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बोर्ड परीक्षाओं में घट गई नकलचियों की संख्या
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रामनगर।
Updated Fri, 05 Feb 2016 12:59 AM IST
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बोर्ड परीक्षाओं को नकलविहीन कराने में उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद सफल रहा है। हालांकि विगत वर्ष 44 संयुक्त नकलची पकड़े जाने से पुराने रिकॉर्ड पर कुछ असर जरूर पड़ा है। वर्ष 2010 की बात करें तो इसमें सबसे अधिक 92 नकलची पकड़े गए, जबकि वर्ष 2013 में 13 नकलची पकड़े जा चुके हैं।
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परिषद के अपर सचिव विनोद प्रसाद सिमल्टी ने बताया कि हर वर्ष नकलचियों के घटने का कारण सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद होना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में कुल 92 नकलची पकड़े गए, जिसमें हाईस्कूल में 81, इंटर में 11 नकलची शामिल रहे। वहीं वर्ष 2011 में 35 नकलची पकड़ गए।
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इसमें हाईस्कूल में 16, इंटर में 19 नकलची विभागीय टीम के हत्थे चढ़े। वर्ष 2012 में कुल 32 नकलचियों में से हाईस्कूल में 10, इंटर में 22 नकलची पकड़े गए। इसी तरह वर्ष 2013 में प्रदेश के परीक्षा केंद्रों में 13 नकलचियों में से हाईस्कूल में 4, इंटर में 9 नकलची निकले। वर्ष 2014 में 25 नकलची पकड़े गए।
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इसमें हाईस्कूल में 10, इंटर में 15 परीक्षार्थी शामिल रहे। हालांकि पिछले वर्ष की बोर्ड परीक्षा में यह आंकड़ा एक बार फिर बढ़ गया और उस वर्ष 58 नकलची पकड़े गए। इनमें हाईस्कूल में 3 और इंटर में 55 नकलची नकल करते हुए पकड़े गए।
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित हाईस्कूल, इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं में सबसे अधिक नकलची पौड़ी गढ़वाल में पकड़े जा चुके हैं। वहीं चमोली जिले में सबसे कम नकलची पकड़े गए। नकलचियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2010 में पौड़ी गढ़वाल में हाईस्कूल की परीक्षा में 71 और इंटर में एक नकलची पकड़ा गया था। अभी तक सबसे कम नकलची चमोली जिले में पकड़े गए हैं। वर्ष 2011 में हाईस्कूल की परीक्षा में सिर्फ एक नकलची ही पकड़ा गया था।