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डंपर ने बुजुर्ग को रौंदा मौत

Fri, 06 Apr 2018 01:32 AM IST
Updated Fri, 06 Apr 2018 01:32 AM IST
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डंपर ने बुजुर्ग को रौंदा मौत
हल्द्वानी। गौलापार सुलतान नगरी रोड पर तेज रफ्तार डंपर ने बुधवार की सुबह रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी हीरालाल को कुचल दिया। मुखानी चौराहा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल वालों ने मानवता को दरकिनार कर शव उठाने से पहले इलाज के 70 हजार रुपये जमा करने को कहा। हंगामा होने पर सिटी मजिस्ट्रेट के हस्तक्षेप से इलाज के 20 हजार जमा कराने पर शव मिल पाया। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने पैसे के लिए शव रोके जाने के आरोप को निराधार बताया है।
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बरेली (उप्र) जिले के देवरनियां निवासी 67 वर्षीय हीरालाल बुधवार की सुबह सड़क पर टहल रहे थे। तेज रफ्तार डंपर ने उन्हें रौंद दिया। परिजन पहले उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल ले गए। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें मुखानी चौराहा स्थित सांई अस्पताल में भर्ती कराया। बृहस्पतिवार की सुबह उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल वालों ने शव लेकर जाने से पहले 70 हजार रुपये का बिल रख दिया। हीरालाल के इकलौते बेटे गोविंद ने मजबूरी बताई। जब अस्पताल वाले नहीं माने तो उसने हंगामा कर दिया। इस बीच चेष्टा विकास केंद्र की अध्यक्ष माला देवी की अगुवाई में महिलाएं परिजनों को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय के पास पहुंचीं। सिटी मजिस्ट्रेट के हस्तक्षेप से अस्पताल प्रशासन ने खर्च घटाकर 20 हजार कर दिया। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि अर्जुन सिंह बिष्ट ने भी अस्पताल प्रशासन से शव लेने के लिए बातचीत की।
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परिजनों का आरोप, 70 हजार के लिए रोका शव
20 हजार दिए तब जाकर पसीजे धरती के भगवान

हादसे की नहीं थी पुलिस को जानकारी
काठगोदाम थानाध्यक्ष कमाल हसन ने बताया कि पुलिस को हादसे की जानकारी नहीं दी गई थी। परिजनों का कहना था कि घटना के बाद वे शव लेकर अस्पताल से चले आए। पुलिस को सूचना देने का अवसर ही नहीं मिल सका। पुलिस डंपर चालक की तलाश कर रही है।
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‘आरोप निराधार, अस्पताल प्रशासन ने दीं 20 हजार की दवाइयां’
दिल्ली से लौटने के बाद मैंने हीरालाल का रातभर इलाज किया। सुबह उनकी मौत हो गई। भर्ती के समय भी मरीज के परिजनों से पैसा नहीं लिया। सुबह पता चला कि परिजनों के साथ भीड़ आ गई है। मरीज के इलाज में 20 हजार की दवाइयां अस्पताल प्रशासन ने दी। शव उठाने के पैसे नहीं मांगे गए। सुबह किसी ने बात भी नहीं की। कुछ लोगों ने अफवाह फैला दी कि शव रोका गया है।
-डॉ. मोहन सती, प्रबंध निदेशक साईं अस्पताल
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