गए थे। दो डॉक्टरों ने वीडियो रिकार्डिंग के माध्यम से शव का पोस्टमार्टम किया।
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गांव में 32 साल पहले चली थीं गोलियां
जेल अधीक्षक के पूछने पर हत्याभियुक्त वकील अहमद ने बताया कि उनके गांव के दो दबंग भाई आबिर और जाबिर हैं। 1985 में दोनों पक्षों के बीच गोलियां चलीं तो जाबिर की मौत हो गई और आबिर घायल हो गया था। इस मामले में उसके साथ इल्मी को धारा 307 और 302 के तहत गिरफ्तार किया गया था। दोनों को एक साथ अदालत से आजीवन कारावास की सजा हुई थी।
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