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भारत रत्न का भवाली और नौकुचियाताल से रहा है गहरा नाता
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/भवाली (नैनीताल)।
Updated Thu, 10 Sep 2015 12:33 AM IST
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भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत को पहाड़ के लोग हमेशा ही याद रखते हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि देश की आजादी से पहले पंडित पंत ने स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन की शुरुआत यहीं से की थी।
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भवाली उनके बेटे केसी पंत की तो नौकुचियाताल उनकी बेटी लक्ष्मी जोशी की जन्म स्थली रहा है। गैरखान ऐसा गांव है जहां कभी पंडित पंत अपने साथियों के साथ घंटों तक बैठकर अंग्रेजों से दो-दो हाथ करने की रणनीति तय करते थे।
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जानकारी के मुताबिक पंडित पंत वर्ष 1925 में निगलाट के समीप गैरखान की पहाड़ी में रहने वाले अपने दोस्त नारायण दत्त भट्ट के यहां रहने आए। यहीं से उन्होंने देश की आजादी के लिए शुरूआती संघर्ष किया।
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पंडित पंत गैरखान में नारायण दत्त भट्ट के घर पर जिस कमरे में रहते थे वहां उन्होंने एक हथकरघा भी लगाया था जिसमें वह खादी की कताई करते थे।
बुजुर्ग बताते हैं कि दिन भर काम करने के बाद शाम होते ही आसपास के लोग (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी) शिवनारायण सिंह नेगी, बद्री दत्त पांडे, मोहन चंद्र पंत, मोहन सिंह दरम्वाल, खुशीराम टम्टा, श्यामलाल वर्मा, बाबूराम, हीरा बल्लभ बेलवाल समेत कई लोग पंडित पंत से मिलने आते थे और शाम को होने वाली बैठकों में स्वतंत्रता संग्राम की रूपरेखा तय की जाती थी।
बुजुर्ग बताते हैं कि स्थानीय निवासी नारायण दत्त भट्ट से पंडित पंत को अथाह प्रेम था यही कारण था कि वह जब भी यहां आते तो नौकुचियाताल में अपने परिजनों के साथ रहने के बजाए वह सीधे नारायण दत्त भट्ट के घर आ जाते थे।
पंडित पंत ने गैरखाल में युवाओं को आजादी का पाठ भी पढ़ाया था। स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित जरूरी बैठकें भी पंडित पंत की मौजूदगी में गैरखान में ही हुआ करती थी।
बताया जाता है कि पंडित पंत वर्ष 1925 से लेकर वर्ष 1932 तक गैरखान में रहे और इस दौरान देश के अन्य प्रांतों के लोग भी उनसे मिलने यहां पहुंचे।
वर्ष 1928 में पंडित पंत की पुत्री लक्ष्मी जोशी का जन्म नौकुचियाताल में और वर्ष 1931 में भवाली में उनके पुत्र केसी पंत का जन्म हुआ।
बुजुर्ग बताते हैं कि इस दौरान कई बार अंग्रेजों ने पंडित पंत को गिरफ्तार किया और जब भी अंग्रेज पंडित पंत को गिरफ्तार कर ले जाते थे तो उन्हें लाठी-डंडे और कोड़ों से पीटा जाता था। यही कारण है कि क्षेत्र के लोग पंडित पंत को कभी नहीं भूलते हैं।