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सहकारिता चुनाव अधिकरण के आदेश पर रोक
अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल
Updated Tue, 17 May 2016 12:23 AM IST
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हाईकोर्ट ने सहकारिता चुनाव अधिकरण के आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें सहकारिता चुनाव अधिकरण ने तीन वर्ष पूर्ण होने पर याचिकाकर्ता की सदस्यता को समाप्त कर दिया था।
न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हल्द्वानी निवासी हरीश चंद्र सिंह रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सहकारिता चुनाव अधिकरण की ओर से 16 अप्रैल 2016 को जारी आदेश को चुनौती दी थी। याचिका में कहा कि इस आदेश के तहत कहा गया था कि सहकारिता चुनाव अधिकरण के अध्यक्ष व दोनों सदस्यों का अधिकरण में सेवा काल तीन वर्ष नियत था जो पूरा हो चुका है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार ने इस संबंध में कभी कोई अधिसूचना जारी नहीं की। जिसके द्वारा सहकारिता चुनाव अधिकरण के अध्यक्ष व सदस्यों का सेवाकाल तीन वर्ष नियत की गई हो। याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार व अधिकरण के अधिवक्ता की ओर से कहा कि जिस प्रस्ताव के अनुमोदन पर अधिकरण का गठन हुआ एवं अध्यक्ष तथा सचिव की नियुक्ति हुई उसी प्रस्ताव में कार्यकाल भी तीन वर्ष तय था। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अधिकरण के आदेश पर रोक लगा दी।
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न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हल्द्वानी निवासी हरीश चंद्र सिंह रावत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सहकारिता चुनाव अधिकरण की ओर से 16 अप्रैल 2016 को जारी आदेश को चुनौती दी थी। याचिका में कहा कि इस आदेश के तहत कहा गया था कि सहकारिता चुनाव अधिकरण के अध्यक्ष व दोनों सदस्यों का अधिकरण में सेवा काल तीन वर्ष नियत था जो पूरा हो चुका है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार ने इस संबंध में कभी कोई अधिसूचना जारी नहीं की। जिसके द्वारा सहकारिता चुनाव अधिकरण के अध्यक्ष व सदस्यों का सेवाकाल तीन वर्ष नियत की गई हो। याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार व अधिकरण के अधिवक्ता की ओर से कहा कि जिस प्रस्ताव के अनुमोदन पर अधिकरण का गठन हुआ एवं अध्यक्ष तथा सचिव की नियुक्ति हुई उसी प्रस्ताव में कार्यकाल भी तीन वर्ष तय था। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अधिकरण के आदेश पर रोक लगा दी।
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