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UK: मोबाइल की चमक में डगमगा रहे हैं रिश्ते...कोई पति के फोन से चिपके रहने से परेशान; किसी को नहीं मिलता खर्चा

Sat, 29 Nov 2025 01:39 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी Published by: हीरा मेहरा Updated Sat, 29 Nov 2025 01:39 PM IST
सार

पारिवारिक रिश्ते में तेजी से खटास आ रही है। पहले छोटे-झगड़े अब गहरे मनभेदों में बदल रहे हैं और महिला सेल तक पहुंच रहे हैं। इन समस्याओं के प्रमुख कारण हैं - मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग, बच्चों की परवरिश और खर्चों को लेकर तकरार शामिल हैं।

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Cases of disputes between husband and wife are coming to the women cell every month in haldwani
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

मोबाइल की चमक, मन के मतभेद और जिम्मेदारियों के भारीपन के बीच अब घरों की चौखट पर रिश्तों का संतुलन डगमगाने लगा है। कभी छोटी-छोटी नोकझोंक तक सीमित रहने वाले झगड़े अब मनभेद में बदलकर महिला सेल तक पहुंच रहे हैं। कहीं बच्चे संभालने पर तकरार है, कहीं खर्चे पर अविश्वास तो कहीं मोबाइल की दुनिया ने दांपत्य जीवन से दूरी बढ़ा दी है। शिकायतें भले ही अलग-अलग हैं लेकिन इनके कारण पति-पत्नी के बीच संवाद की कड़ी टूटती जा रही है। रिश्तों में खामोशी छा रही है। कोतवाली परिसर में स्थित महिला सेल में आए दिन पारिवारिक मतभेद की समस्याएं आ रही हैं।

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हर माह आते हैं 60-70 केस
महिला सेल में हर माह पारिवारिक विवाद के 60 से 70 केस सामने आ रहे हैं। इन प्रकरणों को संवेदनशीलता के साथ निपटाया जा रहा है। कई चक्र की काउंसलिंग हो रही है। इसके बाद 60 से 65 फीसदी प्रकरणों का पटाक्षेप हो जाता है जबकि 35 से 40 प्रतिशत मामले कोर्ट-कचहरी तक पहुंच जाते हैं। महिला सेल की इंचार्ज इंस्पेक्टर सुनीता कुंवर बताती हैं कि वैचारिक मतभेद हर प्रकरण में समान रूप से दिख रहा है।

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केस एक
बनभूलपुरा के इमरान (काल्पनिक नाम) और सायरा (काल्पनिक नाम) के निकाह को दस साल हो गए। उनके तीन बच्चे हैं। प्राइवेट नौकरी करने वाले इमरान और सायरा के बीच का मतभेद समय के साथ मनभेद बन चुका है। बंद कमरे का झगड़ा अब तलाक के दरवाजे पर दस्तक दे चुका है। दोनों एक साथ नहीं रहना चाहते। मामला महिला सेल में पहुंच गया। पति का आरोप है कि बीवी बच्चा नहीं संभाल पाती है जबकि पत्नी ने उस पर खर्च के पैसे नहीं देने का आरोप लगाया।

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केस दो
हल्द्वानी के प्रमोद कुमार (काल्पनिक नाम) और राधा (काल्पनिक नाम) के विवाह को सात साल हो गए हैं। किसी न किसी बात पर आए दिन घर में झगड़ा होता है। दोनों एक-दूसरे को ही दोष देते हैं। ऐसे में मामला महिला सेल तक पहुंचा। सेल ने काउंसलिंग का एक चक्र पूरा भी कर लिया है। सामने आया कि दोनों में वैचारिक मतभेद ज्यादा है। एक कुछ कहता है तो दूसरा कुछ और। इसी वजह से उनके बीच दूरी बढ़ी। अब दोनों साथ रहने के लिए तैयार नहीं हैं।

 

 

केस तीन
रामनगर के दंपती के बीच मोबाइल का ज्यादा प्रयोग विवाद का कारण है। दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कि वे मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। शिकायत महिला सेल तक पहुंची। पति रमेश (काल्पनिक नाम) का कहना है कि पत्नी घर के काम नहीं करती है। मोबाइल चलाती रहती है। पत्नी दीपा (काल्पनिक नाम) ने पति पर काम-धाम न करने तथा जान-बूझकर परेशान करने का आरोप लगाया। दोनों अब साथ नहीं रहना चाहते हैं।

 

दो व्यक्तियों के विचार एक जैसे नहीं हो सकते हैं। पति-पत्नी के संबंध में भी यही होता है। दोनों को इसे भली-भांति समझना चाहिए। एक या दोनों को समझौतावादी बनना पड़ेगा। झगड़े रोकने का यही एकमात्र उपाय हो सकता है। ये विवाद मैरिटल डिस्कॉर्ड की श्रेणी में आता है। यदि विवाद न थमे तो मानसिक रोग विशेषज्ञ से मिलकर काउंसलिंग कराएं। परिवार तभी बचेगा जब दोनों में आपसी समझ हो। - डॉ. युवराज पंत, मनोचिकित्सक

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