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आपरेशन रैकी में आज के दिन शहीद हुए थे पंत
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हल्द्वानी। सेना में तैनात पवन कुमार पंत की शादी के लिए 21 अप्रैल को माता-पिता जन्म कुंडली का मिलान करा रहे थे। इसी दिन हेलीकॉप्टर क्रैश होने से अपने अधिकारियों के साथ पवन शहीद हो गए। उनके पिता पवन की हस्तलेख को बार-बार निहारते हैं और कहते है कि उनके बेटे की लेख बहुत अच्छी थी।
अल्मोड़ा जिले के पनियाली पिलखोली रानीखेत निवासी पवन कुमार पुत्र कैलाश चंद्र पंत तीन भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर के थे। पवन की प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर रानीखेत में हुई। विवेकानंद विद्या मंदिर से 10वीं की परीक्षा और नेशनल इंटर कॉलेज रानीखेत से 12वीं उत्तीर्ण किया। हमेशा क्लास में अव्वल रहने वाले पवन सिविल एवियेशन में जाना चाहते थे लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण रानीखेत में ही बीएससी में प्रवेश ले लिया लेकिन पहली बार में ही उनका चयन सेना के लिए हो गया। ईएमई सेंटर सिकंदराबाद भेजा गया। प्रशिक्षण के दौरान पवन को हेलीकॉप्टर एयरो इंजन का ट्रेड दिया गया। पवन ने अपने ट्रेड में महारत हासिल कर ली। सेना के हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने से पहले वे सभी प्रकार का निरीक्षण करते थे। पवन अक्सर सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हेलीकॉप्टर से ही उड़ान भी भरते थे। सात फरवरी 2011 को उनके बड़े भाई की शादी थी। उस समय अवकाश पर घर आए थे। सेना के बुलावे पर ऑपरेशन रेकी में शामिल होने के लिए ड्यूटी पर जाना पड़ा। 21 अप्रैल 2011 को ऑपरेशन रेकी के दौरान उनका विमान क्रैश हो गया और उसमें सवार सभी अधिकारी और सैनिक शहीद हो गए। वर्तमान समय में शहीद का परिवार नरसिंह तल्ला, कमलुवागांजा में रहता है। पिता को गर्व है कि उनका पुत्र देश सेवा के लिए कुर्बान हो गया।
ऑपरेशन रेकी में आज के दिन शहीद हुए थे पवन पंत
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अल्मोड़ा जिले के पनियाली पिलखोली रानीखेत निवासी पवन कुमार पुत्र कैलाश चंद्र पंत तीन भाइयों और एक बहन में दूसरे नंबर के थे। पवन की प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर रानीखेत में हुई। विवेकानंद विद्या मंदिर से 10वीं की परीक्षा और नेशनल इंटर कॉलेज रानीखेत से 12वीं उत्तीर्ण किया। हमेशा क्लास में अव्वल रहने वाले पवन सिविल एवियेशन में जाना चाहते थे लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण रानीखेत में ही बीएससी में प्रवेश ले लिया लेकिन पहली बार में ही उनका चयन सेना के लिए हो गया। ईएमई सेंटर सिकंदराबाद भेजा गया। प्रशिक्षण के दौरान पवन को हेलीकॉप्टर एयरो इंजन का ट्रेड दिया गया। पवन ने अपने ट्रेड में महारत हासिल कर ली। सेना के हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने से पहले वे सभी प्रकार का निरीक्षण करते थे। पवन अक्सर सेना और वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हेलीकॉप्टर से ही उड़ान भी भरते थे। सात फरवरी 2011 को उनके बड़े भाई की शादी थी। उस समय अवकाश पर घर आए थे। सेना के बुलावे पर ऑपरेशन रेकी में शामिल होने के लिए ड्यूटी पर जाना पड़ा। 21 अप्रैल 2011 को ऑपरेशन रेकी के दौरान उनका विमान क्रैश हो गया और उसमें सवार सभी अधिकारी और सैनिक शहीद हो गए। वर्तमान समय में शहीद का परिवार नरसिंह तल्ला, कमलुवागांजा में रहता है। पिता को गर्व है कि उनका पुत्र देश सेवा के लिए कुर्बान हो गया।
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ऑपरेशन रेकी में आज के दिन शहीद हुए थे पवन पंत