{"_id":"df3d4145e624b86a9a0ba1f9147a238a","slug":"considered-corporation-personnel-continue-strike-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहीं माने निगम कर्मी, हड़ताल जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहीं माने निगम कर्मी, हड़ताल जारी
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी
Updated Tue, 03 Mar 2015 01:50 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर निगम में दिन भर वार्ता के जरिए हड़ताली कर्मियों को मनाने की कोशिश चलती रही, लेकिन वार्ता बेनतीजा रही। मंगलवार को फिर हड़ताली कर्मियों को वार्ता के लिए नगर निगम प्रबंधन ने बुलाया है। इससे पहले हड़ताली कर्मियों ने नगर निगम कार्यालय में धरना भी दिया।
विज्ञापन
नगर निगम में सफाई कर्मचारी संविदा कर्मियों को नियमित करने समेत छह सूत्रीय मांगों को लेकर कई दिनों से हड़ताल पर हैं। इस कारण शहर की सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। कर्मचारियों से वार्ता के जरिए हल निकालने के लिए मेयर डा. जोगेंद्र रौतेला, मुख्य नगर अधिकारी आरडी पालीवाल और हड़ताली कर्मियों के साथ त्रिपक्षीय बातचीत शुरू हुई। पहले अध्यक्ष राहत मसीह के नेतृत्व में सफाई कर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल मिला। निगम प्रबंधन ने कर्मियों को स्थायी करने के लिए अधिकारियों की एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा। सिटी मजिस्ट्रेट के अनुसार यह कमेटी ही कर्मियों के स्थायी करने के लिए काम करेगी। इस कमेटी के प्रस्ताव पर मुहर लगाने के लिए जिला अधिकारी के पास मंगलवार को प्रपत्र भेजा जाएगा। लेकिन, कर्मचारी नहीं माने।
विज्ञापन
इसके बाद नगर निकाय कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष डीएल साह, मंत्री नरेंद्र परमार, गणेश रावत, हरीश रावत, हरीश राणा आदि का एक प्रतिनिधि मंडल 14 सूत्रीय मांगों को लेकर निगम प्रबंधन से मिला। उन्होंने कर्मचारियों के आठ माह से पीएफ न जमा करने, सात प्रतिशत महंगाई भत्ते की अवशेष राशि का भुगतान नहीं होने, नियमित वेतन न मिलने समेत कई समस्याओं और मांगों को रखा। इस पर निगम प्रबंधन का कहना था कि प्रकरण वित्त से जुड़े हैं, जिसका समुचित हल शासन के माध्यम से हो सकता है। इसके लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। इस पर कर्मचारी नहीं माने और हड़ताल पर डटे रहे। मेयर डा. रौतेला का कहना है कि जो बजट मिलता है, उसमें हर महीने कम से कम 50 लाख की और जरूरत है। तभी सही तरीके से विकास कार्य हो सकते हैं और कर्मियों का वेतन दिया जा सकता है। वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए शासन स्तर से कोशिश की जा रही है।
विज्ञापन