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Uk: लैब तकनीशियनों को संशोधित वेतनमान देने का दिया आदेश, कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर अपील को खारिज किया

Tue, 05 May 2026 01:00 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Tue, 05 May 2026 01:00 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर लैब तकनीशियनों को 2010 से संशोधित वेतनमान देने के आदेश को बरकरार रखा।

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Court orders revised pay scale for lab technicians
नैनीताल हाईकोर्ट।

विस्तार

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के लैब तकनीशियनों को वर्ष 2010 से संशोधित वेतनमान देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दायर स्पेशल अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि लैब तकनीशियन भी उसी वेतनमान के हकदार हैं, जो डेंटल हाईजीनिस्ट और एक्स-रे तकनीशियनों को दिया जा रहा है।मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार माधव प्रसाद डोभाल व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 17 दिसंबर 2015 के सरकारी आदेश को चुनौती दी थी।

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याचिकाकर्ताओं का कहना था समान शैक्षणिक योग्यता और कार्य की प्रकृति के बावजूद उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ रहा था। पूर्व में एकलपीठ ने उनके पक्ष में निर्णय दिया था। याचिका में कहा था कि 5वें और 6वें वेतन आयोग के दौरान लैब तकनीशियनों और एक्स-रे तकनीशियनों का वेतनमान समान था, जबकि डेंटल हाईजीनिस्ट उनसे कम वेतन पा रहे थे। हालांकि, 15 अप्रैल 2010 से डेंटल हाईजीनिस्ट और बाद में 1 सितंबर 2010 से एक्स-रे तकनीशियनों का वेतनमान बढ़ाकर 9300-34800 (ग्रेड पे 4200) कर दिया गया लेकिन लैब तकनीशियनों को इससे वंचित रखा गया।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि वित्त विभाग की आपत्तियों के कारण वेतन समानता स्थापित नहीं की जा सकी थी। सरकार का कहना था कि कई लैब तकनीशियनों ने वर्ष 2015 से लाभ लेने के लिए शपथ पत्र दिया था, इसलिए पुरानी तिथि से लाभ देना उचित नहीं होगा।

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कोर्ट ने अपने निर्णय में टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल वित्त विभाग की मौखिक आपत्ति वेतन वृद्धि रोकने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने पाया कि जब कार्य की प्रकृति और पूर्व का वेतनमान समान था, तो अचानक लैब तकनीशियनों को पीछे छोड़ना तर्कहीन और मनमाना कदम था।

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