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कांग्रेस ने गरज कर दिया शाह को जवाब
सुधाकर भट्ट
Updated Mon, 19 Dec 2016 01:58 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लोकार्पण के बहाने रविवार को कांग्रेस ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की दहाड़ का जवाब गरज कर दिया। सरकारी कार्यक्रम और चुनावी सभा की खिचड़ी पकाते हुए इस शो के लिए खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मोर्चा संभाला। मंच के साथ ही चुनावी मुद्दों पर रावत की बारीक निगाह रही। भीड़ का मिजाज भांपते और मंत्रियों की पीठ थपथपाते हुए रावत ने लगे हाथों कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी में कांग्रेस का चुनावी बिगुल भी फूंक दिया।
सात दिसंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हल्द्वानी से ही भाजपा की चुनावी मुहिम का शंखनाद किया था। इसका जवाब देने की कसमसाहट कांग्रेस में शायद मौजूद थी। रविवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लोकार्पण समारोह के बहाने कांग्रेस को यह मौका मिल भी गया। सरकारी कार्यक्रम और चुनावी सभा के घालमेल का ही सबब था कि 15.2 एकड़ में फैले स्टेडियम में कांग्रेस के झंडे ही झंडे लहरा रहे थे। कुछ स्टेडियम का आकर्षण और कुछ कांग्रेस के मंत्रियों और अन्य नेताओं की मेहनत का नतीजा रहा कि लोकार्पण कार्यक्रम में लोग खासी संख्या में जुटे। रावत ने इसका भरपूर फायदा उठाया और लोगों को कांग्रेस सरकार के पिछले तीन साल के काम गिनाते हुए वोट मांगे। रावत ने अपने गृह क्षेत्र अल्मोड़ा को भी याद किया।
मोदी को दिल्ली वाले बाबा बताते हुए रावत ने अमित शाह समेत अन्य केंद्रीय मंत्रियों को पहलवान बताया और नोटबंदी का नुकसान गिनाने से नहीं चूके। वोट के लिए लाइन में खुद भी लगे होने की बात करते हुए रावत की मंच पर भी बारीक निगाह रही। इंदिरा हृदयेश के लिए उन्होंने कहा कि हल्द्वानी की हर गली को इन्होंने संवार दिया। श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल को मंच पर खुद ही बोलने के लिए आमंत्रित किया। इस बात का भी ध्यान रखा कि उनके बोलने से पहले पंचायत मंत्री प्रीतम सिंह बोल लें। वन मंत्री दिनेश अग्रवाल को मंच संचालन का जिम्मा सौंपा और राजस्व मंत्री यशपाल आर्य को रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के बहाने याद किया।
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भीड़ के लिहाज से भी कांग्रेस का यह कार्यक्रम उसकी सतत विकास संकल्प यात्रा की रैलियों से बेहतर दिखा तो कांग्रेस नेताओं के मतभेद भी दब गए। काशीपुर रैली में रूठ गए राजस्व मंत्री यशपाल आर्य बिना किसी हील हुज्जत के माइक संभालते हुए नजर आए। स्थानीय विधायक इंदिरा हृदयेश भी यह बताने से नहीं चूकीं कि दमुवाढूंगा से 20 बसों में भर कर लोग आए हैं। हरीश चंद्र दुर्गापाल एक बार फिर साबित कर गए कि कांग्रेस के पाले में उनका जाना करीब-करीब तय है। तिलक राज बेहड़ और अन्य नेताओं की उपस्थिति यह जताने के लिए रही कि यह शो सिर्फ हल्द्वानी का नहीं, बल्कि तराई का भी है।
सात दिसंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हल्द्वानी से ही भाजपा की चुनावी मुहिम का शंखनाद किया था। इसका जवाब देने की कसमसाहट कांग्रेस में शायद मौजूद थी। रविवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के लोकार्पण समारोह के बहाने कांग्रेस को यह मौका मिल भी गया। सरकारी कार्यक्रम और चुनावी सभा के घालमेल का ही सबब था कि 15.2 एकड़ में फैले स्टेडियम में कांग्रेस के झंडे ही झंडे लहरा रहे थे। कुछ स्टेडियम का आकर्षण और कुछ कांग्रेस के मंत्रियों और अन्य नेताओं की मेहनत का नतीजा रहा कि लोकार्पण कार्यक्रम में लोग खासी संख्या में जुटे। रावत ने इसका भरपूर फायदा उठाया और लोगों को कांग्रेस सरकार के पिछले तीन साल के काम गिनाते हुए वोट मांगे। रावत ने अपने गृह क्षेत्र अल्मोड़ा को भी याद किया।
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मोदी को दिल्ली वाले बाबा बताते हुए रावत ने अमित शाह समेत अन्य केंद्रीय मंत्रियों को पहलवान बताया और नोटबंदी का नुकसान गिनाने से नहीं चूके। वोट के लिए लाइन में खुद भी लगे होने की बात करते हुए रावत की मंच पर भी बारीक निगाह रही। इंदिरा हृदयेश के लिए उन्होंने कहा कि हल्द्वानी की हर गली को इन्होंने संवार दिया। श्रम मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल को मंच पर खुद ही बोलने के लिए आमंत्रित किया। इस बात का भी ध्यान रखा कि उनके बोलने से पहले पंचायत मंत्री प्रीतम सिंह बोल लें। वन मंत्री दिनेश अग्रवाल को मंच संचालन का जिम्मा सौंपा और राजस्व मंत्री यशपाल आर्य को रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के बहाने याद किया।
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भीड़ के लिहाज से भी कांग्रेस का यह कार्यक्रम उसकी सतत विकास संकल्प यात्रा की रैलियों से बेहतर दिखा तो कांग्रेस नेताओं के मतभेद भी दब गए। काशीपुर रैली में रूठ गए राजस्व मंत्री यशपाल आर्य बिना किसी हील हुज्जत के माइक संभालते हुए नजर आए। स्थानीय विधायक इंदिरा हृदयेश भी यह बताने से नहीं चूकीं कि दमुवाढूंगा से 20 बसों में भर कर लोग आए हैं। हरीश चंद्र दुर्गापाल एक बार फिर साबित कर गए कि कांग्रेस के पाले में उनका जाना करीब-करीब तय है। तिलक राज बेहड़ और अन्य नेताओं की उपस्थिति यह जताने के लिए रही कि यह शो सिर्फ हल्द्वानी का नहीं, बल्कि तराई का भी है।