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रुद्रपुर में ताबड़तोड घटनाएं पुलिस के लिए बनी चुनौती

Sat, 03 Jun 2017 06:11 PM IST
Updated Sat, 03 Jun 2017 06:11 PM IST
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रुद्रपुर में ताबड़तोड घटनाएं पुलिस के लिए बनी चुनौती
सूचनार्थ...
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रुद्रपुर में ताबड़तोड़ घटनाएं पुलिस के लिए बनी चुनौती
पुलिस का कमजोर होता मूवमेंट बढ़ा रहा है अपराधियों का हौसला
भास्कर पोखरियाल
रुद्रपुर। पिछले एक सप्ताह के भीतर जिस तरह से रुद्रपुर शहर में एकाएक आपराधिक घटनाएं घट रही हैं वह अब पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। सरेआम महिला को अगवा करना, लूटपाट, डकैती और बीच चौराहों पर तमंचे लहराते हुए लोगों को धमकाना और अब सरेआम हत्या के इरादे से ताबड़तोड़ फायरिंग करना यह सब पुलिस के समक्ष चुनौती बनती जा रही है। गौर करने वाली बात यह है कि शहर में पुलिस की हल्की पड़ती गश्त भी अपराधियों के हौसले बढ़ा रही है। वर्तमान में जो हालात रुद्रपुर शहर के बनते जा रहे हैं उससे साफ स्पष्ट है कि अपराधियों में पुलिस का खौफ पूरी तरह से खत्म हो गया है। अगर हालात यही रहे तो इस शहर में गैंगवार की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
शनिवार तड़के जिस तरह से 10-12 बदमाशों ने भदईपुरा क्षेत्र के वार्ड चार में एकाएक ताबड़तोड़ फायरिंग करके पूर्व सभासद को मौत के घाट उतारने का इरादा बनाया था उसमें भी अब लोग पुलिस पर भी सवाल उठा रहे हैं। इसमें बड़ी बात यह है कि पिछले डेढ़ साल के भीतर राजेश गंगवार पर तीन बार हमले हो चुके हैं जबकि एक हमला उसके भाई अन्नू पर भी इंदिरा कॉलोनी में स्थित सैलून में हुआ था। पुलिस अगर पहले ही हमले को गंभीरता से ले लेती तो इस तरह खुलेआम और बेखौफ होकर हथियारों का खेल शहर में नहीं खेला जा सकता था। अब जिस तरह के संकेत बन रहे हैं उससे रुद्रपुर में गैंगवार की प्रबल संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2014 में पूर्व सभासद राजेश गंगवार के इशारे पर उत्तराखंड हाइकोर्ट में एक व्यक्ति की ओर से सरकारी भूमि कब्जाने के मामले में याचिका डाली गई थी, जिसमें यह केस लगातार चलता रहा और वर्ष 2016 में जमीन का मामला हाइकोर्ट में वैध निकला और आरोप निराधार साबित हुए। यहीं से यह मामला रंजिश का रूप ले गया। अब रंजिश का यह सिलसिला अपने चरम पर पहुंच चुका है। पुरानी होती रंजिश से दोनों पक्ष एक दूसरे के खून के प्यासे होने लगे हैं। इस बात को भी शनिवार की सुबह की घटना ने स्पष्ट कर दिया है, इसलिए गैंगवार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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उधर सूत्रों का यह भी कहना है फिलहाल जिस तरह से राजेश गंगवार पर जानलेवा हमला हुआ है उसके बाद भी परिजनों की ओर से पुलिस में तहरीर भी नहीं दी गई है। इस बड़े घटनाक्रम को अब पुलिस को सुलझाना भी चुनौती है। चूंकि राजनीतिक संरक्षण गंगवार पर है तो हमलावरों पर भी राजनीतिक संरक्षण से इनकार नहीं किया जा सकता। उधर, इस मामले में एसएसपी डा. सदानंद दाते का कहना है कि रंजिश पुरानी चल रही है इसमें कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। एसएसपी का कहना है कि कानून व्यवस्था को पूरी तरह से मजबूत किया जा रहा है।
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-----इनसैट
तो एक व्यक्ति ने कर दिया है सरेंडर
रुद्रपुर। पूर्व सभासद पर हुए जानलेवा हमले के मामले में जहां पुलिस अपनी पड़ताल को कई बिंदुओं से कर रही है वहीं पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि इसमें एक व्यक्ति ने शाम चार बजे के करीब रुद्रपुर कोतवाली में सरेंडर कर दिया है। जबकि पुलिस अधिकारी अभी इस बात को नकार रहे हैं। वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि जिस व्यक्ति ने सरेंडर किया है उसके नाम की आईडी से फर्जी तरीके से गाड़ियां लोन पर निकाल रखी थीं। इसको लेकर भी रंजिश बढ़ती जा रही है।
--------इनसैट
भाजपा में शामिल होने का किया था प्रयास
रुद्रपुर। पूर्व सभासद राजेश गंगवार ने इस बार भाजपा में शामिल होने का भी मन बनाया था, लेकिन कुछ लोगों के पुरजोर विरोध के कारण मामला खटाई में पड़ गया। बताया जाता है कि 15 सालों में राजेश ने जो भी सभासद का चुनाव लड़ा और अपनी मा को भी नगर निगम का चुनाव लड़ाया वह हमेशा निर्दलीय ही लड़ता रहा और हर बार विजयी रहा। इस बार प्रदेश में जैसे ही भाजपा की सरकार आई तो होली से एक दिन पहले दूधिया बाबा मंदिर स्थित एक स्थल में भाजपा में शामिल होने का एक कार्यक्रम तय हो गया था, लेकिन जैसे ही गंगवार के विरोधियों को पता चला तो वहां मामला गर्मा गया और भारी हंगामे के बीच मामला वहीं ठप हो गया।



याद आया कोतवाल पाठक का कार्यकाल
रुद्रपुर। पिछले एक सप्ताह से रुद्रपुर शहर में जिस तरह से अपराध बढ़ता जा रहा है उसके पीछे ढीली पड़ती पुलिस गश्त भी कम जिम्मेदार नहीं है। शहर के लोगों का कहना है कि रुद्रपुर कोतवाली में 22 माह तक तत्कालीन कोतवाल रहे जेसी पाठक के कार्यकाल में कोई हत्या, गैंगवार, लूटपाट जैसी घटनाएं नहीं हुईं। हालांकि उस दौरान कई बार असामाजिक तत्वों ने शहर का माहौल खराब करने की कोशिश तो जरूर की, लेकिन पाठक की मजबूत कार्यशैली और दिनरात की गश्त का ही परिणाम रहा कि 22 महीने के कार्यकाल में कोई हत्या और जघन्य अपराध रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र में नहीं हुआ। शहर के इंदिरा चौक से लेकर मुख्य मार्गों पर घंटों उनकी तैनाती से छोटे से लेकर बड़ा अपराधी भी खौफ खाता था। पाठक का कड़क अंदाज आज शहर के लोगों को याद आ रहा है। लोगों का कहना है कि पुलिस की कड़क सख्ती और तेज गश्त से ही अपराधों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। बता दें कि जेसी पाठक का बतौर रुद्रपुर कोतवाल का कार्यकाल दिसंबर 2014 से मार्च 2016 और फिर जुलाई 2016 से दिसंबर 16 तक रहा है। ब्यूरो


फोटो : 03आरडीपी04पी। रुद्रपुर के अस्पताल में आपरेशन थियेटर के बाहर तैनात पुलिस बल।
05पी। रुद्रपुर के घटना स्थल भदईपुरा में तैनात पुलिस टीम।
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